रालोद-सपा गठबंधन में सेंध ?, जानिए ज्वाइनिंग कमेटी के चेयरमैन लक्ष्मीकांत वाजेपयी ने क्यों कही ये बड़ी बात
लखनऊ, 20 नवंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानून को वापस लेने का ऐलान शुक्रवार को किया था। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पीएम के इस ऐतिहासिक ऐलान के बाद अब बीजेपी के लिए उन राज्यों में स्थितियां सुधरेंगी जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। यूपी में भी अगले साल की शुरूआत में चुनाव होने हैं। बीजेपी इसको लेकर अपनी तैयारियों में जुटी हुई है। पश्चिमी यूपी में सपा और रालोद के बीच गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है लेकिन मोदी के एक मास्टर स्ट्रोक ने कई संभावनाओं को जन्म दिया है। एक संकेत यह भी मिल रहे हैं कि क्या अब रालोद के चीफ जयंत चौधरी इस गठबंधन को लेकर नए सिरे से विचार करने के मूड में हैं। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और ज्वाइनिंग कमेटी के चेयरमैन लक्ष्मीकांत वाजेपयी ने कहा कि सपा-रालोद का गठबंधन अभी प्रस्तावित है इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। आगे आगे देखिए होता है क्या।
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भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में यूपी विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी की ज्वाइनिंग कमेटी के चेयरमैन लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने शनिवार को कहा कि पीएम मोदी ने किसानों को लेकर जो ऐतिहासिक फैसला किया है, इससे विपक्ष पूरी तरह से मुद्दा विहिन हो गया है। सपा-रालोद का गठबंधन अभी प्रस्तावित है। आने वाले समय में अब देखिएगा आगे आगे होता है क्या।
वाजपेयी ने शनिवार को वन इंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान यह बातें कहीं। वाजपेयी ने कहा कि निश्चित तौर पर पीएम के इस ऐतिहासिक फैसले से किसानों में संतोष का भाव है। पीएम की विनम्रता का भाव आया है। इससे राजनीतिक दलों के हाथों से मुद्दा छिन गया है। वह हताश और निराश हैं। अब वह बौखलाहट में इससे ज्यादा क्या कह सकते हैं। प्रस्तुत है लक्ष्मीकांत वाजपेयी से बातचीत के प्रमुख अंश.....

सवाल: पीएम मोदी ने कृषि कानून को वापस लेने का ऐतिहासिक फैसला किया है इससे आने वाले चुनाव में क्या फर्क पड़ेगा।?
जवाब:निश्चित तौर पर पीएम के इस ऐतिहासिक फैसले से किसानों में संतोष का भाव है। पीएम की विनम्रता का भाव आया है। इससे राजनीतिक दलों के हाथों से मुद्दा छिन गया है। वह हताश और निराश हैं। अब वह बौखलाहट में इससे ज्यादा क्या कह सकते हैं। जिस मुद्दे को लेकर विपक्ष किसानों को बरगालाने का काम कर रहा था उसे मोदी जी ने पूरा कर दिया है। अब किसान पूरी तरह से बीजेपी ओर मोदी के साथ है।
सवाल: विपक्ष लगातार इस बात को लेकर हमलावर है कि मोदी ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि उन्हें डर था कि आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है?
जवाब: देखिए। मोदी जी के एक मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं रह गया है। विपक्ष अब मुद्दा विहिन हो गया है। अब वो किस मुंह से सरकार के खिलाफ आवाज उठाने का काम करेंगे। जिस मुद्दे को लेकर वो अपने लिए चुनाव में आशा कि किरण देख रहे थे उसपर पूरी तरह से पानी फिर गया है।
सवाल: पश्चिम यूपी में बीजेपी के खिलाफ सपा-आरएलडी का गठबंधन हो रहा है, इससे बीजेपी को कितना खतरा है ?
जवाब: रालोद और सपा के बीच गठबंधन प्रस्तावित है। किसानों के मुद्दों के मुद्दे को लेकर ही दोनों पार्टियां एक जुट हुई थीं। अब जब किसानों का कोई मुद्दा ही नहीं रहा तो फिर भविष्य में क्या संभावनाएं बनेंगी यह तो भविष्य की बात है। अब आगे आगे देखिए होता है क्या?

सवाल: बीजेपी के सांसद वरूण गांधी ने पीएम को पत्र लिखकर किसान आंदोलन में मृत हुए किसानों के लिए मुआवजे की मांग की है ?
जवाब: देश की किसी भी नागरिक को पीएम को पत्र लिखने और अपनी बात कहने का अधिकार है। वरूण गांधी ने पीएम को जो पत्र लिखा है, उसपर प्रधानमंत्री अपने इच्छानुसार कदम उठाएंगे लेकिन एक बात कहना चाहूंगा कि वरूण गांधी को पीएम के इस कदम की सराहना भी करनी चाहिए।
सवाल: आप पश्चिमी यूपी में बीजेपी का बड़ा चेहरा रहे हैं और पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। बीजेपी ने आपको ज्वाइनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाकर अहम जिम्मेदारी दी है, उसको लेकर क्या कहेंगे?
जवाब: देखिए मैं बीजेपी का पश्चिमी यूपी का ब्राह्मण चेहरा नहीं बल्कि यूपी का पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहा हूं। संगठन ने अब जिम्मेदारी सौंपी है उसे लेकर काम किया जा रहा है। हमारे साथ जो सहयोगी दिए गए हैं उनमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मोर्य, उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा और प्रदेश के उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह शामिल हैं। सबको साथ लेकर काम कर रहा हूं। जल्द ही आने वाले दिनों में बीजेपी में कई चेहरे ज्वाइन करते दिखाई देंगे।
सवाल: आपको क्या लगता है कि अगले विधानसभा चुनाव में बीजेपी अपना पुराना प्रदर्शन दोहरा पाएगी ?
जवाब: निश्चित तौर पर 2014 में बीजेपी को सफलता मिली थी वह कार्यकर्ताओं और बूथ पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की सफलता थी। उसके बल पर 2017 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आने वाले चुनाव में बीजेपी 2017 से भी ज्यादा सीटें हासिल कर सरकार बनाएगी। यूपी में एक बार फिर राष्ट्रवादियों की सरकार बनेगी।

सपा-रालोद के गठबंधन का अभी औपचारिक ऐलान नहीं
दरअसल, जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन पर बात करते हुए कहा था कि, 'इस महीने (नवंबर) के अंत तक, हम (रालोद और समाजवादी पार्टी) निर्णय लेंगे और साथ आएंगे। हालांकि, दोनों दलों के बीच गठबंधन लगभग-लगभग तय है लेकिन अभी इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। तो वहीं, सीट बंटवारे सहित कुछ मामलों पर विचार हो रहा है। आपको बता दें, किसान आंदोलन से पश्चिमी यूपी में रालोद को पॉलिटिकल माइलेज मिला है। हालांकि रालोद के सूत्र भी यह बता रहे हैं कि किसानों का मुद्दा हाथ से निकलने के बाद पश्चिमी यूपी में बीजेपी की स्थिति का आंकलन किया जाएगा उसके बाद ही सपा के साथ किसी तरह के गठबंधन के नतीजे पर पार्टी पहुंचेगी।












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