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UP SIR से BJP क्यों घबराई? योगी से लेकर दिल्ली हाईकमान तक को संभालना पड़ा मोर्चा! आखिर क्या है असली डर

UP SIR BJP: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण यानी SIR ने बीजेपी की नींद क्यों उड़ा दी है। चुनाव आयोग की ओर से जैसे ही ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई और पता चला कि प्रदेश में करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम कट चुके हैं, वैसे ही भाजपा के भीतर खलबली मच गई।

शहरों में तो हालात और भी चौंकाने वाले हैं, जहां 20 से 30 प्रतिशत तक वोट लिस्ट से गायब हो गए हैं। बीजेपी को डर है कि यह सीधा उसकी चुनावी ताकत पर असर डाल सकता है।बीजेपी के आंतरिक आकलन के मुताबिक सबसे ज्यादा वोट कटौती लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, सहारनपुर और आगरा जैसे बड़े शहरों में हुई है।

UP SIR BJP

लखनऊ में करीब 30 प्रतिशत और गाजियाबाद में 28 प्रतिशत वोट कटने की बात सामने आई है। पार्टी को आशंका है कि इनमें बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है जो बीजेपी के समर्थक रहे हैं। मुस्लिम बहुल इलाकों में भी ऐसे वोट कटे हैं जिनका झुकाव बीजेपी की तरफ माना जा रहा था। यही वजह है कि पार्टी इसे हल्के में लेने को तैयार नहीं है।

योगी और हाईकमान ने खुद संभाला मोर्चा

ड्राफ्ट लिस्ट सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने तुरंत वर्चुअल बैठक बुलाई। इसमें सभी मंत्री, सांसद, विधायक, एमएलसी, जिला अध्यक्ष और संगठन के बड़े पदाधिकारी शामिल हुए। साफ संदेश दिया गया कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की सियासत से जुड़ा मामला है।

योगी ने कहा कि करोड़ों वोटों का कटना बहुत गंभीर है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके बाद तय हुआ कि अगले एक महीने तक पार्टी युद्ध स्तर पर वोटर लिस्ट सुधार अभियान चलाएगी।

के लक्ष्मण की एंट्री और रोजाना रिपोर्टिंग

पार्टी आलाकमान ने ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद के लक्ष्मण को यूपी में तैनात कर दिया है। उनसे हर दिन बूथ वार रिपोर्ट दिल्ली भेजने को कहा गया है। इसमें यह बताना होगा कि फॉर्म 6 भरवाकर कितने नए मतदाता जोड़े गए और कहां दिक्कत आ रही है।

निर्देश है कि हर विधानसभा, मंडल और वार्ड स्तर तक फॉर्म 6 पहुंचाया जाए। जिन सीटों पर बीजेपी का सांसद या विधायक नहीं है, वहां एमएलसी और राज्यसभा सांसदों को जिम्मेदारी दी गई है।

SIR के बाद कैसे बदला सियासी गणित?

SIR के बाद सियासी गणित कैसे बदल सकता है, इसका अंदाजा कुछ सीटों से लगाया जा सकता है। बाराबंकी की रामनगर सीट पर 2022 में सपा के फरीद महफूज किदवई ने बीजेपी के शरद अवस्थी को सिर्फ 261 वोटों से हराया था। अब यहां 54 हजार से ज्यादा वोट कट चुके हैं।

कुर्सी सीट पर बीजेपी 217 वोट से जीती थी और वहां 52 हजार से ज्यादा नाम लिस्ट से हटे हैं। बिजनौर की धामपुर सीट पर जीत का अंतर 203 वोट था, जबकि यहां करीब 47 हजार वोट गायब हैं। अगर अंतिम सूची में भी इतने नाम कटे रहे तो इन सीटों पर पूरी तस्वीर पलट सकती है।

आंकड़ों की जंग और सियासी आरोप

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक अब तक बीजेपी ने 1121 आवेदन जमा किए हैं, जबकि सपा के 26 और बसपा के सिर्फ 19 फॉर्म आए हैं। इस पर सपा ने आरोप लगाया कि अफसर बीजेपी के फॉर्म आसानी से स्वीकार कर रहे हैं और विपक्ष के कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है।

सपा प्रवक्ता सुनील सिंह साजन का कहना है कि PDA समाज के वोट जानबूझकर काटे जा रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने पलटवार करते हुए कहा कि अखिलेश यादव सिर्फ भ्रम फैला रहे हैं और हर पार्टी को बराबर अधिकार दिए गए हैं।

बीजेपी को किस बात का डर सता रहा है

असल डर यही है कि जिन वोटरों के नाम कटे हैं, उनमें 85 से 90 प्रतिशत बीजेपी समर्थक हो सकते हैं, जैसा खुद मुख्यमंत्री योगी ने पार्टी बैठक में कहा था। पार्टी ने हर लोकसभा क्षेत्र में कम से कम दो लाख नए वोट जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। अगले 15 दिनों तक सभी कार्यक्रम रद्द कर बूथ बूथ जाकर वोट जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। 1.77 लाख बूथों पर साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा मतदाता जोड़ने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है।

यानी UP SIR सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों की दिशा तय करने वाली कवायद बन चुकी है। यही वजह है कि बीजेपी इसे अपनी सियासी लड़ाई का सबसे अहम मोर्चा मानकर मैदान में उतर गई है।

UP SIR दावे और आपत्ति की आखिरी तारीख

6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियों का दूसरा चरण चल रहा है। इस दौरान जिनका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, वे फॉर्म 6 भरकर जोड़ सकते हैं। 1 जनवरी 2026 तक 18 साल पूरे करने वाले युवा भी इसी फॉर्म से मतदाता बन सकते हैं।

27 फरवरी तक जांच और सत्यापन होगा और 6 मार्च को अंतिम वोटर लिस्ट जारी की जाएगी। बीजेपी ने अपने सभी मोर्चों और प्रकोष्ठों को बूथ लेवल अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने का आदेश दिया है।

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