UP News: दो दशक पहले अखिलेश ने कन्नौज से की थी शुरुआत, 2024 में दांव पर रहेगी प्रतिष्ठा
UP Samajwadi Party के मुखिया अखिलेश यादव ने कुछ महीने पहले ये संकेत दिए थे कि वो अगले लोकसभा चुनाव में कन्नौज से चुनाव लड़ सकते हैं। इन अटकलों के बीच सपा ने कन्नौज में बूथ कमेटियों के पुनर्गठन की तैयारी शुरू कर दी है।

UP Samajwadi Party Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव सम्पन्न होने के बाद अब सभी दलों ने 2024 की तैयारियों में अपनी ताकत झोंक दी है। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के मुखिया अखिलेश यादव भी पहले ही 2024 का चुनाव कन्नौज से लड़ने के संकेत दे दिए हैं। इसी सीट से दो दशक पहले अखिलेश का राजनीतिक सफर शुरू हुआ था। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के संकेत के बाद समाजवादी पार्टी अपनी तैयारियों का खाका तैयार करने में जुटी है। पार्टी के पदाधिकारियों की माने तो एक जून से बूथ कमेटियों के पुनर्गठन का काम शुरू हो जाएगा।
कन्नौज से चुनाव लड़ सकते हैं अखिलेश यादव
कन्नौज लोकसभा क्षेत्र से चुनावी शुरुआत करने के दो दशक बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव अगले साल होने वाले आम चुनावों में संसदीय सीट से चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। अखिलेश पिछले लोकसभा चुनाव 2019 में आजमगढ़ से जीते थे, लेकिन अपने चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव के पिछले साल उपचुनाव हारने के बाद वहां से परिवार के किसी अन्य सदस्य को लड़ाने के मूड में हैं।
कन्नौज की सपा ईकाई ने शुरू की तैयारी
सपा के कन्नौज जिला इकाई के अध्यक्ष कलीम खान ने कहा कि,
अखिलेश यादव जी ने हमें पहले ही बता दिया है कि वह कन्नौज से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। हमने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। एक जून से पार्टी बूथ कमेटियों का पुनर्गठन शुरू करेगी। जिला समिति का भी गठन किया जाएगा। अखिलेश जी ने अपनी हालिया यात्रा के दौरान मीडिया के सामने कन्नौज से चुनाव लड़ने की अपनी योजना की पुष्टि कर दी है।
मुलायम परिवार के लिए सेफ सीट मानी जाती है कन्नौज
अखिलेश के लिए कन्नौज एक सुरक्षित सीट की तरह रही है लेकिन पिछली बार बीजेपी ने यहां भगवा लहराने में कामयाबी पा ली थी। यादव परिवार ने 1999 से 2018 तक संसद में इसका प्रतिनिधित्व किया। लेकिन डिंपल यादव को 2019 में बीजेपी से हार का सामना करना पड़ा था। सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने पहली बार 1999 में कन्नौज से जीत हासिल की थी।
मुलायम ने अखिलेश के लिए छोड़ी थी ये सीट
संभल को सपा का गढ़ बनाए रखने के लिए मुलायम ने यह सीट छोड़ दी थी। बाद में अखिलेश ने 2000 में कन्नौज से चुनावी शुरुआत की थी। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दिग्गज अकबर अहमद डम्पी को 58,000 से अधिक मतों से हराया। अगले दो लगातार लोकसभा चुनावों 2004 और 2009 में अखिलेश फिर से कन्नौज से जीते।
अखिलेश के बाद डिंपल यादव ने यहां से जीता चुनाव
इसके बाद 2014 में पार्टी ने डिंपल को मैदान में उतारा और उन्होंने सीट बरकरार रखी। लेकिन वह पांच साल बाद अपने प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रहीं और भाजपा के सुब्रत पाठक से 12,353 मतों से हार गईं। हालांकि पिछले साल डिंपल मैनपुरी से सांसद चुनी गई थीं, जहां मुलायम के निधन के बाद उपचुनाव हुआ था।
सपा के राष्ट्रीय सचिव और प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहते हैं कि,
कन्नौज और फर्रुखाबाद समाजवादियों की भूमि रही है। डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कन्नौज और फर्रुखाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ा था। अखिलेश जी भी लोहिया जी की तर्ज पर काम कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि अखिलेश कन्नौज से चुनाव लड़ेंगे अगर पार्टी फैसला करती है।
कन्नौज में है मुस्लिम-दलित-यादवों का दबदबा
कन्नौज में मुसलमानों, दलितों और यादवों का दबदबा है। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या तीन लाख, दलित मतदाताओं की संख्या लगभग 2.8 लाख और यादवों की संख्या 2.5 लाख है। पिछली बार बीजेपी की जीत इसलिए हुई क्योंकि यादव और दलित मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी के खेमे में चला गया था। हालांकि इस कमी को दूर करने के लिए अखिलेश यादव लगातार कन्नौज का दौरा कर रहे हैं।
निकाय चुनाव में सपा को लगा है कन्नौज में झटका
हाल ही में संपन्न निकाय चुनावों में सपा जिले की पांच नगर पंचायतों में से केवल एक (तालग्राम) जीतने में कामयाब रही। बीजेपी और कांग्रेस ने एक-एक जबकि दो निर्दलीय जीते थे। तीनों नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पदों के लिए हुए चुनाव में सपा को हार का सामना करना पड़ा था। जिसमें भाजपा ने दो और बसपा ने एक जीत हासिल की थी।
लेकिन सपा के स्थानीय नेताओं का मानना है कि अखिलेश के कन्नौज लौटने से आसपास के क्षेत्रों में भी पार्टी को मजबूती मिलेगी। सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि,
जब अखिलेश यादव जी ने करहल से विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया तो इस फैसले की वजह से सपा के पक्ष में सकारात्मक माहौल बना और इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा था। अगर वह कन्नौज की प्रतिष्ठित सीट से चुनाव लड़ते हैं, तो निश्चित तौर पर सपा को 2024 में इसका लाभ मिलेगा।












Click it and Unblock the Notifications