UP Politics: विधानसभा के नतीजों से डरी बीजेपी ने पूर्वांचल में राजभर के सामने किया सरेंडर?
विधानसभा चुनाव में बीजेपी का पूर्वांचल के कई जिलों से सफाया हो गया था। गाजीपुर, आजमगढ़, जौनपुर और अम्बेडकर नगर समेत कई जिलों में बीजेपी का प्रदर्शन काफी निम्न स्तर का था।
OM Prakash Rajbhar and BJP: देश में अगले साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने ओम प्रकाश राजभर के साथ गठबंधन का ऐलान किया है। इस ऐलान की लंबे समय से प्रतिक्षा की जा रही थी। अब राजभर 18 जुलाई को एनडीए की बैठक में शामिल होंगे।
जोखिम नहीं लेना चाहती थी बीजेपी
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों से डरी बीजेपी ने एक तरह से राजभर के सामने सरेंडर कर दिया है क्योंकि वह लोकसभा चुनाव में किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती है।

पूर्वांचल के कई जिलों में हुआ था बीजेपी का सफाया
उत्तर प्रदेश में एक साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) ने सपा के चीफ अखिलेश यादव के साथ मिलकर अपने नए सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को काफी नुकसान पहुंचाया था। पूर्वांचल में कुछ जिले ऐसे थे जहां बीजेपी का खाता नहीं खुला था। गाजीपुर, आजमगढ़ और अम्बेडकर नगर जिलों से बीजेपी पूरी तरह से साफ हो गई थी।
राजभर के साथ गठबंधन के लिए उतावली दिखी बीजेपी
लोकसभा चुनाव में अभी करीब सात-आठ महीने बचे हैं लेकिन बीजेपी के नेता राजभर के साथ गठबंधन करने के लिए लालायित थे। ओम प्रकाश राजभर के मुताबिक, उन्हें अमित शाह का फोन आया था कि वह मिलना चाहते हैं। उनके बुलावे पर मैं दिल्ली गया और गठबंधन का ऐलान कर दिया गया। हम बीजेपी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। दरअसल बीजेपी के सामने संकट यह भी है कि वह पूर्वांचल में अपने से ज्यादा दूसरे पर निर्भर है।
अब्बास अंसारी को लेकर पूर्वांचल में असहज हुई बीजेपी
हालांकि गठबंधन के बाद बीजेपी पर इस बात के आरोप लग रहे हैं कि एक तरफ जहां योगी की सरकार यूपी में अपराधियों पर नकेल कसने की हर संभव कोशिश कर रही है वहीं दूसरी ओर संगठन ने ऐसी पार्टी के साथ गठबंधन क्यों किया जिसमें उनके पुत्र अब्बास अंसारी विधायक हैं। ओम प्रकाश राजभर हालांकि यह कहकर उनसे किनारा करते रहे हैं कि उनको अखिलेश ने लड़ाया था एसबीएसपी के सिंबल पर। वह हमारे उम्मीदवार नहीं थे।
राजभर के इस दावे को लेकर वरिष्ठ पत्रकार और राजनतीक विश्लेषक राजीव रंजन कहते हैं कि,
क्या बीजेपी गठबंधन से पहले राजभर के दावे पर दबाव नहीं डाल सकती थी। जिस तरह सपा के विधायक दारा सिंह चौहान ने सपा की सदस्यता से इस्तीफा देकर बीजेपी के साथ खड़े होने का ऐलान किया, क्या उसी तरह ओम प्रकाश राजभर बीजेपी के साथ गठबंधन करने से पहले अब्बास अंसारी की सदस्यता खत्म करने का एक पत्र विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को नहीं लख सकते थे। क्या बीजेपी ने इतना करने के लिए राजभर पर दबाव नहीं बना पाई ताकि उसे पूर्वांचल में फजीहत न झेलनी पड़े।
विधानसभा चुनाव के नतीजों से डर गई थी बीजेपी
विधानसभा चुनाव के दौरान राजभर ने पूर्वांचल में बीजेपी का नुकसान किया था। पूर्वांचल के आंकडों पर गौर करें तो लगभग आधा दर्जन जिलों में बीजेपी की स्थिति काफी कमजोर हुई है। खासतौर से राजभरों का वोट बीजेपी को नहीं मिलने से गाजीपुर, मऊ, जौनपुर, बलिया, आजमगढ़ समेत दर्जनभर जिलों में बीजेपी को करीब 25 से 30 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था। अब बीजेपी ने चुनाव में जीत के बाद भी 2024 में मोदी को पीएम बनाने के लिए राजभर के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है।
विधानसभा चुनाव के बाद से ही लग रही थी गठबंधन होने की अटकलें
यूपी में हाल ही में सम्पन्न हुए चुनाव में ओम प्रकाश राजभर ने बीजेपी को काफी नुकसान पहुंचाया है और खासतौर से पूर्वांचल में। पूर्वांचल के आंकडों पर गौर करें तो लगभग आधा दर्जन जिलों में बीजेपी की स्थिति काफी कमजोर हुई है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के बाद से ही बीजेपी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर सक्रिय हो गई थी।
2017 के चुनाव में बीजेपी के सहयोगी थे राजभर
राज्य के पूर्व मंत्री ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाली एसबीएसपी ने 2017 का चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन में लड़ा था। ओम प्रकाश राजभर ने 2019 तक योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली कैबिनेट में मंत्री के रूप में भी काम किया, जब उन्हें 'गठबंधन विरोधी गतिविधियों' के लिए बर्खास्त कर दिया गया था।












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