UP News: 6 संतानों के बाद भी वृद्धा आश्रम में रहने को मजबूर मां ! बेटे ने बयां की दर्द भरी कहानी
Prayagraj News Uttar Pradesh: बात उस महिला की जिसे कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही अपने साथ पढ़ने वाले युवक से प्रेम होता है। धीरे- धीरे दोनों का प्रेम इस कदर बढ़ गया कि साथ जीने मरने की ठान ली। दोनों ने प्रेम विवाह किया। जिससे 8 संताने हुई। लेकिन अब सब कुछ अच्छा नहीं है। बुढ़ापे में जब पति और बच्चों के साथ की सबसे ज्यादा जरूरत होती है वैसे समय में महिला को वृद्धा आश्रम रहना पड़ रहा है। हम बात कर रहे हैं कल्याणी देवी प्रयागराज की रहने वाली रेखा सारस्वत की। रेखा इन दिनों नैनी वृद्धाश्रम में रह रही हैं। 12 फरवरी को वह महाकुंभ गई उसके बाद से परिजनों का कुछ पता नहीं चला। तब से वह इस उम्मीद में वृद्धाश्रम में रह रहीं हैं कि कोई बेटा उन्हें लेने आयेगा। ये सब कैसे हुआ? क्या कारण हैं इसके ? इन सब मुद्दों पर वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने रेखा सारस्वत के बेटे सक्षम से बात की जो अभी हिमाचल प्रदेश के सोलन में है।
तो ये हैं वजहें
सक्षम कहते हैं कि आज मेरे घर की जो भी हालत है उसके जिम्मेदार मेरे पिता
चन्द्रशील द्विवेदी हैं। हर तरह से संपन्न होने के बाद भी उन्होंने ऐसी स्थिति बना दी है कि हम अनाथों की जिंदगी जी रहे है। घर होते हुए भी किराए के मकान में रहने को मजबूर है। मेरे पिता जिन्होंने दो शादी की एक मेरी मां रेखा सारस्वत जो प्रयागराज की रहने वाली है और दूसरी रेखा शुक्ला जो उरई, जालौन की रहने वाली है।मै रेखा सारस्वत की संतान हूं। हम कुल मिलाकर 6 भाई और दो बहन थे, जिसमें परिवार की इस स्थिति से तंग आकर छोटा भाई रक्षम कही चला गया और पिता की लापरवाही के कारण बड़े भाई सत्यम की कुपोषण से मौत हो गई। अब हम 6 भाई बहन है।

पिता ने हमे घर से निकाल रखा है
सक्षम बताते हैं कि मेरे पिता ने मुझे और दक्षम को घर से निकाल दिया है। हम किसी दोनों किसी तरह अपना जीवन काट रहे हैं। खुद तंगी झेल रहे है।
प्रियम के ससुराल वालों का है कब्जा
सक्षम बताते हैं कि उनके प्रयागराज कटरा मकान का नियंत्रण पिता ने उनके भाई प्रियम जो मध्य प्रदेश के देवाश में लेक्चरर है को दे रखा है। प्रियम ने इसकी पूरी जिम्मेदारी अपने ससुराल के लोगों को दे रखी है। इनके ससुराल के लोगों का ही यहां कब्जा है।
ससुराल के लोगों पर दर्ज हैं कई मुकदमे
सक्षम कहते हैं कि ये लोग आपराधिक प्रवृति के है। इनके खिलाफ थाने में मुकदमा भी दर्ज है। ये दबंग किस्म के लोग है जिन्होंने हमारी संपति पर कब्जा कर रखा है।
मां का कुंभ जाना रहस्यमयी
सक्षम से यह पूछने पर कि मां आखिर महाकुंभ में कैसे पहुंची, इस पर उन्होंने कहा कि घर पर मां और प्रियम के ससुराल वाले थे। मां वहां कैसे पहुंची इसका जवाब उन्हें देना चाहिए।

सक्षम कहते हैं कि मेरे सबसे बड़े भाई वकील है। घर की इस तनावपूर्ण स्थिति के कारण वो प्रयागराज में ही किराए के मकान में रहते हैं।
पिता के पास है ज्यादा संपति
सक्षम कहते हैं कि मेरे पिता के पास चल और अचल दोनों संपत्तियां है। खेती बारी का काम भी वो खुद देखते है। मेरे पिता
चन्द्रशील द्विवेदी के पास नया कटरा प्रयागराज, तुलसी नगर उरई, नौकुचियाताल, नैनी ताल में अपनी अचल संपत्ति है। हम भाइयों के पास कोई अचल संपति नहीं है।
मेरे भाई दक्षम ने मां से किया है वादा
सक्षम ने कहा कि कुछ दिन पूर्व मेरा भाई दक्षम नैनी स्थित वृद्धाश्रम गया था। उसने मां से मुलाकात भी की थी। मां के साथ ले चलने पर उसने कहा कि आर्थिक स्थिति थोड़ी ठीक होने के बाद आकर ले जाऊंगा। रेखा को आज भी अपनों का इंतजार है।












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