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B L Verma: कौन हैं बीएल वर्मा? किस जाति से आते हैं? तय माना जा रहा है इनका UP प्रदेश अध्यक्ष बनना!

UP BJP President (B L Verma): उत्तर प्रदेश बीजेपी में इन दिनों प्रदेश अध्यक्ष बदलने को लेकर हलचल चरम पर है। भूपेंद्र चौधरी की पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह से मुलाकात के बाद अटकलें तेज हैं कि पार्टी 14 दिसंबर के खरमास से पहले नए प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान कर सकती है। नाम कई चल रहे हैं, लेकिन रेस में जो सबसे आगे बताया जा रहा है, वह हैं राज्यसभा सांसद बनवारी लाल वर्मा यानी बीएल वर्मा। हालांकि अभी तक भाजपा ने अधिकारिक तौर पर किसी नेता के नाम पर मुहर नहीं लगाई है।

कुल मिलाकर अगर पार्टी किसी बड़े चौंकाने वाले फैसले पर नहीं जाती है, तो UP BJP प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बीएल वर्मा का बैठना लगभग तय माना जा रहा है। सवाल उठ रहा है-आखिर कौन हैं बीएल वर्मा और क्यों माना जा रहा है कि वही बीजेपी के अगले प्रदेश अध्यक्ष होंगे।

UP BJP President B L Verma

🟡 बीएल वर्मा: बूथ लेवल से राजनीति की शुरुआत करने वाला बड़ा नाम (who is B L Verma)

🔹 Banwari Lal Verma Biography: बीएल वर्मा का जन्म 1961 में उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के उझानी में हुआ। बदायूं जिले के उझानी तहसील के गांव ज्योरा पारवाला में जन्मे बीएल वर्मा की शुरुआती जिंदगी बिल्कुल साधारण रही। गांव में ही उन्होंने पांचवीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कछला कस्बे के राधेश्याम इंटर कॉलेज भेजा गया, जिसे भागीरथी गंगा घाट वाले इलाके के रूप में जाना जाता है। वहीं से उन्होंने इंटर की पढ़ाई पूरी की और फिर उच्च शिक्षा के लिए शाहजहांपुर चले गए, जहां से उन्होंने परास्नातक की डिग्री हासिल की।

🔹 पढ़ाई पूरी होने के बाद बीएल वर्मा ने राजनीति नहीं, बल्कि रोजगार की राह पहले चुनी। बदायूं के उझानी कस्बे में उन्होंने किराए का घर लिया और वहीं से बीमा एजेंट के रूप में काम शुरू किया। आज जिस नेता को प्रदेश अध्यक्ष का सबसे मजबूत दावेदार बताया जा रहा है, वह कभी घर-घर जाकर लोगों को बीमा पॉलिसी समझाया करते थे।

🔹 आज भले ही वह पार्टी के सीनियर और प्रभावशाली नेता माने जाते हों, लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में बूथ स्तर से शुरू हुई थी। 1984 में वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महामंत्री बने और यहीं से उनका राजनीतिक कद बढ़ना शुरू हुआ। बाद में 1997 में युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री और 2003 से 2007 तक BJP के प्रदेश मंत्री रहे।

🔹 उनको संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाला नेता माना जाता है। वे दो बार पार्टी के ब्रज क्षेत्र के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बाद में उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया, जिससे उनका कद और बढ़ गया। यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के भी वे अध्यक्ष रहे हैं।

UP BJP President B L Verma

🟡 किस जाति से आते हैं बीएल वर्मा? (B L Verma Caste)

Banwari Lal Verma Caste: बीएल वर्मा लोधी समाज से आते हैं, जो ओबीसी कैटेगरी में आता है। यूपी की राजनीति में लोधी समुदाय का प्रभाव खासतौर पर पश्चिमी यूपी में काफी माना जाता है। बीएल वर्मा को पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता कल्याण सिंह का करीबी माना जाता है। दोनों एक ही समुदाय से होने के चलते बीएल वर्मा की पहचान पहले ही मजबूत हो चुकी थी और यही वजह है कि वे ओबीसी राजनीति के महत्वपूर्ण चेहरे बन गए।

ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में भी वे काम कर चुके हैं। भाजपा की राजनीति में वोटों के समीकरण की बात करें तो लोधी समाज पर उनकी मजबूत पकड़ पार्टी के लिए बड़ा प्लस पॉइंट है।

🟡 B L Verma Political career: राज्यसभा में एंट्री और मोदी कैबिनेट में जिम्मेदारी

बीएल वर्मा को 2020 में राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। सिर्फ एक साल बाद, जुलाई 2021 में जब मोदी सरकार का विस्तार हुआ तो उन्हें दो मंत्रालयों में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली सहकारिता मंत्रालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय।

मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भी वे केंद्रीय मंत्री बने रहे। फिलहाल वे उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग व सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।

UP BJP President B L Verma

🟡 RSS से जुड़ाव और भाजपा में लंबी संगठनात्मक यात्रा

बीएल वर्मा का राजनीतिक सफर भले ही चुनावी मंचों से दूर रहा हो, लेकिन संगठन के भीतर उनकी मजबूती लगातार बढ़ती गई।
● 1979 - RSS से जुड़ाव शुरू
● 1980 - भाजपा की सदस्यता ग्रहण
● जिला कमेटी में सदस्य के रूप में शुरुआत
● 1984 - भाजपा जिला युवा कमेटी के महामंत्री
● 1990 - भाजपा प्रदेश महामंत्री
● 1996 - युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री

वर्मा हर जिम्मेदारी में लगातार ऊपर बढ़ते गए और उनके अनुशासित स्वभाव ने उन्हें संगठन में भरोसेमंद चेहरा बना दिया।

🟡 कल्याण सिंह के साथ चले, फिर वापसी पर मिला बड़ा कद

2009 में जब कल्याण सिंह भाजपा से अलग हुए, तो वर्मा भी उनके साथ हो लिए।
● 2009-2012 - कल्याण सिंह की जन क्रांति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष
2013 में जब जन क्रांति पार्टी का भाजपा में विलय हुआ, वर्मा फिर लौट आए और उन्हें पार्टी ने नया रोल दे दिया।
● 2013 - भाजपा रूहेलखंड के क्षेत्रीय अध्यक्ष
● 2018 - प्रदेश उपाध्यक्ष और सिडको चेयरमैन (राज्य मंत्री दर्जा)
● 2019 - क्षेत्रीय संगठन मंत्री
● 2020 - राज्यसभा सांसद
● 2021 - भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

🟡 चुनाव कभी नहीं लड़ा, फिर भी शीर्ष नेतृत्व की पहली पसंद क्यों?

बीएल वर्मा को लेकर अक्सर कहा जाता है कि उन्होंने आज तक एक भी चुनाव नहीं लड़ा। न उनके किसी बड़े जनाधार की चर्चा होती है और न ही वे कहीं पब्लिक रैलियों में बड़े चेहरे रहे। बीएल वर्मा हमेशा संगठनात्मक पदों तक सीमित रहे। चुनावों में उनकी भूमिका महज सभाओं और बैठकों में उपस्थित रहने तक रहती थी।

फिर सवाल उठता है-जब लोधी-राजपूत बिरादरी के कई जनाधार वाले नेता मौजूद हैं, तब भी बीएल वर्मा ही शीर्ष नेतृत्व की पसंद क्यों बन जाते हैं? इस पर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीएल वर्मा का सबसे बड़ा गुण है उनका अनुशासन, चुपचाप काम करने की क्षमता और उच्च नेतृत्व के प्रति अटूट भरोसा।

अच्छा संगठन कौशल, शांत स्वभाव, नेतृत्व पर विश्वास और लोधी समाज में मजबूत पकड़-इन सबने बीएल वर्मा को उस कद तक पहुंचा दिया है, जहां आज वे यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं।

🟡 बीएल वर्मा ही क्यों माने जा रहे हैं UP प्रदेश अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे?

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इंडिया अलायंस खासतौर पर दलित और ओबीसी वोट बैंक पर फोकस कर रहा है। अखिलेश यादव भी PDA फार्मुले (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की बात कर रहे हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए ज़रूरी है कि वह किसी ऐसे नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाए, जो सीधे ओबीसी समाज से आता हो।

इसी जगह बैठता है बीएल वर्मा का नाम
● वे ओबीसी समाज के प्रभावशाली चेहरे हैं।
● लोधी-राजपूत वोट बैंक पर उनकी मजबूत पकड़ है।
● संगठन और सत्ता के बीच संतुलन बनाने में माहिर माने जाते हैं।
● अमित शाह के भरोसेमंद नेताओं में उनकी गिनती होती है।

पार्टी के भीतर यह भी माना जाता है कि वे शांत स्वभाव के साथ-साथ बेहद अनुशासित नेता हैं और कल्याण सिंह की तरह जमीनी राजनीति में उनकी पकड़ काफी मजबूत है।

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