UP Nikay Chunav 2023: जानिए लखनऊ की महापौर सीट का इतिहास, विपक्ष तोड़ पाएगा BJP का तिलिस्म?
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की मेयर सीट पर बीजेपी का पिछले 28 सालों से कब्जा है। बीजेपी के दबदबे का असर ये है कि वह 1995 से ही इस सीट को लगातार जीतती आ रही है चाहे यूपी में किसी की भी सरकार रही हो।

Lucknow Mayor Seat: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनाव में अब सभी राजनीतिक दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है। इस चुनाव में यदि किसी की सबसे अधिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी है तो वह बीजेपी की है। बीजेपी ने पांच साल पहले यूपी में नगर निकाय के चुनाव में 13 सीटों पर कब्जा जमाया था। इस बार हालांकि दो सीटें बढ़कर यूपी में नगर निगम की कुल 17 सीटें हो गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख सीट यूपी की राजधानी लखनऊ के महापौर की है। जिस तरह से बीजेपी के भीतर तगड़ी फाइट दिख रही है उससे बीजेपी आलाकमान मुश्किल में है। लखनऊ महापौर की सीट पर बीजेपी का 1995 से ही कब्जा है।
लखनऊ महापौर सीट पर 28 साल से बीजेपी का कब्जा
यूपी की राजधानी लखनऊ महापौर की सीट पर पिछले 28 साल से बीजेपी का ही कब्जा रहा है। लखनऊ में महापौर बनाने की परम्परा की शुरुआत 1995 से हुई। इससे पहले नगर प्रमुख का पद रहता था और कभी जनसंघ के प्रत्याशियों का इसपर बोलबाला रहता था लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। बीजेपी पिछले ढाई दशक से अधिक समय तक इस सीट पर लगातार भगवा लहरा रही है। इस बार भी बीजेपी को उम्मीद है कि यूपी की यह हाइप्रोफाइल सीट उसी के पास रहेगी।
लखनऊ की सीट जीतना विपक्ष के लिए आसान नहीं
लखनऊ के महापौर की सीट जीतना विपक्ष के लिए इतना आसान नहीं है। इस सीट पर बीजेपी के साथ ही पूरे विपक्ष यानी सपा, बसपा और कांग्रेस की नजर रही है। इस बार इन तीनों पार्टियों से बीजेपी की कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है। बीजेपी के प्रवक्ता अवनीश त्यागी कहते हैं कि लखनऊ ही नहीं बीजेपी यूपी की सभी 17 सीटों पर परचम लहराएगी। जनता पीएम मोदी और सीएम योगी के डबल इंजन सरकार की नीतियों का लाभ उठा रही है इसलिए बीजेपी एक बार फिर जनता के भरोसे पर खरा उतरने का काम करेगी।
1995 से लगातार यह सीट जीतती आ रही बीजेपी
लखनऊ की सीट पर बीजेपी के दबदबे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1995 से लगातार बीजेपी यह सीट जीतती आ रही है। लखनऊ में 1995 में पहली बार एस सी राय बीजेपी के टिकट पर लखनऊ के महापौर बने थे। एक बार जीतने के बाद राय लगातार दो बार इस सीट से चुने गए। तब यह पद नगर प्रमुख के नाम से जाना जाता था लेकिन उसके बाद इस पद का नाम नगर प्रमुख की जगह महापौर कर दिया गया। उसके बाद भी एससी राय 2006 तक वह महापौर भी रहे। इसके बाद महापौर की जिम्मेदारी पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी के नेता डॉ दिनेश शर्मा के कंधों पर आ गई। शर्मा 2006 से 2017 तक महापौर रहे। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी सरकार में उनको डिप्टी सीएम बनाया गया।
लखनऊ में दिखेगी महिलाओं के बीच फाइट
2017 के बाद लखनऊ के महापौर सीट का समीकरण फिर बदल गया। लखनऊ की सीट महिला हो गई ओर यहां से बीजेपी ने संयुक्ता भाटिया पर दांव लगाया। 2017 में वह लखनऊ की महापौर बनने में कामयाब हो गईं। वह पांच साल तक बनी रहीं लेकिन अब एक बार फिर इस सीट को महिला सीट घोषित कर दी गई। एक बार फिर वह महापौर टिकट के लिए आवेदन कर चुकी हैं। लेकिन इस बार उनकी तगड़ी फाइट कई महिलाओं से है।
बीजेपी में टिकट के कई दावेदार
निवर्तमान महापौर संयुक्ता भाटिया का कहती हैं कि, जिस तरह बीजेपी का इतिहास रहा है कि इस सीट पर डॉ एससी राय को दो बार टिकट मिला, डॉ दिनेश शर्मा दो बार मेयर रहे उसी तरह महिला को भी दूसरा मौका मिलना चाहिए। बीजेपी के कार्यकर्ता जमीन पर उतरकर काम करते हैं और हमारे पास एक अच्छी टीम है जो इस दिशा में काम करेगी। दूसरी बार यदि पार्टी ने मौका दिया तो एक बार फिर शहर के विकास और बेहतरी के लिए काम किया जाएगा। हालांकि बीजेपी की ओर से संयुक्ता भाटिया के अलावा पूर्व कैबिनेट मंत्री कुसुम राय, पूर्व मंत्री स्वाति सिंह जैसे दिग्गजों का नाम भी शामिल है।












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