धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अयोध्या में 6 अरब 40 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा एयरपोर्ट
लखनऊ। यूपी की योगी सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में जुटी हुई है। इसके लिए उसने सबसे पहले अयोध्या को चुना है। यहां धार्मिक स्थलों के विकास के साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने वहां की हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का फैसला किया है। मंगलवार देर रात तक चली यूपी कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। कैबिनेट ने फैसला लिया है कि अयोध्या में बनने वाले एयरपोर्ट के लिए 6 अरब 40 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसके योगी के मंत्रियों ने 11 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।

इस रकम से आपसी समझौते के तहत जमीन खरीदी जाएगी। इसी के साथ राज्यपाल से एयरपोर्ट के लिए खरीदी जाने वाली जमीन को नागरिक उड्डयन उत्तर प्रदेश के नाम दर्ज करने की भी मंजूरी दे दी गई है। एयरपोर्ट के अन्य कार्यों के संबंध में फैसला लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया गया है। अयोध्या में एयरपोर्ट का निर्माण 640.26 लाख करोड़ रुपये से होना है। 200 करोड़ रुपये की रकम अयोध्या के जिलाधिकारी को दी गई है।
इन प्रस्तावों को दी गई मंजूरी
कैबिनेट की बैठक में यूपी में लैंड पूलिंग पॉलिसी के प्रस्ताव, निर्माण सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए लागू की जा रही पॉलिसी में आवास विकास परिषद और विकास प्राधिकरण जमीन मालिक से बगैर कोई विकास शुल्क लिए कुल जमीन का 25 फीसदी हिस्सा निःशुल्क विकसित कर जमीन मालिक को देने का फैसला किया है। बुंदेलखंड और विंध्याचल के 9 जिलों में 15 हजार 722 करोड़ के पेयजल परियोजनाओं के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इसके अलावा बुंदेलखंड के हमीरपुर, झांसी, ललितपुर, महोबा, चित्रकूट, बांदा जिलों के अलावा विंध्याचल के सोनभद्र और मिर्जापुर जिलों में पेयजल परियोजना के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
चीनी मिलों को कर्ज देने की अवधि बढ़ी
सरकार ने किसानों का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित करने के लिए पूर्व की भांति पेराई सत्र 2017-18 में खरीदे गये गन्ने की मात्रा (1111.90 लाख टन) के सापेक्ष साढ़े चार रुपये प्रति क्विंटल की दर से चीनी मिलों को वित्तीय सहायता देने का फैसला किया था। इसके लिए कट आफ डेट तय की गई थी। यह अवधि 15 दिन बढ़ा दी गई है। इसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
प्रदेश की निजी चीनी मिलों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए राज्य सरकार द्वारा साफ्ट लोन योजना स्वीकृत की गई थी जिससे प्रदेश की निजी चीनी मिलों को अवशेष गन्ना मूल्य भुगतान हेतु ऋण के रूप में प्रदेश में स्थित राष्ट्रीयकृत, व्यवसायिक बैंकों एवं उत्तर प्रदेश के सहकारी बैंकों के माध्यम से धनराशि उपलब्ध कराई जानी थी, ताकि ऋण की धनराशि से चीनी मिलें पेराई सत्र 2017-18 का संपूर्ण अवशेष गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित कर सकें। कुछ चीनी मिलों को योजना की घोषित अवधि में ऋण प्राप्त नहीं हो पाया था। गन्ना किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए योजना की अवधि को 15 दिन बढ़ाकर ऐसी चीनी मिलों को अवसर दिया गया है। इससे प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों को उनके बकाये मूल्य का भुगतान संभव हो जाएगा।












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