वाराणसी में बढ़े जलस्तर से जलमग्न हुए घाट, दाह संस्कार में हो रही दिक्कत
वाराणसी। हरियाणा और दिल्ली में पानी खतरे के निशान के ऊपर पहुंच चुका है। ऐसा ही हाल उत्तर प्रदेश के भी कई जिलों का हाल है। दरसअल हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए पानी के कारण वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ चुका है। भले ही अभी काशी में गंगा खतरे के निशान से नीचे हो लेकर बांधों से लगातार पानी छोड़े जाने के बाद वाराणसी प्रशासन ने सावन महीने को देखते हुए सभी नावों के परिचालन पर रोक लगा दी है। यही नहीं बाढ़ के कारण घाटों का आपस में सपंर्क टूट जाने के बाद घाटों पर NDRF की टीम ने अस्सी से लेकर राजघाट वस्तुस्थिति देख बाढ़ के हालात जानने की कोशिश की। वहीं काशी में होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती भी अब जल पुलिस चौकी के पास हुई। यही नहीं NDRF के अधिकारियों की माने तो कावरियों की भारी भीड़ को देख लगातार बाढ़ में पैनी नजर रही गई है।

मन्दिर डूबे शवदाह घाट के ऊपरी हिस्से पर
इन दिनों बाढ़ का कहर लोगों पर शामत बन टूट पड़ा है। वहीं वाराणसी गंगा पूरे उफान पर है। बनारस की बात की जाए तो गंगा के बाढ़ की स्तिथि उतपन्न होने के बाद काशी के 84 घाट जहां डूब चुके हैं। वहीं किनारों पर बने के प्राचीन मंदिर भी जलमग्न हो चुके हैं। इन मन्दिरों के जलमग्न होने के बाद जहां यहां के पूजा पाठ बंद हो गए हैं वहीं खतरे के निशान से करीब 4 मीटर नीचे होने के बाद जिला प्रशासन और NDRF ने हर परिस्थिति से सामना करने के लिए तैयारियां कर ली हैं। यही नहीं यहां शव के साथ आने वाले लोग शवदाह के लिए श्मशान के ऊपरी हिस्से पर लाशें जला रहे हैं। साथ ही सावन महीने में कावरियों की भीड़ देख लगातार लोगों को गहरे पानी ने न जाने की हिदायत भी जल पुलिस के जवान दे रहे हैं। इस पूरे मामले पीकर NDRF के अधिकारी नितिन कुमार की माने तो बनारस में अस्सी दशाश्वमेघ और राजघाट पर NDRF के 11 बटालियन की तीन तीनों को तैनात किया गया है वहीं एक टीम 24 घण्टे लगातार गंगा में पेट्रोलिंग कर रही है।












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