British Maulana Shamsul Huda कौन है, जिसके मदरसे पर चला CM Yogi का बुलडोजर? पाकिस्तान कनेक्शन-विदेशी फंडिंग

British Maulana Shamsul Huda Khan: उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर के खलीलाबाद स्थित गोश्त मंडी में यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) सरकार की बुलडोजर कार्रवाई कथित अवैध मदरसे पर हुई। भारी पुलिस बल और कड़ी सुरक्षा के बीच ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान के कथित अवैध मदरसे पर बुलडोजर चल पड़ा। 6 बुलडोजर, 2 पोकलैंड मशीनें और करीब 100 पुलिसकर्मी (30 महिला सिपाही समेत) मौके पर तैनात। दो बुलडोजर के ब्लेड टूट गए, एक मशीन खराब हो गई, फिर भी 3 पिलर गिर चुके हैं। अब 45 से ज्यादा पिलर बाकी। तीन मंजिला इमारत (640 वर्ग मीटर, 25 कमरे, 5 करोड़ की लागत) को पूरी तरह ध्वस्त करने की कार्रवाई जारी है।

यह मदरसा 'कुलियातुल बनातिर रजबिया' नाम से जाना जाता था। 2024 में बंद होने से पहले यहां 400 बच्चे (ज्यादातर लड़कियां) पढ़ते थे। CM योगी आदित्यनाथ सरकार की सख्ती का यह नया उदाहरण है। लेकिन सवाल उठता है कि ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान आखिर कौन है? पाकिस्तान से उसका कनेक्शन क्या? विदेशी फंडिंग का रैकेट कैसे चला? आइए पूरी कहानी विस्तार से समझते हैं...

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Who Is Shamsul Huda Khan: कौन हैं शमसुल हुदा खान? आजमगढ़ से ब्रिटेन तक का सफर

शमसुल हुदा खान का जन्म 12 जुलाई 1984 को संतकबीरनगर जिले के देवरिया लाला गांव (दुधारा थाना) में हुआ। मूल रूप से आजमगढ़ का रहने वाला। 2007 में वह ब्रिटेन चला गया। 2013 में ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली। लेकिन भारत से नाता नहीं टूटा।

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वह 2007 से 2017 तक आजमगढ़ के 'दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम' में सहायक अध्यापक के पद पर था। ब्रिटेन में रहते हुए भी उसने 31 जुलाई 2017 तक सरकारी वेतन लिया - कुल 16 लाख रुपये से ज्यादा। अनियमित मेडिकल लीव, VRS (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) और यहां तक कि जीपीएफ-पेंशन का फायदा भी लिया। ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद यह सब कैसे? अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की मिलीभगत का आरोप। करीब 5 महीने पहले मामले के सामने आने पर विभाग के 4 अधिकारियों को निलंबित किया गया, संयुक्त निदेशक एसएन पांडे, गाजियाबाद DMO साहित्य निकष सिंह, बरेली के लालमन और अमेठी के प्रभात कुमार।

2017 में वह भारत छोड़कर ब्रिटेन चला गया। लेकिन परिवार खलीलाबाद में ही है कि पत्नी सकलैन खातून, बेटा तौसीफ रजा और बहू नसरीन। मौलाना खुद ब्रिटेन में रहता है, लेकिन भारत में मदरसों और NGO के जरिए सक्रिय था।

Illegal Madrasa: सरकारी जमीन पर 5 करोड़ का निर्माण

मदरसा खलीलाबाद (UP Bulldozer Khalilabad Madrasa) तहसील के खलीलाबाद गांव (मोतीनगर मोहल्ला, गाटा संख्या 154) पर बना। 640 वर्ग मीटर (करीब 7000 वर्ग फीट) सरकारी जमीन पर। नक्शा पास नहीं, मंजूरी नहीं। 2024 में गांव निवासी अब्दुल हकीम ने SDM कोर्ट में शिकायत की। नवंबर 2025 में SDM कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिया। मदरसा कमेटी ने DM और कमिश्नर कोर्ट में अपील की, लेकिन 25 अप्रैल 2026 को बस्ती मंडल कमिश्नर ने अपील खारिज कर दी। कोई केस लंबित नहीं बचा, इसलिए रविवार को कार्रवाई शुरू।

SD M हृदय राम तिवारी ने कहा, 'जमीन सरकारी में मिला दी गई थी। निर्माण पूरी तरह अवैध था।' अतिरिक्त DM जय प्रकाश और CO प्रियम राजशेखर मौके पर मौजूद।

विदेशी फंडिंग का रैकेट और पाकिस्तान कनेक्शन

एजेंसियों (ATS, ED) की जांच में चौंकाने वाले खुलासे:

  • NGO 'राजा फाउंडेशन' के जरिए विदेशी फंडिंग। अलग-अलग मदरसों में पैसे भेजे गए। व्यक्तिगत बैंक खातों का भी इस्तेमाल।
  • ED का PMLA केस (दिसंबर 2025): मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप। विदेशी मुद्रा अधिनियम का उल्लंघन।
  • ATS जांच: 2007 से संदिग्ध गतिविधियां। पाकिस्तान के कई शहरों का दौरा। वहां के मौलवियों और संगठनों से संपर्क। जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से भी कनेक्शन।
  • दावत-ए-इस्लामी: पाकिस्तान का कट्टरपंथी संगठन। मौलाना इसके सदस्य माने जाते हैं। भारत में इस्लामी प्रचार के नाम पर कट्टरपंथ फैलाने का आरोप।

UP पुलिस ने उसके खिलाफ 3 FIR दर्ज कीं:

  • संतकबीरनगर (खलीलाबाद कोतवाली, 2 नवंबर 2024): धोखाधड़ी, विदेशी मुद्रा अधिनियम उल्लंघन, अवैध आर्थिक लाभ, आपराधिक साजिश।

  • आजमगढ़: धोखाधड़ी और आर्थिक गड़बड़ी।

  • तीसरा केस: विदेशी फंडिंग और संदिग्ध गतिविधियां।
  • पहले दो मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।

    मदरसा 2024 में पहली बार सील हुआ। मौलाना ने पास की बाउंड्री में दूसरा मदरसा खोल लिया। नवंबर 2025 में वह भी सील। एक मकान में गर्ल्स हॉस्टल भी चलाता था - संतकबीरनगर, बस्ती, आजमगढ़ समेत कई जिलों की लड़कियां रहती थीं।

    Yogi Government का सख्त रुख: क्यों चला बुलडोजर?

    UP में CM योगी आदित्यनाथ सरकार अवैध निर्माण, विदेशी फंडिंग और कट्टरपंथ पर जीरो टॉलरेंस बरत रही है। यह कार्रवाई सिर्फ एक मदरसे की नहीं - अवैध मदरसों, फर्जी फंडिंग और रेडिकलाइजेशन के खिलाफ बड़ी मुहिम का हिस्सा है। प्रशासन का कहना है कि मदरसा 2024 से बंद था, लेकिन इमारत खड़ी रखकर फंडिंग का नेटवर्क चल रहा था।

    कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। PAC की दो कंपनियां तैनात। स्थानीय लोग चुपचाप देख रहे हैं। मदरसा कमेटी अब कोई कानूनी रास्ता नहीं बचा पाई।

    बड़े सवाल और मायने

    • विदेशी फंडिंग का खतरा: भारत में मदरसों में विदेशी पैसा आने से कट्टरपंथ फैलने का खतरा। ED-ATS की जांच में ऐसे कई नेटवर्क सामने आए हैं।
    • सरकारी सैलरी घोटाला: ब्रिटिश नागरिक सरकारी वेतन ले - यह सरकारी खजाने के साथ धोखा। 4 अधिकारियों का निलंबन सिर्फ शुरुआत।
    • पाकिस्तान कनेक्शन: दावत-ए-इस्लामी जैसे संगठनों से लिंक। भारत की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय।
    • मदरसा सुधार: UP सरकार मदरसों का सर्वे करा रही है। पाठ्यक्रम आधुनिक बनाने और फंडिंग की पारदर्शिता पर जोर।

    यह मामला सिर्फ एक इमारत गिराने का नहीं। यह दिखाता है कि UP में अवैध निर्माण, फर्जी फंडिंग और संदिग्ध गतिविधियों पर सरकार की नजर कितनी पैनी है। मौलाना ब्रिटेन में है, लेकिन उसका नेटवर्क भारत में था। ED-ATS की जांच आगे बढ़ रही है। परिवार अभी खलीलाबाद में है।

    बुलडोजर एक्शन ने एक बार फिर साबित किया कि कानून के राज में कोई भी ऊपर नहीं। शमसुल हुदा खान का केस विदेशी फंडिंग, पाकिस्तान लिंक और सरकारी धोखाधड़ी का मिसाल बन गया है। अब देखना होगा कि जांच में और कितने बड़े खुलासे होते हैं। क्या ब्रिटेन से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू होगी? क्या मदरसा शिक्षा में बड़े सुधार आएंगे?

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