UP Nikay Chunav 2023: 2024 से पहले जनता से कनेक्ट होने के बड़े मौके को भुनाने में चूक रही है कांग्रेस?
यूपी निकाय चुनाव को हल्के में लेना कांग्रेस को महंगा पड़ेगा? राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो 2024 से पहले कांग्रेस को अपनी चुनावी तैयारियों को परखने का एक बड़ा मौका था लेकिन प्रियंका गांधी इसमें चूक गई हैं।

UP Nikay Chunav 2023: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव की सरगर्मी अपने चरम पर है। निकाय चुनाव के पहले चरण का मतदान आज सम्पन्न हो जाएगा और दूसरे चरण का मतदान 9 मई को होगा लेकिन यूपी में हाशिए पर खड़ी कांग्रेस की प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी निकाय चुनाव में प्रचार तो दूर एक बार भी लखनऊ नहीं आईं हैं। इसका असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो एक तरफ जहां सीएम योगी और सपा के चीफ अखिलेश यादव प्रचार में जुटे हैं वहीं प्रियंका का यूपी से दूर रहना लोकसभा 2024 के लिहाज से नुकसानदायक साबित हो सकता है।
कांग्रेस के सामने था वोटरों से जुड़ने का बड़ा मौका
दरअसल यूपी में कांग्रेस हाशिए पर खड़ी है। पिछले कई चुनावों में उसकी बुरी गति हो रही है। शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के जरिए शहरी वोटरों से जुड़ने का मौका यूपी कांग्रेस को मिला था लेकिन यह मौका उसके हाथ से फिसलता जा रहा है। नकारात्मक भावना, कम ऊर्जा और मनोबल के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता गुरुवार को होने हो रहे मतदान में लगे हुए हैं लेकिन नेताओं के मन में बड़े नेताओं के न आने की कसक भी बनी हुई है। खासतोर से प्रियंका गांधी की।
निकाय चुनाव में भी चेहराविहीन दिख रही कांग्रेस
जहां एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सहित भाजपा के दिग्गज अपने उम्मीदवारों के लिए आक्रामक प्रचार कर रहे हैं, वहीं यूपी कांग्रेस की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा पिछले छह महीनों में एक बार भी अपने यूपी का दौरा नहीं किया है। यूपीसीसी मुख्यालय में अंतिम बार वह जुलाई 2022 में आईं थीं। यूपी कांग्रेस के साथ प्रियंका के जुड़ाव ने वास्तव में कांग्रेस के अभियान को चेहराविहीन बना दिया है।
यूपी प्रभारी के न आने से शिथिल हो गया है लोकल नेतृत्व
कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने स्वीकार किया, "चूंकि वह यूपी की प्रभारी हैं इसलिए सबको उनका इंतजार रहता है। राज्य में या राज्य से कोई अन्य नेता उनकी अनुपस्थिति में योगदान देने को तैयार नहीं है क्योंकि इससे उनके मन में यह डर बना हुआ है कि इससे नेतृत्व नाराज हो सकता है।" हालांकि प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी यह दावा करते फिर रहे हैं कि कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ रही है। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस कितनी सीटों पर चुनव जीतती है।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली थी करारी हार
यूपी में लगभग एक साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी ने काफी मेहनत की थी। हालांकि उनका यह परिश्रम सिर्फ मौकों तक सही सीमित रह गया है। यानी जब चुनाव आता है तो वह यूपी में सक्रिय हो जाती हैं लेकिन चुनाव के समाप्त होते ही वह यूपी से दूर होकर नेशनल राजनीति में हाथ पांव मारने लगती हैं। इससे कार्यकर्ताओं के साथ उनकी जो डोर बंधी होती है वह टूट जाती है। इसको दोबारा सही करने में समय लग जाता है। हालांकि प्रियंका गांधी के लाख कोशिशों के बावजूद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ दो सीटों पर ही जीत नसीब हुई थी।












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