योगी सरकार का एक साल, उपचुनाव की हार ने डाला रंग में भंग
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को आज एक साल पूरा हो गया है, लेकिन इस एक वर्ष के कार्यकाल के जश्न में हाल ही में हुए उपचुनाव ने खलल डाल दिया है। फूलपुर और गोरखपुर में मिली हार के बाद एक साल के कार्यकाल पूरे होने के कार्यक्रम को अब बड़े स्तर पर नहीं मनाया जाएगा। चुनाव के नतीजे आने से पहले योगी सरकार इस एक साल के कार्यकाल को बड़े जश्न के साथ मनाने की तैयारी में थी। लेकिन अब योगी सरकार ने अब निर्देश दिया है कि इस कार्यक्रम को बहुत बड़े स्तर पर नहीं मनाना है।

भाजपा अभी भी गोरखपुर और फूलपुर में हार से सदमे में है, जिस तरह से पार्टी को योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्या के गढ़ में हार का सामना करना पड़ा है, उसकी खुद पार्टी नेतृत्व को भी उम्मीद नहीं थी। दोनों ही सीटे योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्या के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। दोनों ही सीटों पर हुए उपचुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के सामने भाजपा के उम्मीदवार को बुरी हार का सामना करना पड़ा।
हालांकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस हार के बाद भी योगी आदित्यनाथ को क्लीन चिट दी है और उनके एक वर्ष के कार्यकाल को बेहतर बताते हुए कहा कि यूपी सरकार भाजपा शासित सरकारों में एक बेहतर सरकार है। शाह ने योगी सरकार के विकास कार्यों और केंद्र सरकार की योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन किया है। लेकिन इन सब के बावजूद दोनों सीटों पर मिली हार के बाद योगी आदित्यनाथ एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने का जश्न मनाने के मूड में नहीं हैं।
आपको बता दें कि इससे पहले पार्टी की योजना थी कि वह बड़े स्तर पर सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल का जश्न मनाएगी। इसके लिए लखनऊ के स्मृति उपवन में बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने की योजना थी। लेकिन अब इस कार्यक्रम को लोकभवन में महज औपचारिकता के तौर पर मनाया जाएगा। इससे पहले भाजपा ने योजना बनाई थी कि वह इस कार्यक्रम में अमित शाह, सहित कई केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी को बुलाएगी, साथ ही कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री को भी न्योता देगी। लेकिन उपचुनाव में हार के बाद इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है।
अब इस कार्यक्रम में राज्यपाल राम नाईक मुख्य अतिथि होंगे, इस कार्यक्रम का नाम होगा एक साल बेमिशाल। पार्टी के एक कार्यकर्ता का कहना है कि योगी सरकार ने एक साल के भीतर कई बड़े कदम उठाए हैं, लेकिन उपचुनाव में हार के बाद पार्टी इसे अपने कामों के रेफ्रेंडम के तौर पर देख रही है, लिहाजा कार्यक्रम को छोटे स्तर पर मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ सरकार की उपलब्धियों को गिनाएंगे और आने वाले साल में सरकार की योजनाओं का खाका सामने रखेंगे।












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