UP Lok Sabha Chunav: रायबरेली को अमेठी न समझे भाजपा! इन वजहों से राहुल गांधी को हराना होगा मुश्किल
Uttar Pradesh Lok Sabha Election: रायबरेली में बीजेपी को कांग्रेस के राहुल गांधी से मुकाबला करना है। पार्टी ने यहां उनसे भी पहले राज्य के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह की उम्मीदवारी घोषित की थी। लेकिन, बाहर से यहां जो समीकरण भाजपा के पक्ष में मजबूत लग रहा था, अंदर से भी वैसी ही स्थिति है, यह आज बहुत बड़ा सवाल बन गया है।
जानकारी के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी को यहां रायबरेली सदर की पार्टी सांसद अदिति सिंह का पूर्ण समर्थन नहीं मिल पा रहा है। इसी तरह से ऊंचाहार से सपा के बागी विधायक मनोज कुमार पांडे को लेकर भी तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं। जब, भाजपा ने दिनेश प्रताप सिंह को टिकट दिया था तो लग रहा था कि इनकी जीत में इन दोनों ही नेताओं का बड़ा योगदान रहने वाला है।

अदिति सिंह और मनोज कुमार पांडे से मिल रही टेंशन!
भाजपा सूत्रों का कहना है कि इस स्थिति से शीर्ष नेतृत्व भी वाकिफ है और जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रायबरेली आए थे तो उन्होंने दोनों ही नेताओं को समझाने-बुझाने की कोशिश भी की थी। रविवार को शाह पार्टी प्रत्याशी को लेकर मनोज पांडे के घर भी गए थे। फरवरी में हुए राज्यसभा चुनाव में पांडे के समर्थन ने भाजपा के आठवें उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित की थी।
दोनों इलाके के कद्दावर चेहरा हैं
मनोज पांडे को रायबरेली का बड़ा ब्राह्मण चेहरा माना जाता है। इस क्षेत्र में 25% दलित, 18% ब्राह्मण और 11% ठाकुर हैं। दिनेश और अदिति ठाकुर हैं। सूत्रों का कहना है कि मनोज खुद को रायबरेली सीट से बीजेपी का संभावित उम्मीदवार मान रहे थे। सपा पहले बिना गठबंधन के भी अमेठी और रायबरेली में गांधी परिवार को समर्थन देती रही थी और उसमें पांडे की स्वाभाविक भूमिका रहती थी।
बीजेपी ने 2019 में भी इस सीट से दिनेश प्रताप सिंह को ही उम्मीदवार बनाया था, जो राहुल की मां सोनिया गांधी से 1.67 लाख वोटों से हार गए थे। उस चुनाव में यूपी से कांग्रेस से अकेले वही जीती थीं और पड़ोस की अमेठी सीट से राहुल गांधी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से हार गए थे।
दिनेश प्रताप सिंह की दोनों ही नेताओं की पुरानी राजनीतिक अदावत!
वैसे कुछ भाजपा नेताओं का कहना है कि मनोज पांडे इसलिए खुलकर भाजपा का प्रचार करने से हिचकिचा रहे हैं कि कहीं उनकी विधायकी न चली जाए। लेकिन, कुछ नेताओं का कहना है कि 'बीजेपी से टिकट की उम्मीद और दिनेश के साथ पुरानी दुश्मनी' ही असल कारण है कि वह सक्रिय नहीं हैं।
जिस दिन बीजेपी प्रत्याशी ने पर्चा भरा था, पांडे उनके साथ तब भी नहीं आए। हालांकि, उसी दिन उनके बेटे और भाई बीजेपी में शामिल हुए थे, इसलिए पार्टी की आखिरी आस अभी भी बरकरार है। जब नामांकन जुलूस में भाजपा प्रत्याशी के साथ मनोज पांडे नहीं थे, तो पार्टी को उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को भेजना पड़ा था, ताकि ब्राह्मण समाज में गलत संदेश न चला जाए।
वैसे सूत्रों का कहना है कि अमित शाह उनसे कहकर गए हैं कि वे बीजेपी का समर्थन करें और पार्टी इसका पारितोषिक जरूर देगी। हालांकि, अदिति सिंह बीजेपी की विधायक हैं और वह रायबरेली में अमित शाह के साथ मंच पर भी दिख चुकी हैं। लेकिन, बीजेपी उम्मीदवार से उनकी पुरानी अदावत पार्टी के लिए चिंता की बात है। ऊपर से वह एक्स पर अपने पिता की पुरानी तस्वीर के साथ लिख चुकी हैं कि 'वसूलों' से समझौता मुश्किल है
सूत्रों का कहना है की बीजेपी नेतृत्व ने अदिति सिंह और मनोज पांडे से कहा है कि वह उम्मीदवार के नाम से बाहर निकलकर सोचें और पार्टी के लिए प्रचार करें। अगर ये नेता पार्टी की बात से सहमत होकर पूरा जोर लगाकर प्रचार में उतर गए तो कांग्रेस के लिए अमेठी के बाद रायबरेली भी भारी पड़ सकती है, लेकिन अगर ऐसा नहीं हो पाया तो फिर बीजेपी के मंसूबों पर पानी फिर सकता है।












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