UP में 24 जगहों पर अत्याधुनिक हाईटेक बस स्टेशन बनाने की क़वायद में जुटा UPSRTC
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने यूपी में 24 हाइटेक बस स्टेशन को बनाने की कवाद शुरू कर दी है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लखनऊ के आलमबाग में बने स्टेशन की तर्ज पर सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) मोड में 24 आधुनिक बस स्टेशनों-सह-वाणिज्यिक परिसरों को विकसित करने की योजना बनाई है। राज्य के विभिन्न शहरों में निजी डेवलपर्स को आमंत्रित करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है जिसे जल्द ही कैबिनेट को भेजा जाएगा।

दीवाली के बाद कैबिनेट में जाएगा प्रस्ताव
परिवहन विभाग के सूत्रों की माने तो दिवाली के बाद अंतिम प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट में जाने की संभावना है। इससे पहले मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने सोमवार को इस संबंध में यूपीएसआरटीसी के अधिकारियों से चर्चा की थी। यूपीएसआरटीसी के प्रबंध निदेशक संजय कुमार के अनुसार नई निविदाएं आमंत्रित करने के मुद्दे पर सचिवों की समिति विचार कर रही है और मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष हैं जिनकी मंजूरी के बाद इसे आगे भेजा जाएगा।
अखिलेश ने आलमबाग में बनाया था अत्याधुनिक स्टेशन
दरअसल पूव सीएम अखिलेश यादव सरकार में अंतरराज्यीय वातानुकूलित आलमबाग बस टर्मिनल पीपीपी मोड में विकसित राज्य का पहला बस स्टेशन बनाया गया था। उस समय इसे देश का सर्वश्रेष्ठ बस टर्मिनल बताया गया था। जून 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के औपचारिक उद्घाटन से एक दिन पहले ही सपा के कार्यकर्ताओं ने इसका शुभारंभ कर दिया था।
200 करोड़ की लागत से बना है ये बस स्टेशन
200 करोड़ से अधिक की लागत से बने इस बस अड्डे को एक निजी कंपनी शालीमार मॉल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित और डिजाइन किया गया था। आलमबाग बस स्टेशन सभी यात्री सुविधाओं के साथ 26,500 वर्गमीटर में फैला हुआ है। यूपीएसआरटीसी तब से राज्य में विभिन्न स्थानों पर अधिक बस स्टेशनों को विकसित करने की कोशिश कर रहा है लेकिन निजी डेवलपर्स इसमें अपनी रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
आलमबाग की तर्ज पर 24 स्टेशन तैयार करेगी यूपी सरकार
हालांकि पहले इस तरह के 20 बस स्टेशनों को विकसित करने की योजना थी, लेकिन अब यह संख्या 24 हो गई है। इनमें लखनऊ (गोमती नगर और चारबाग) में दो और कानपुर, बरेली और अलीगढ़ में एक-एक, इलाहाबाद, मेरठ और दो-दो बस स्टेशन शामिल हैं। गाजियाबाद और तीन आगरा में शामिल है। कुमार ने कहा कि डेवलपर्स की प्रतिक्रिया के आधार पर उनको आकर्षित करने के लिए बोलियों के नियमों और शर्तों में ढील दी जा रही है। जब संशोधित शर्तों के साथ परियोजना के लिए नई बोलियां आमंत्रित की गईं।












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