RSS की मदद से UP में 'हिंदुत्व' और 'राष्ट्रवाद' के एजेंडे को धार देंगे योगी के मंत्री, जानिए INSIDE STORY
लखनऊ, 28 अप्रैल: उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी कैबिनेट मंत्रियों को यूपी के एक एक मंडल का प्रभार सौंपा गया है। यूपी के 18 मंडलों में बनी 18 टीमों को 18 सप्ताह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सोंपनी है। इसके बाद इस रिपोर्ट पर नोडल अधिकारियों को काम पकड़ाया जाएगा। इसमें अब नया टि्वस्ट ये आया है कि योगी के मंत्रियों के इन दौरों पर क्षेत्र से जुड़े संघ के पदाधिकारियों की भी नजर रहेगी।

बीजेपी के सूत्रों की माने तो यूपी के मंडलों में भ्रमण का पूरा कार्यक्रम संघ के बैनर तले ही किया जाएगा। इसके लिए मंडल के प्रभारी मंत्रियों को अपने अपने इलाके के वरिष्ठ आरएसएस नेताओं से मिलने को कहा गया है। मंत्रियो को अब RSS और उसके अनुसांगिक संगठनों को भी अपने अभियान में शामिल करना होगा और खासतौर से मंडलों की रिपोर्ट का जो ब्लूप्रिंट तैयार होगा वह 'हिंदुत्व' और 'राष्ट्रवाद' पर ही केंद्रित होगा।
मंडलों में संघ के वरिष्ठ नेताओं से मिलना जरूरी
बीजेपी के सूत्रों की माने तो योगी सरकार के दो डिप्टी सीएम और 16 कैबिनेट मंत्रियों को उनके आवंटित डिवीजनों में संघ के प्रमुख नेताओं से मिलने का काम सौंपा गया है, जिससे सत्तारूढ़ सरकार को यूपी सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण जमीनी स्तर के इनपुट हासिल करने में मदद मिल सकती है। दरअसल सभी 18 मंडलों में जो कार्यक्रम चलाया जाएगा उसे 2024 के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि संगठनात्मक कामों को जमीन पर उतारने के लिए RSS और योगी के मंत्रियों को आपस में कोऑर्डिनेशन बनाकर काम करना होगा।

मंत्रियों को विचार परिवार को शामिल करने का फरमान
भाजपा सूत्रों ने कहा कि योगी द्वारा अपने विस्तृत निर्देश में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि मंत्रियों को 'विचार परिवार' से जुड़े कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों को भी अपने साथ जोड़ना होगा जो वहां विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और भाजपा के समान सिद्धांतों को बढ़ावा देते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ कुमार पंकज कहते हैं कि, यह भाजपा की विचारधारा को व्यापक रूप से बढ़ावा दे सकता है जो अनिवार्य रूप से 'हिंदुत्व' और 'राष्ट्रवाद' के इर्द-गिर्द घूमती है। यही दो बातें ऐसी हैं जो हिन्दी पट्टी में जातीय बाधाओं की दीवार को गिरा सकते हैं।
बीजेपी के प्रवक्ता आनंद दुबे कहते हैं कि, मंत्रियों और उनके परिवार के सदस्यों को अपनी संपत्ति की घोषणा करने के लिए कहने का निर्णय भी जवाबदेही के लिए एक अच्छा कदम हो सकता है। पीएम मोदी हों या सीएम योगी, दोनों अपने काम और काम में आगे से आगे बढ़ते रहे हैं। यह मंत्रियों से भी अपेक्षित है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि पार्टी विपक्ष, जाहिर तौर पर सपा, को यूपी में चुनावी हार का सामना करना पड़ा था और बीजेपी फिलहाल इनको रियायत देने के मूड में नहीं है।
विपक्ष को रियायत देने के मूड में नही है बीजेपी
विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा के सत्ता में जोरदार वापसी दर्ज करने के तुरंत बाद, योगी ने यह कहकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे कि चुनाव में जीत केवल खुशी का क्षण नहीं था, बल्कि "नई चुनौतियों का सामना करने के लिए संकल्प भी था। सूत्रों ने कहा कि केंद्र यूपी सरकार पर कानून और व्यवस्था को मजबूत करने के अलावा विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के कुशल कार्यान्वयन के लिए लगातार दबाव बना रहा है, जिसे भाजपा की चुनावी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय दिया जाता है।












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