कोरोना की दूसरी लहर क्यों बनी इतनी घातक? निगेटिव होने के बाद भी आईसीयू में लंबे समय से भर्ती हैं मरीज

नोएडा/गाजियाबाद। कोरोना महामारी की दूसरी लहर की रफ्तार कम तो हुई है लेकिन इस बार यह पहली लहर की अपेक्षा बहुत घातक रही। नोएडा और गाजियाबाद के अस्पतालों में कोविड वार्ड के बेड तो खाली है लेकिन उन्हीं अस्पतालों के आईसीयू और पोस्ट कोविड वार्ड अभी भी मरीजों से भरे हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेंस (जीआईएमएस) के डॉक्टरों के मुताबिक, पहली लहर की तुलना में इस बार दूसरी लहर में कोविड मरीजों को आईसीयू वार्ड में ज्यादा दिनों तक रहना पड़ा। कई मरीज कोरोना से तो मुक्त हो गए लेकिन उनकी सेहत में सुधार नहीं हुआ। दूसरी लहर में कोरोना निगेटिव होने के बाद भी मरीजों में ऑक्सीजन स्तर की कमी, फेफड़े में संक्रमण जैसे कॉम्प्लिकेशंस रहे जिसके इलाज के लिए उनको आईसीयू में ज्यादा समय तक रखना पड़ रहा है।

Why second wave of coronavirus is so fatal for patients

गाजियाबाद के डिस्ट्रिक्ट कंबाइंड हॉस्पिटल के डॉक्टर के अनुसार, शास्त्री नगर निवासी 55 वर्षीय सदानंद पांडे को 15 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पांच दिन बाद वे कोविड निगेटिव हो गए लेकिन ऑक्सीजन स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ। जांच में पता चला कि उनको लंग फाइब्रोसिस हो गया है। सदानंद पांडे को चलने में परेशानी हो रही है। एक महीने से उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर संजय तेवतिया के मुताबिक, इतने अधिक समय तक अस्पताल में रहकर कोविड संबंधित कॉम्प्लिकेशंस का इलाज कराने वालों में सदानंद पांडे अकेले नहीं हैं। 521 में से 80 मरीजों को पोस्ट कोविड कॉम्पलिकेशंस का इलाज कराने के लिए अस्पताल में 15-20 दिन तक रहना पड़ा। इनमें से 90 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन थेरेपी की जरूरत थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर इस बात की पुष्टि करते हैं कि पहली लहर की अपेक्षा दूसरी लहर में कोरोना न सिर्फ तेजी से फैला बल्कि लंबे समय तक मरीज में रहा। डॉक्टर संजय तेवतिया ने बताया कि कई मरीज जो कोरोना से मुक्त हो गए, उनका इलाज अभी भी चल रहा है। ये मरीज बुखार, सूखी खांसी, सिर दर्द और बदन दर्द से पीड़ित हैं। दूसरी लहर में जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी, उनको पोस्ट कोविड कॉम्पलिकेशंस से 25 से 60 दिनों तक जूझना पड़ा।

जीआईएमएस के डायरेक्टर राकेश गुप्ता के मुताबिक, पहली लहर में संक्रमण करीब दस दिन तक रहा था और कम लोगों को आईसीयू की जरूरत पड़ी थी। लेकिन दूसरी लहर में मरीजों की हालत गंभीर रही और उनको आईसीयू बेड की जरूरत पड़ी। पिछले दो महीनों में कई मरीजों को आईसीयू में 10 से 15 दिनों तक भर्ती रहना पड़ा। लंबे समय तक आईसीयू में रहने की वजह से मृत्यु दर भी ज्यादा रही। डॉक्टर राकेश गुप्ता के अनुसार, जीआईएमएस में पिछले साल की पहली लहर में 55 कोविड मरीजों की मौत हुई थी। इस साल दूसरी लहर में पिछले दो महीनों में ही 120 मरीजों की जान चली गई।

गाजियाबाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉक्टर आशीष अग्रवाल गायत्री अस्पताल से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन स्तर में कमी होने की वजह से अस्पतालों में मरीजों को ज्यादा समय तक इलाज कराना पड़ रहा है। इन मरीजों के फेफड़े में संक्रमण है जिसको ठीक होने में समय लगता है। इससे मरीजों को घबराहट और चिंता होती है जिससे रिकवरी में और ज्यादा समय लग जाता है।

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