मोदी लहर में भी बीजेपी के खिलाफ जीता निर्बल शोषित दल का ये बाहुबली नेता
भले ही पार्टी के नाम से लग रहा हो कि इससे चुनाव लड़ने वाले निर्बल और शोषित होंगे, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इनकी गिनती पूर्वांचल में राजनीति के बाहुबलियों में की जाती है।
भदोही। यूपी विधानसभा चुनाव में जहां एक ओर भाजपा की प्रचंड जीत हुई है, वहीं कुछ ऐसे भी लोग जीते हैं, जिनकी पार्टी का नाम भी बहुत कम लोगों ने सुना होगा। एक ऐसा ही नाम है निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद)। इस पार्टी के टिकट पर सपा से ज्ञानपुर के पूर्व विधायक विजय मिश्रा ने चुनाव लड़ा था। विजय मिश्रा ने करीब 20,230 वोटों से इस सीट पर भाजपा के महेंद्र कुमार बिंद को शिकस्त दी है। इन्होंने ज्ञानपुर सीट पर भाजपा के महेंद्र बींद, बसपा के राजेश कुमार यादव और सपा के रामब्रती बिंद को हराया है।

हिस्ट्रीशीटर हैं विजय मिश्रा
विजय मिश्रा एक हिस्ट्रीशीटर हैं, जिन्हें उनकी आपराधिक छवि के चलते समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव ने टिकट देने से मना कर दिया था। भले ही उनकी छवि पर समाजवादी पार्टी ने उन्हें टिकट न दिया हो, लेकिन निषाद से विजय मिश्रा ने टिकट लिया और भाजपा जैसी बड़ी पार्टी के उम्मीदवार को भी पस्त कर दिया। यहां पर आपको बता दें कि भले ही पार्टी के नाम से लग रहा हो कि इससे चुनाव लड़ने वाले निर्बल और शोषित होंगे, लेकिन यह बात सच्चाई से कोसों दूर है। आपको जानकर हैरानी होगी कि विजय मिश्रा की गिनती पूर्वांचल में राजनीति के बाहुबलियों में की जाती है। इनकी तुलना राजा भैया, मुख्तार अंसारी और सुशील सिंह जैसे नेताओं से की जाती है।

तीन बार रहे सपा से विधायक
विजय मिश्रा भदोही जिले की ज्ञानपुर सीट से लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं और इस बार निषाद से भी उन्हें जीत हासिल हुई है। विजय मिश्रा से पहले ज्ञानपुर सीट के बारे में कहा जाता था कि इस सीट पर जो एक बार चुनाव जीत जाता है वह अगली बार उस सीट पर चुनाव नहीं जीत पाता, लेकिन विजय मिश्रा ने इस मिथक को तोड़ दिया।

यादव परिवार के हैं करीबी
विजय मिश्रा मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव के करीबी बताए जाते हैं। माना जा रहा है कि यादव परिवार में हुई कलह की वजह से ही इस बार उन्हें सपा से टिकट न मिल सका और उन्हें निषाद का दामन थामना पड़ा। विजय मिश्रा जितने करीबी शिवपाल यादव के हैं, उतने ही करीबी बाहुबली मुख्तार अंसारी के भी हैं। मुख्तार अंसारी और शिवपाल यादव का करीबी होना अखिलेश यादव को बिलकुल पसंद नहीं था, जिसकी वजह से सीएम ने इनका टिकट काट दिया।

जेल से भी जीते चुनाव
पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान वह जेल में थे और वहीं से उन्होंने चुनाव लड़ा। विजय मिश्रा का रुतबा इतना अधिक है कि उन्होंने जेल से ही चुनाव लड़कर बसपा प्रत्याशी को भारी मतों से हराकर विजय पा ली थी। चुनाव के दौरान उनकी पत्नी और बेटी ने घर घर जाकर बिना कोई वादा किए वोट मांगा था। जिसके बाद चुनाव जीतकर वह जेल से बाहर आ गए।
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