धर्म परिर्वतन के बाद पहचान नहीं बदलने वालों के खिलाफ नई बहस छेड़ेगी Vishwa Hindu Parishad

Vishwa Hindu Parishad (VHP) ने देश भर में बहस छेड़ने की मांग करते हुए शुक्रवार को मांग की कि जिन दलितों ने ईसाई या इस्लाम धर्म अपना लिया है, लेकिन अपनी दलित पहचान नहीं बदली है, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। दरअसल Prayagraj में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की चार दिवसीय बैठक के तुरंत बाद बीएचपी के इस कदम को काफी अहम माना जा रहा है। यह अभियान पूरे देश में चलाया जाएगा।

बीजेपी

दरअसल विहिप के प्रवक्ता विजय कुमार तिवारी ने कहा कि, "विहिप उन दलितों को आरक्षण देने के खिलाफ है, जो ईसाई या इस्लाम में परिवर्तित हो गए हैं, लेकिन संविधान द्वारा उन्हें प्रदान की गई आरक्षण सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए अपनी दलित पहचान जारी रखते हैं।"

क्रिप्टो इसाई बनकर लेते हैं दोहरा लाभ

उन्होंने कहा, "ये 'क्रिप्टो ईसाई' न केवल आरक्षण का लाभ उठाते हैं बल्कि अल्पसंख्यक दर्जे के लोगों को प्रदान की जाने वाली सुविधाओं का भी आनंद लेते हैं। विहिप अनुसूचित जनजातियों के उन लोगों के साथ भी समान व्यवहार की मांग करता है जो ईसाई या इस्लाम में परिवर्तित हो जाते हैं लेकिन अपनी मूल पहचान के साथ जारी रहते हैं।"

इस तरह की सुविधाओं का गांधी ने किया विरोध

तिवारी ने दावा किया कि इस तरह की सुविधाओं का बीआर अंबेडकर और महात्मा गांधी ने विरोध किया था, और बाद में पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने कहा था कि यह संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि विहिप की मांग केवल एससी एवं एसटी तक ही सीमित थी, जिन्होंने केवल ईसाई या इस्लाम धर्म अपना लिया है, न कि बौद्ध या सिख धर्म में। उन्होंने कहा, "बौद्ध और सिख धर्म की जड़ें भारत में हैं लेकिन ईसाई और इस्लाम नहीं हैं।"

RSS की बैठक में भी उठा था अल्पसंख्यकों का मुद्दा

उत्तर प्रदेश के Prayagraj में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की चार दिवसीय बैठक हुई थी। बैठक में कई अहम मुद्दों पर मंथन हुआ। संगठन से जुड़े सूत्रों की माने तो आरएसएस की तरफ से अब मुसलमानों के अलावा सिखों और ईसाइयों सहित देश के अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में और अधिक पैठ बनाने की कवायद शुरू की जाएगी।

इसके लिए जल्द ही संघ की तरफ से एक कोर टीम का गठन किया जाएगा जो सभी क्षेत्रों में इस तरह के मामलों पर नजर रखेगी। दरअसल संघ की ओर से उन समुदायों पर नजर रखी जाएगी ओर संगठन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा जिनकी सोच राष्ट्रवादी होगी।

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