UP Nikay Chunav: राष्ट्रीय पार्टी बनने के बाद AAP की पहली अग्निपरीक्षा, पार्टी कर रही बड़ी जीत का दावा

उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव को इस बार आम आदमी पार्टी पूरी गंभीरता से ले रही है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि नेशनल पार्टी बनने के बाद पार्टी का यह पहला चुनाव है जिसे वह पूरी ताकत के साथ लड़ रही है।

केजरीवाल

Aam Aadmi Party in UP: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। एक तरफ जहां बीजेपी इस चुनाव को 2024 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल मानकर चल रही है वहीं दूसरी ओर दिल्ली के एमसीडी चुनाव में शानदार जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) यूपी निकाय चुनाव को पूरी गंभीरता से लेने का दावा कर रही है। हालांकि यूपी के पिछले निकाय चुनाव में आप को 40 लाख वोट मिले थे जबकि विधानसभा चुनाव में पार्टी ने करीब एक फीसदी वोट शेयर हासिल किया था। आप के नेताओं का दावा है कि नेशनल पार्टी बनने के बाद यूपी निकाय चुनाव पार्टी का पहला चुनाव है लिहाजा पार्टी इसमें जरूर अच्छा प्रदर्शन करेगी।

तीन चुनावों में यूपी में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई आप

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो आम आदमी पार्टी (AAP) अभी तक उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में अपनी छाप नहीं छोड़ पाई है। इसलिए इस निकाय चुनाव को एक अवसर के तोर पर देख रही है। आप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह उत्तर प्रदेश में शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव में मेयर की सभी सीटों, नगर निकाय वार्डों और नगर पंचायतों में चुनाव लड़ेगी। आप यूपी में 2014 के लोकसभा चुनाव, 2017 का निकाय चुनाव और 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है। इनमें से 2017 का जिला पंचायत चुनाव सबसे अच्छा था, जिसमें पार्टी समर्थित उम्मीदवारों ने लगभग 40 लाख वोट या 8-10% वोट शेयर हासिल किए थे।

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पार्टी का दावा- इस बार अलग दिखेगा परिणाम

उत्तर प्रदेश में आप के प्रदेश अध्यक्ष प्रभारी सभाजीत सिंह ने कहा, "स्थानीय निकाय चुनाव बहुत अलग होते हैं क्योंकि ये स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं और अक्सर उम्मीदवार की प्रतिष्ठा राजनीतिक प्रतिबद्धता से अधिक महत्वपूर्ण होती है। हमें हाल ही में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल हुआ है। इस बार हम पूरी मेहनत से चुनाव लड़ रहे हैं और पिछली बार की तुलना में इस बार अच्छा प्रदर्शन करेंगे।" आप ने यूपी में मेयर प्रत्याशियों का ऐलाान कर दिया है। हालांकि सूत्रों बता रहे हैं कि दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीस सिसौदिया के जेल जाने और सीएम केजरीवाल से सीबीआई की पूछताछ का असर पार्टी की चुनावी तैयारियों पर जरूर पड़ रहा है।

पंजाब जीतने के बाद प्राथमिकता में यूपी सबसे उपर

पार्टी के एक नेता बताते हैं कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लिए पंजाब जीतने के बाद उत्तर प्रदेश प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। पार्टी राज्य में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए निकाय चुनाव पूरी ताकत से लड़ेगी। यूपी में आप का चुनावी अभियान उस समय शुरू हुआ था जब 2014 के लोकसभा चुनाव में शुरू हुई जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वाराणसी में नरेंद्र मोदी को चुनौती दी। मोदी ने 3.7 लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की।

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निकाय चुनाव को गंभीरता से ले रही AAP

आप के सूत्र बताते हैं कि निकाय चुनावों की तैयारी बहुत पहले से ही आप द्वारा शुरू कर दी गई थी। इसके राज्य प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह पिछले कई महीनों से सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर हर हफ्ते राज्य की राजधानी में डेरा डाले हुए हैं। सभाजीत सिंह के मुताबिक, "पार्टी ने सभी महापौर सीटों, निकाय वार्डों और नगर पंचायत सीटों पर चुनाव लड़ रही है। एमसीडी चुनाव में लोगों ने आप को वोट दिया है। गुजरात विधानसभा चुनाव में हम अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे हैं। हमने पंजाब में सरकार बनाई है। पार्टी उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव को गंभीरता से ले रही है।'

शिक्षा नीति और मोहल्ला क्लीनिक AAP के बड़े मुद्दे

पार्टी ने नवंबर से अब तक उत्तर प्रदेश के सभी नगर निगमों और नगर पंचायतों में पार्टी कार्यकर्ताओं की 1000 बैठकें आयोजित कर चुकी है। इन बैठकों के संचालन की जिम्मेदारी आप के 77 पदाधिकारियों को दी गई थी। निकाय चुनाव में आप का सबसे मजबूत चुनावी मुद्दे के तौर पर दिल्ली सरकार की सफल शिक्षा नीति और मोहल्ला क्लीनिक को रखा गया है। आप पहले ही 'सेल्फी विद गवर्नमेंट स्कूल' अभियान चला चुकी है। इस अभियान के तहत प्रदेश भर के आप कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश में ऐसे सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के साथ सेल्फी ली है, जिनकी हालत खस्ता है।

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