3 साल की मासूम से हैवानियत-हत्या, जानवर भी रहे शिकार! 7 बच्चों के बाप Kamble को 55 गवाहों ने सूली पर चढ़ाया

Pune Bhimrao Kamble Case Explainer: एक मासूम 3 साल की बच्ची। गर्मियों की छुट्टियां मनाने नानी के घर पहुंची। दोपहर का वक्त। और एक 60 पार का शख्स, जो 7 बच्चों का बाप और 11 बच्चों का दादा होने के बावजूद अपनी वासना की भूख मिटाने के लिए हैवान बन गया। भीमराव कांबले नाम का यह दरिंदा अब समाज की नजर में कोई इंसान नहीं, बल्कि एक जघन्य अपराधी है, जिसे फांसी की सजा सुनाई गई है।

सोमवार को पुणे की फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कांबले को मृत्युदंड की सजा दी। जज एस.आर. सालुंखे ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी का अपराध करार दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि आरोपी का कृत्य बेहद क्रूर, अमानवीय और बर्बर था। यह फैसला वारदात के महज 60 दिन के अंदर आया है, जो न्याय व्यवस्था की तेजी को दिखाता है, लेकिन समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाली इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि ऐसी हैवानियत कब तक जारी रहेगी।

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1 मई की वह दुपहरी, मासूम के साथ हैवानियत, नन्हे शरीर पर 18 चोटें-मौत

1 मई 2026 को पुणे जिले के नसरापुर गांव में यह जघन्य वारदात हुई। बच्ची अपनी नानी के घर गर्मियों की छुट्टियों में आई हुई थी। दोपहर 3 से 4 बजे के बीच भीमराव कांबले ने उसे खाने-पीने की चीजें और गाय का नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर बहला-फुसलाया। एक निर्दोष बच्ची को लुभाने के लिए इस्तेमाल किए गए इन छोटे-छोटे लालच ने कितनी भयानक कहानी लिखी, यह सोचकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

कांबले उसे मवेशियों के तबेले के पास बने एक शेड में ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ हैवानियत की, और फिर पत्थर से उसके सिर को कुचलकर निर्मम हत्या कर दी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के नन्हे शरीर पर 18 चोटों के निशान मिले। यह मात्र यौन अपराध नहीं, बल्कि शैतानियत की पराकाष्ठा थी।

जज एस.आर. सालुंखे ने फैसले में तीखे शब्दों में कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य तरीके से किया गया। इसमें पीड़िता के साथ अमानवीय व्यवहार और यातना शामिल थी। पीड़िता एक मासूम, असहाय बच्ची थी। यह हत्या वहशी ने अपनी वासना के लिए की, जो पूर्ण रूप से नैतिक पतन को बताती है। यह बिना किसी उकसावे के ठंडे दिमाग की हत्या है। यह अपराध इतनी बेरहमी से अंजाम दिया गया कि यह न केवल न्यायिक विवेक को, बल्कि समाज की अंतरात्मा को भी झकझोर देता है।

Who Is Bhimrao Kamble: पहले भी कर चुका है दरिंदगी

भीमराव कांबले पेशे से मजदूर है। लेकिन उसकी आपराधिक इतिहास इसे साधारण मजदूर नहीं, बल्कि 'बार-बार यौन अपराध करने वाला व्यक्ति' बनाती है। बच्ची के वकील ने कोर्ट में खुलासा किया कि कांबले पहले भी एक 62 साल की बुजुर्ग महिला, एक 17 साल की किशोरी और यहां तक कि एक पशु के साथ भी हैवानियत कर चुका है।

कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया। जज ने कहा कि आरोपी की उम्र सजा कम करने का आधार नहीं, बल्कि सजा बढ़ाने का कारण है। 'इस उम्र में भी आरोपी की वासना की प्यास नहीं बुझी, बल्कि यह एक अत्यंत खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है।' कांबले ने सोचा होगा कि उसका पुराना अनुभव उसे बचाएगा, लेकिन इस बार न्याय ने उसे करारा जवाब दिया।

अपनी दलीलों में कांबले के वकील ने उम्र का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने सख्ती से खारिज कर दिया। आरोपी में न तो पश्चाताप के कोई संकेत थे और न ही सुधरने की कोई संभावना। ऐसे में मृत्युदंड ही एकमात्र उचित सजा थी।

सुनवाई कैसे चली? फास्ट ट्रैक कोर्ट का रिकॉर्ड समय

यह मामला फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में चला। लोक अभियोजक अजय मिसर ने 55 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इनमें फोरेंसिक विशेषज्ञ, जांच अधिकारी, पीड़िता के परिजन और बाल गवाह शामिल थे। अदालत ने CCTV फुटेज, DNA रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, पोटेंसी टेस्ट और मेंटल फिटनेस असेसमेंट को मजबूत साक्ष्य माना।

25 जून को दोषी करार दिए जाने के बाद 29 जून को सजा सुनाई गई। सोमवार सुबह 11 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया। कांबले ने आखिरी मौके पर भी कहा कि उसने कोई अपराध नहीं किया। झूठ और बेशर्मी की इस मिसाल ने कोर्ट को और आश्वस्त किया कि ऐसा दरिंदा समाज के लिए खतरा है।

POCSO Act: बच्चों की सुरक्षा का कवच

प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट (POCSO), 2012 ठीक इसी तरह की हैवानियत रोकने के लिए बना था। 2012 के निर्भया कांड के बाद इसे और सख्त बनाया गया। 2019 में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म-मर्डर जैसे मामलों में फांसी का प्रावधान जोड़ा गया।

पॉक्सो के तहत सजाएं:

  • यौन उत्पीड़न: 3 साल तक जेल + जुर्माना
  • यौन हमला: 3-5 साल जेल + जुर्माना
  • गंभीर यौन हमला: 5-7 साल जेल + जुर्माना
  • दुष्कर्म-मर्डर (रेयरेस्ट ऑफ रेयर): कम से कम 20 साल जेल, आजीवन कारावास या फांसी

पुणे कोर्ट ने इसी प्रावधान के तहत कांबले को फांसी दी। जज सालुंखे ने टिप्पणी की कि निर्भया कांड के बाद सख्त कानून और स्पेशल कोर्ट बने, फिर भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं। समाज को बार-बार आहत होना पड़ रहा है।

NCRB डेटा: महाराष्ट्र में बाल अपराध का भयावह आंकड़ा

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2024 के आंकड़े और भी चिंताजनक हैं। महाराष्ट्र बाल अपराध के मामलों में देश में सबसे आगे है।

2023 बनाम 2024 (कुछ प्रमुख राज्य):

राज्य 2023 2024 अंतर
महाराष्ट्र 22,390 24,171 +1,781
उत्तर प्रदेश 18,852 22,222 +3,370
मध्य प्रदेश 22,393 21,908 -485
बिहार 9,906 13,349 +3,443
तमिलनाडु 6,968 10,046 +3,078

महाराष्ट्र में 24,171 मामले दर्ज हुए। बिहार में सबसे तेज बढ़ोतरी। मध्य प्रदेश में मामलों में गिरावट आई, जो रोकथाम उपायों का सकारात्मक संकेत हो सकता है। लेकिन कुल मिलाकर किशोर और बाल अपराध बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञ सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक टूटन और डिजिटल प्रभावों को जिम्मेदार ठहराते हैं।

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