अखिलेश के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर योगी सरकार की नजर क्यों हुई टेढ़ी, जानिए क्या है इसका हाल

लखनऊ, 27 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में जब अखिलेश यादव यानी समावजादी पार्टी की सरकार थी तब गोमती रिवर फ्रंट योजना को गाजे बाजे के साथ शुरू किया गया था। तब के लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव ने इस परियाजना पर पानी की तरह पैसा बहाया था। या यूं कहें कि इस परियोजना को सपा की सरकार में फलने फूलने का मौका मिला लेकिन 2017 में जैसे ही योगी सरकार यूपी में आई उसके बाद से ही इसके बुरे दिन शुरू हो गए। हालांकि सरकार बदलने के बाद इस योजना की जांच करारकर कई अधिकारियों पर केस दर्ज किए गए लेकिन हालत यह है कि जो योजना लखनऊवासियों के लिए गर्व का विषय हो सकती थी वह अब अपनी बदहाली पर आसूं बहा रही है।

योगी सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर बैठाई CBI जांच

योगी सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर बैठाई CBI जांच

अखिलेश सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट गोमती रिवर फ्रंट योजना सियासत की भेंट चढ़ गई है। इस योजना में करीब 11 सौ करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन ये पूरा नहीं हो सकी। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनते ही इस योजना पर सीबीआई जांच बिठा दी गई। जिसमें कृषि विभाग के अफसर जेल पहुंच गए। इसके बाद इस रिवर फ्रंट के संरक्षण की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण को मिली। मगर एक छोटे से स्ट्रेच को छोड़कर पूरे रिवरफ्रंट का बहुत बुरा हाल है।

अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट पर खर्च हुए 1100 करोड़ रुपए

अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट पर खर्च हुए 1100 करोड़ रुपए

रिवर फ्रंट डेवलमेंट योजना हनुमान सेतु से ला मार्टिनियर कॉलेज ग्राउंड तक नदी के दोनों ओर विकसित की गई। जिस पर काम साल 2013 में शुरू हुआ था। सिचाई विभाग ने अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाना शुरू किया था। वहीं 2017 आते-आते 1100 सौ करोड़ रुपये खर्च हो गये, लेकिन यह काम पूरा नहीं हो सका। इसके बाद समाजवादी पार्टी की सरकार चली गई। भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई, तो सबसे पहले इस मामले में विभागीय जांच शुरू हुई।

योगी सरकार ने इसके रखरखाव को दिए गए 39 करोड़ रुपए

योगी सरकार ने इसके रखरखाव को दिए गए 39 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कहने पर सीबीआई ने प्रकरण की जांच शुरू की और अनेक अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करके कुछ को जेल भी भेज दिया गया। इसी बीच सरकार ने इस प्रोजेक्ट के रख-रखाव की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण को दे दी। जिसके लिए शुरुआती साल में ₹39 करोड़ भी दिए गए। शुरुआत में यहां पर पेड़ पौधे जमकर लगाए गए और अच्छा काम हुआ मगर 8 किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट में 6 किलोमीटर काम कहीं नजर नहीं आ रहा हर और गंदगी है।

LDA की लापरवाही से ठंडे बस्ते में पड़ी यह योजना

LDA की लापरवाही से ठंडे बस्ते में पड़ी यह योजना

गोमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में कोई भी आ जा सकता है। नदी किनारे लगाई गई रेलिंग गायब है। दुर्घटनाओं को खुला दरबार इस प्रोजेक्ट में मिल रहा है। मगर एलडीए का एक कर्मचारी यहां रख-रखाव के लिए नजर नहीं आता है। इस बारे में लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता कमलजीत सिंह ने अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी किये हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता आनंद दुबे का कहना है कि निश्चित तौर पर सीबीआई जांच एक अलग विषय है, मगर लखनऊ विकास प्राधिकरण को गोमती रिवर फ्रंट विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है। उनको अब हर हाल में बेहतर रख-रखाव करना होगा।

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