बहन की मदद ना करने के आरोप पर भावुक हुए योगी, जानिए क्या कहा? देखें VIDEO

लखनऊ, 02 मार्च। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। सात में से पांच चरण का मतदान हो चुका है और अब सिर्फ दो चरण के मतदान बचे हैं। छठे चरण का मतदान 3 मार्च और सातवे चरण का मतदान 7 मार्च को होना है। ऐसे में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोगों से अपील कर रहे हैं कि वह भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर से सत्ता में आने का मौका दें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गृहस्थ जीवन को त्यागकर संन्यासी के रूप में जीवन व्यतीत करने का फैसला लिया, लेकिन आज भी जब उनके परिवार का जिक्र आता है तो वह भावुक हो जाते हैं।

चाय नाश्ते की दुकान चलाती हैं बहन

चाय नाश्ते की दुकान चलाती हैं बहन

दरअसल योगी आदित्यनाथ इंडिया टीवी के कार्यक्रम में शामिल हुए। इंडिया टीवी को दिए इंटरव्यू में जब योगी आदित्यनाथ से उनकी बहन को लेकर सवाल पूछा गया तो वह भावुक हो गए। इंटरव्यू के दौरान इंडिया टीवी के एडिटर रजत शर्मा ने जब योगी आदित्यनाथ को उनकी बहन का वीडियो दिखाया जिसमे वह उत्तराखंड में मवेशियों को चारा खिला रही हैं, एक छोटी सी चाय-नाश्ते दुकान चला रही हैं।

राजधर्म की शपथ ली है परिवार की नहीं

राजधर्म की शपथ ली है परिवार की नहीं

इस वीडियो के बाद जब उनसे पूछा गया कि जब राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका गांधी को यूपी के चुनाव में ला सकते हैं तो आप भी अपने परिवार का कुछ तो खयाल रख ही सकते हैं। वीडियो देखने के बाद योगी आदित्यनाथ भावुक हो जाते हैं और उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं, जिसके बाद वह कुछ देर खुद को संभालते हैं और कहते हैं मैं एक योगी हूं और मुझे पूरे प्रदेश का ध्यान रखना होता है और मुझे लगता है कि एक मुख्यमंत्री के रूप में मैंने अपने राजधर्म की शपथ ली है, परिवार की नहीं।

हिजाब विवाद पर ये बोले

हिजाब विवाद पर ये बोले

वहीं जब हिजाब विवाद पर योगी आदित्यनाथ से पूछा गया तो उन्होंने कहा देखिए मुझे किसी के पहनावे पर कोई आपत्ति नहीं है, घर में कोई क्या पहन रहा है, बाजार में कौन क्या पहन रहा है, सार्वजनिक जगर पर कोई क्या पहन रहा है उसपर हम लोगों को आपत्ति करने का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन मेरा मानना है कि देश की व्यवस्था संविधान के हिसाब से चलनी चाहिए। देश का संविधान ना हो तो क्या हम तीन तलाक जैसी कुप्रथा को हम रोक पाएंगे, कभी नहीं।

 राष्ट्रधर्म सर्वोपरि

राष्ट्रधर्म सर्वोपरि

कुंभ जैसे महापर्व यहां होते रहे हैं, एक समय ऐसा भी था जब अखाड़े पहले स्नान के लिए लड़ते-झगड़ते थे, खूनी संघर्ष होता था। लेकिन राष्ट्रीय एकात्मकता को ध्यान में रखते हुए सभी ने अपने अहम को शांत किया और सभी ने एक साथ मिलकर इस काम करने का संकल्प लिया। व्यक्तिगत आस्था हमारी अपनी जगह होगी, हम अपनी आस्था को देशपर नहीं थोप सकते, अंत में हम सबके लिए हम सबकी सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है। एक ही धर्म है वह है राष्ट्रधर्म है। इसके बिना कोई राष्ट्र संपन्न नहीं हो सकता है।

विद्यालय में निर्धारित ड्रेस कोड की वकालत

विद्यालय में निर्धारित ड्रेस कोड की वकालत

हमे अपने राष्ट्रधर्म को हर हाल में पूरा करना होगा। अगर एक बालक विद्यालय के निर्धारित ड्रेस में होगा तो अच्छा है। आज विद्यालय की बात है कल को सेना में इसकी मांग उठेगी। कोर्ट ने भी साफ कहा है कि सेना में हम इसकी इजाजत नहीं दे सकते कि वह एक समुदाय प्रमुख का प्रतिनिधित्व करता दिखाई दे, एक सही मायने में उसे सेक्युलर छवि को दर्शाता दिखना चाहिए।

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