यूपी में योगी सरकार ने ‘The Shadow’ ऐप किया लांच, कैसे करेगा छात्राओं की सुरक्षा और क्या हैं सुविधाएं?
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने छात्राओं की सुरक्षा और उनके शिक्षा के अनुभव को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए एक बड़ी पहली की है। सरकार ने राज्य भर की की सुरक्षा के लिए एक नया डिजिटल ऐप 'द शैडो' लॉन्च किया है।
यह ऐप अभिभावकों की पूर्व सहमति, एसओएस अलर्ट, क्यूआर-आधारित गेट पास और वास्तविक समय की आवाजाही व पढ़ाई की ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं से लैस है। इसका उद्देश्य छात्राओं को स्वतंत्रता के साथ-साथ सुरक्षा का संतुलन प्रदान करना है।

योगी सरकार द्वारा समर्थित इस पहल के तहत, यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंसेज में 'द शैडो' ऐप विकसित किया गया है। यह ऐप परिसर में छात्राओं की सुरक्षा मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है, जो छात्राओं की सुरक्षा को उनके शैक्षणिक प्रबंधन से जोड़ता है। यह सुनिश्चित करता है कि उनका अध्ययन भी ट्रैक किया जा सके।
कैसे करेगा छात्राओं की सुरक्षा?
यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंसेज में बी.टेक छात्रों द्वारा विकसित यह ऐप छात्राओं के लिए एक संपूर्ण डिजिटल सुरक्षा इकोसिस्टम तैयार करता है। इसमें अभिभावकों की पूर्व अनुमति, एसओएस अलर्ट, क्यूआर कोड आधारित गेट पास, और वास्तविक समय की गतिविधि ट्रैकिंग जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 'द शैडो' को सुरक्षा-केंद्रित पूर्ण डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में डिजाइन किया गया है।
छात्राओं की परछाई बनकर करेगा सुरक्षा
रजिट्रेशन के बाद, प्रत्येक छात्रा संस्थान के साथ 'एक निरंतर परछाई' की तरह हर समय डिजिटली जुड़ी रहती है। यह प्रणाली उन बेटियों पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है जो तकनीकी पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर रही हैं, जिससे उन्हें सुरक्षित और अधिक आत्मनिर्भर महसूस करने में मदद मिलती है।
बी.टेक छात्रों ने किया है ये ऐप डेवलेप
उप-निदेशक चिरंजीव मुखर्जी ने बता कि 'द शैडो' ऐप को संस्थान के बी.टेक छात्रों ने पूरी तरह से विकसित किया है। यह ऐप केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। छात्राओं की उपस्थिति, असाइनमेंट, परीक्षा परिणाम और और परिसर की अन्य गतिविधियों को आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड करता है।अभिभावक, शिक्षक और छात्र सभी एक ही डेटा तक पहुंच कर ट्रैक कर सकते हैं।
इमरजेंसी सुरक्षा
यदि कोई छात्रा असुरक्षित महसूस करती है, तो ऐप के एसओएस आपातकालीन कॉल फीचर के माध्यम से तुरंत अलर्ट भेजा जाता है। क्यूआर कोड आधारित डिजिटल गेट पास और वास्तविक समय की आवाजाही ट्रैकिंग से अनधिकृत गतिविधियों को रोका जा सकता है।
तकनीकी नवाचार से सुरक्षा की मिसाल
बी.टेक छात्र हर्ष और आदित्य मिश्रा ने, सहायक प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंह के मार्गदर्शन में, इस ऐप को विकसित किया। उप-निदेशक चिरंजीव मुखर्जी के अनुसार, "यह ऐप डिजिटल तकनीक का उपयोग करके बेटियों की सुरक्षा और उनके शैक्षणिक अनुभव को समान रूप से सुरक्षित करता है।"
क्या राज्य भर में होगा लागू?
'द शैडो' ऐप उत्तर प्रदेश में सुरक्षित परिसरों की दिशा में योगी सरकार के प्रयासों को मजबूत करता है। यह मॉडल अन्य शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा उपायों के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।












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