UP: राहुल गांधी की Bharat Jodo Yatra से क्यों दूर रहे Maya-Jayant-Akhilesh, जानिए इसकी वजहें

Bharat Jodo Yatra : मायावती-अखिलेश और जयंत की नजर 2024 से पहले बनने वाले एक संयुक्त विपक्ष पर है। इसकी अगुवाई कांग्रेस कर सकती है। कांग्रेस का विरोध करने की बजाए तीनों अपने लिए संभावनाएं बचाकर रखना चाहते हैं।

अखिलेश

Rahul Gandhi Bharat Jodo Yatra in UP : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की Bharat Jodo Yatra का यूपी में आज अंतिम दिन था। राहुल की यह यात्रा यूपी में यूं तो महज तीन दिनों तक ही रही लेकिन इसने कई लोगों को प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर दिया। बात-बात पर कांग्रेस को कोसने वाली बसपा की चीफ मायावती ने राहुल को इस यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं तो सपा के मुखिया अखिलेश यादव और उनके गठबंधन के साथी रालोद चीफ जयंत भी राहुल की यात्रा का विरोध करने का साहस नहीं दिखा पाए। इन तीनों दिग्गजों ने राहुल की यात्रा को लेकर ये स्टैंड क्यों लिया। इसके पीछे भी कई वजहें हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो 2024 के चुनाव को देखते हुए इन नेताओं ने अपना अपना स्टैंड लिया है ताकि भविष्य के लिए भी संभावनाएं बनी रहें।

विचारधारा को लेकर दिखा था राहुल- अखिलेश में टकराव

विचारधारा को लेकर दिखा था राहुल- अखिलेश में टकराव

राहुल ने भारत जोड़ो यात्रा यूपी में पहुंचने से पहले ही सपा को लेकर एक बड़ा बयान दिया था। राहुल ने कहा था कि सपा की कोई राष्ट्रीय विचारधारा नहीं है लेकिन कांग्रेस के पास अपनी विचारधारा है। इसको लेकर अखिलेश नाराज हो गए। अखिलेश ने कहा था कि सपा हमेशा ही राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर संघर्ष करती रही है। विचारधारा को लेकर राहुल-अखिलेश के बीच इस कदर टकराव हुआ कि अखिलेश ने राहुल को शुभकामनाएं तो दी लेकिन यात्रा में शामिल नहीं हुए।

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    राहुल की यात्रा में शामिल नहीं हुए अखिलेश यादव

    राहुल की यात्रा में शामिल नहीं हुए अखिलेश यादव

    कांग्रेस के नेताओं ने दावा किया था कि अखिलेश समेत यूपी के कई नेताओं को निमंत्रण भेजा गया था लेकिन सपा ने इससे इंकार कर दिया था। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो दरअसल अखिलेश यादव को पता है कि वह राहुल गांधी की यात्रा का सीधेतौर पर विरोध करेंगे तो इसका आगे चलकर नुकसान हो सकता है। 2024 के चुनाव में अभी काफी समय है और अगर परिस्थितियां बदली और कांग्रेस के साथ आने की गुंजाइश बची तो उसके लिए भी संभावनाएं बची रहनी चाहिए। इसीलिए अखिलेश ने अंत में ट्वीटर पर इस यात्रा को शुभकामनाएं देकर आगे के लिए संभावनाएं बचाकर रखी हैं।

    जयंत ने राहुल की यात्रा को क्यों दी शुभकामनाएं

    जयंत ने राहुल की यात्रा को क्यों दी शुभकामनाएं

    आरएलडी ने पहले राहुल की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल न होने का फैसला किया था। सपा के साथ आरएलडी का गठबंधन है और इसके तहत रालोद ने इस यात्रा का हिस्सा बनने से इंकार कर दिया था। हालांकि अखिलेश यादव के रुख में बदलाव आते ही जयंत चौधरी भी सामने आ गए। इस बीच राहुल की यात्रा बागपत पहुंचने से पहले ही मीडिया में यह खबर आई कि जयंत इस यात्रा में शामिल होंगे। कांग्रेस के मीडिया कोआर्डिनेटर अंशु अवस्थी की तरफ से जयंत के शामिल होने की जानकारी दी गई। लेकिन बाद में रालोद ने यह फैसला किया कि वह भारत जोड़ो यात्रा में शामिल नहीं होगी। जयंत ने भी ट्वीट के माध्यम से इस यात्रा को अपनी शुभकामनाएं दे दीं। सूत्रों की माने तो अखिलेश-जयंत ने मिलकर ये फैसला लिया था कि इस यात्रा का हिस्सा बनने और विरोध करने की बजाए शुभकामनाएं दी जाएं ताकि पश्चिम में एक सकारात्मक माहौल बना रहे।

    कांग्रेस पर हमला बोलने वाली मायावती का क्यों हुआ ह्दय परिवर्तन

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    सबसे रोचक फैसला बसपा की चीफ मायावती का रहा। मायावती के लगभग हर बयानों में कांग्रेस की आलोचना ही होती है। वह हमेशा ही कांग्रेस को उसकी गलत नीतियों के लिए जिम्मेदार ठहराती रहती हैं लेकिन इस मामले में उन्होंने भी सावधानी बरतने का काम किया। लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि , मायावती का फैसला उनके नेचर के खिलाफ था लेकिन इसको अप्रत्याशित नहीं कहा जा सकता है। मायावती को पता है कि देश में बीजेपी के खिलाफ कोई लड़ने लायक नहीं है। कांग्रेस चूंकि राष्ट्रीय पार्टी है और ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ती है इसलिए उसका विरोध करने की बजाए शुभकामना देना ही बेहतर समझा।

    2024 के लिए संभावनाएं बचाकर रखना चाहते हैं तीनो नेता

    2024 के लिए संभावनाएं बचाकर रखना चाहते हैं तीनो नेता

    राहुल की भारत जोड़ो यात्रा यूपी में तीन दिनों तक रही। यह यूपी में कई तरह की संभावनाओं को जन्म दे गई। हालांकि बीजेपी ने कांग्रेस पर यह आरोप लगाया कि यह यात्रा यूपी के लिए नहीं थी। यूपी की जनता ने पहले ही कांग्रेस को नकार रखा है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि दरअसल मायावती-अखिलेश और जयंत की नजर 2024 से पहले बनने वाले एक संयुक्त विपक्ष पर है। इसकी अगुवाई कांग्रेस कर सकती है। इस लिहाज से कांग्रेस का विरोध करने की बजाए तीनों ही पार्टियां अपने लिए संभावनाएं बचाकर रखने की कोशिश में हैं ताकि समय आने पर उसका लाभ लिया जा सके।

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