घाघरा उफनाई, अपने घरों को उजाड़कर कहीं और जाने को मजबूर लोग

Subscribe to Oneindia Hindi

बहराइच। बादलों में गड़गड़ाहट, अंधियारा छा जाना व रिमझिम-रिमझिम बारिशों की फुहारें शायद आम लोगों को अच्छी लगे लेकिन घाघरा के किनारे बसे लोगों की रूह कांप उठती है। उन्हें गर्मी से तो जरूर पलभर के लिए निजात मिल जाती है लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें अपने ही बनाए हाथ से उन आशियानों को उजाड़ना पड़ता है जिसे उन्होंने पसीना बहाकर बनाया था। उन्हें मालूम है कि ऐसा न करने पर घाघरा की लहरों में उनकी बनाई हुई सारी गृहस्थी नष्ट हो जाएगी। घाघरा के किनारे बसे लोग अब नए आशियाने ढूंढने को मबजूर हैं और अपना आशियाना उजाड़कर दूसरी जगह ले जा रहे हैं।

घाघरा उफनाई, अपने घरों को उजाड़कर कहीं और जाने को मजबूर लोग

गोपिया बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है। जलस्तर बढ़ने से घाघरा उफना चुकी है जिससे कटान और तेज हो गई है। कटान शुरू होने से तटवर्ती ग्रामीणों में दहशत व्याप्त हो गई है।प्रत्येक तटवर्ती ग्रामीण आशियानों को उजाड़कर सुरक्षित ठिकानों को तलाशने में जुटे हुए हैं। मुख्य रूप से महसी तहसील के गोलागंज, कायमपुर, जर्मापुर व पचदेवरी को घाघरा निशाना बनाए हुए हैं।

घाघरा उफनाई, अपने घरों को उजाड़कर कहीं और जाने को मजबूर लोग

इन गांवों की कृषि योग्य भूमि घाघरा में समाहित हो रही है जबकि चुरईपुरवा, अरनवा, अहिरनपुरवा के किनारों को लहरें तेजी से खंगाल रही हैं। गोलागंज की सावित्री देवी पत्नी पेशकार सिंह की 12 बीघा, जनार्दन सिंह पुत्र शिवपाल सिंह की 12 बीघा, शीतला सिंह पुत्र शिवपाल सिंह की 12 बीघा, राज बहादुर सिंह पुत्र शिवपाल सिंह की 12 बीघा, शारदा सिंह की 12 बीघा, कल्यान सिंह, छीलई, गोपाल, बाबू, शंकर, ललन, दीनदयाल, सुरेश आदि की करीब 70 बीघा कृषि योग्य भूमि धारा में समाहित हो गई।

घाघरा उफनाई, अपने घरों को उजाड़कर कहीं और जाने को मजबूर लोग

पांचवी बार अपना आशियाना तोड़ रहे आशाराम

कायमपुर के आशाराम पुत्र सूरजबली का मंगरवल में 12 साल पहले, कपरवल में 10 साल पहले, सुकईपुर में 9 साल पहले घर घाघरा में कट गया। फिर उन्होंने कायमपुर में घर बनाया। इस बार पुन इनका घर कटने लगा।

घाघरा उफनाई, अपने घरों को उजाड़कर कहीं और जाने को मजबूर लोग

आशाराम के 3 पुत्र व 3 पुत्रियां हैं। 6 बीघा खेती की जमीन भी धारा में कट चुकी है। अब वह कहां जायें, क्या करें कुछ सूझता नहीं। यह कहानी सिर्फ आशाराम की नहीं दर्जनों लोगों की है। जो बार-बार घाघरा के कोप का शिकार हो रहे हैं।

घाघरा उफनाई, अपने घरों को उजाड़कर कहीं और जाने को मजबूर लोग

फ्लड पीएससी पहुंची

जलस्तर बढ़ता देख फ्लड पीएसी कटान प्रभावित क्षेत्र बौण्डी पहुंच गई है। सीतापुर की बाढ़ राहत दल सेकेण्ड बटालियन पीएसी बल के प्लाटून कमांडर राजेंद्र सिह ने बताया कि 30 सदस्य पीएसी बटालियन कटान प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों के सहयोग के लिए हमेशा तत्पर रहेगी।

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Water level up in Ghaghra river, villagers leave for safe place in Bahraich, Uttar Pradesh.
Please Wait while comments are loading...