गंगा, यमुना और सरयू की लहरों पर दौड़ेंगे जलयान, पर्यटन केंद्रों को विकसित करने में जुटी सरकार

वाराणसी, अयोध्या और मथुरा में सरकार द्वारा जलयान तैनात किए जाएंगे जिसके द्वारा लोग गंगा यमुना और सरयू नदी में जलयान से सफर कर पाएंगे, इलेक्ट्रिक जलयान के द्वारा जल परिवहन को मजबूती देने का प्रयास सरकार द्वारा किया जा रहा

प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार द्वारा धर्म और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी तथा अयोध्या और मथुरा में जलयान चलाने की योजना को लेकर तैयारी चल रही है। वाराणसी में अभी दो जलयान चलाया जा रहे हैं जो रविदास घाट से गंगा की सैर करने के लिए निकलते हैं। हालांकि अब जो जलयान तैनात किए जाएंगे उन जलयान में सवार होकर पर्यटक वाराणसी समेत आसपास के अन्य जनपदों तक यात्रा कर सकेंगे तथा सामानों को भी ढोया जा सकेगा।

Varanasi CM Yogi Adityanath

सीएम ने जेट्टीयों का किया लोकार्पण और शिलान्यास
बीते शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे थे। वाराणसी में उनके द्वारा गंगा नदी किनारे लगाई गई 7 सामुदायिक जेट्टीयों का लोकार्पण और 8 सामुदायिक जेट्टीयों का शिलान्यास किया गया। यह भी बताया गया कि गंगा नदी किनारे भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 62 लघु सामुदायिक घाटों का विकास और उन्‍हें अपग्रेड कराया जा रहा है। इसके अलावा वाराणसी से बलिया तक 250 किलोमीटर तक घाटों को विकसित किया जा रहा है। कार्य पूर्ण हो जाने के बाद गंगा नदी में जलयान चलाए जाने से पर्यटकों को जहां जलयान के माध्यम से भ्रमण करने में आसानी होगी वहीं जल परिवहन को मजबूती मिलेगी तथा सामानों का आवागमन भी आसानी से किया जा सकेगा।

तैनात किए जाएंगे इलेक्ट्रिक जलयान
वाराणसी के दीन दयाल हस्तकला संकुल में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में भारत सरकार के बंदरगाह नौवहन व जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा बताया गया कि भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के बीच एक करार किया गया है। करार के तहत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा 100 पैक्स क्षमता के इलेक्ट्रिक जलयान तैयार किए जाएंगे। हाइड्रोजन फ्यूल सेल पैसेंजर कैटामारन जलयान का डिजाइन और विकास केपीआईटी पुणे के सहयोग से किया जाएगा। जलयानों का निर्माण हो जाने के बाद कोच्चि में ही इनका परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण सफल हो जाने के बाद इन जलयानों को वाराणसी, अयोध्या और मथुरा में तैनात करने के लिए लाया जाएगा। हाइड्रोजन एवं इलेक्ट्रिक कैटामारन के द्वारा जीवाश्म ईंधन इस्तेमाल में कमी आएगी और राष्ट्रीय जलमार्ग में प्रदूषण के स्तर को घटाने में भी मदद मिलेगी। इन जलयानों के तैनात हो जाने से धर्म और पर्यटन की दृष्‍टी से काफी मजबूत माने जाने वाले इन तीनों जनपदों में पर्यटन को पंख लगेंगे और घरेलू तथा अंतरराष्‍ट्रीय पर्यटकों के आवागमन से क्षेत्र का भी तेजी से विकास होगा।

छोटे-छोटे पर्यटन केंद्रों को भी किया जा रहा विकसित
यह भी बता दें कि सूबे के योगी सरकार द्वारा शुरू से ही बड़े पर्यटन स्थलों के साथ ही छोटे-छोटे पर्यटन स्थलों को भी विकसित करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। वाराणसी के साथ ही वाराणसी से सटे आसपास के जनपदों एवं चित्रकूट, मथुरा, अयोध्या सहित अन्य जनपदों में स्थित छोटे-छोटे पर्यटन स्थलों को विकसित करने के पीछे सरकार का एकमात्र लक्ष्य है कि पर्यटन स्थल विकसित हो जाने के बाद पर्यटकों का आवागमन होने से उन क्षेत्रों का भी विकास तेजी से होगा। पर्यटन स्थलों पर आवागमन के लिए सुगम रास्ते बनवाए जा रहे हैं और वहां यातायात के साधनों की भी तैनाती की जा रही है।

पर्यटन को लगेंगे पंख, होगा क्षेत्रों को विकास
ऐसा करने से पर्यटन स्थलों के आसपास के लोग जहां स्वरोजगार से जुड़ पाएंगे वहीं उन पर्यटन स्थलों के चलते छोटे-छोटे स्थानों की पहचान भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने लगेगी। पर्यटन कारोबार से जुड़े जानकार लोगों का कहना है कि भले ही इन योजनाओं को सफल होने में समय लगेगा, लेकिन पर्यटन स्‍थलों से जुड़ी इन योजनाओं के दूरगामी परिणाम जरूर देखे जा रहे हैं। लोगों ने यह भी बताया कि इससे छोटे-छोटे पर्यटन केंद्रों का जहां विकास तेजी से होगा वहीं प्रदेश के विकास में भी यह पर्यटन स्थल मददगार साबित होंगे।

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