UP: चीनी मिलों पर बकाया हैं गन्ना किसानों के 9 हज़ार करोड़ रुपए, जानिए पूरी INSIDE STORY

राज्य सरकार का दावा है कि लगभग 46 लाख गन्ना किसानों को 1,95,060 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राशि का भुगतान किया और यूपी को देश में गन्ना और चीनी उत्पादन में नंबर एक स्थान पर ला दिया।

योगी आदित्यनाथ

Uttar Pradesh Sugarcane Former:उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार ने गन्ना किसानों को लेकर काफी वादे के किए थे। वादों के मुताबिक गन्ना किसानों का बकाया समय पर लौटाने की बात कही गई थी। लेकिन सूत्रों की माने तो राज्य गन्ना विकास और चीनी उद्योग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 119 चालू चीनी मिलों पर 9,144 करोड़ रुपये का भारी गन्ना बकाया है, जिसमें पिछले वर्ष की 699.47 करोड़ रुपये की बकाया राशि भी शामिल है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो किसानों के बकाये का भुगतान 2024 के चुनाव में फिर चुनावी मुद्दा बन सकता है।

गन्ना किसानों का 8,444.93 करोड़ रुपये बकाए का दावा

चीनी मिलों ने पिछले साल 35,201.34 करोड़ रुपये मूल्य का कुल गन्ना खरीदा, जिसमें से 34,501.88 करोड़ रुपये का भुगतान गन्ना किसानों को किया गया और शेष राशि को आगे बढ़ाया गया। इस साल जनवरी तक पेराई हुई गन्ने की कीमत 21,231.97 करोड़ रुपये थी, जिसमें से किसानों को केवल 12,787.04 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इससे मिलों पर गन्ना मूल्य का बकाया भुगतान 8,444.93 करोड़ रुपये हो गया।

गन्ना और चीनी उद्योग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय आर भूसरेड्डी ने हालांकि कहा कि,

राज्य सरकार ने लगभग 46 लाख गन्ना किसानों को 1,95,060 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राशि का भुगतान किया है और यूपी को देश में गन्ना और चीनी उत्पादन में नंबर एक स्थान पर ला दिया।

सरकार दिखा रही आंकड़ों की बाजीगरी

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    एक किसान नेता और याचिकाकर्ता वीएम सिंह ने यह कहते हुए दावे को खारिज कर दिया कि गन्ना विभाग द्वारा अनुमानित कुल भुगतान पिछले छह वर्षों आंकड़ा था। सरकार न तो गन्ना अधिनियम और न ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले का पालन कर रही है, जिसके आधार पर सरकार को बार-बार भुगतान में देरी पर किसानों को ब्याज देने का निर्देश दिया गया था।

    इस बीच, यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन (यूएसएमए) के महासचिव दीपक गुप्ता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारी बारिश से गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फसली खेतों में जल भराव और 'रेड रोट' रोग जैसी चुनौतियाँ प्रचलित थीं।

    किसानों के इस मामले को लेकर राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने सरकार पर हमला बोला। राय ने कहा कि,

    सरकार हमेशा से किसान विरोधी रही है। गन्ना किसानों का 9 हजार करोड़ रुपये बकाये की बात समाने आ रही है। सरकार इसको लेकर किसकी जवाबदेही तय करेगी। एक तरफ सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी होने का दावा करती है दूसरी तरफ बकाये की रकम बता रही है कि सरकार के दावे की सच्चाई क्या है।

    तीन वर्षों से कम हो रही गन्ने की पेराई

    इसके अलावा, आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि राज्य में चीनी उत्पादन के घटते स्तर के साथ राज्य की मिलों द्वारा गन्ने की कुल पेराई लगातार तीन वर्षों से कम हो रही है। वर्ष 2019-20 में मिलों ने 1,118.20 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई करके 126.37 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया था। गन्ने की मात्रा घटकर 1,027.50 लाख क्विंटल रह गई, जबकि चीनी का उत्पादन 2020-21 में घटकर 110.59 लाख टन रह गया। 2021-22 में गन्ने की कुल पेराई 1,016.26 लाख क्विंटल हुई, जबकि चीनी का उत्पादन 101.98 क्विंटल रहा।

    हालांकि राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि,

    किसानों के बकाये के भुगतान को लेकर सरकार हमेशा गंभीर रही है। यूपी में पहली बार योगी की अगुवाई में जब बीजेपी की सरकार बनी थी तब से लेकर आज तक गन्ना किसानों के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री हमेशा गंभीर दिखायी दिए। रही बात गन्ना किसानों के बकाये की जो बात सामने आ रही है उसे सरकार हल करेगी क्योंकि यदि यह मामला लटका तो निश्चतितौर पर 2024 के चुनाव में विपक्ष इसे एक चुनावी मुद्दा बना सकता है।

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