UP News: श्रीकांत त्यागी को लगा HC से झटका, सुरक्षा बढ़ाने की याचिका हुई खारिज

श्रीकांत त्यागी की सुरक्षा बढ़ाने की अपील को हाईकोर्ट ने यह कहते हुए ठुकरा दिया है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हों उसकी सुरक्षा नहीं बढ़ाई जा सकती है।

Noida-based politician Srikant Tyagi: उत्तर प्रदेश के नोएडा के रहने वाले नेता श्रीकांत त्यागी और उनकी पत्नी द्वारा सरकारी वेतन प्राप्त गनर की सुरक्षा की मांग को लेकर दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है।

याचिका पर अदालत ने की तल्ख टिप्पणी

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक व्यक्ति जिसने हिंसा को चुना है और उसके लिए मानव जीवन का कोई मूल्य नहीं है, उसे यह दलील देने का कोई अधिकार नहीं है कि सरकार को उसके जीवन की रक्षा के लिए विशेष उपाय करने चाहिए।

श्रीकांत त्यागी

त्यागी और उनकी पत्नी ने पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था क्योंकि उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।

श्रीकांत को मिल रही थी धमकियां

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि एक हिस्ट्रीशीटर और उसके गिरोह के सदस्य त्यागी पर उनके द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक मामले को वापस लेने का दबाव बनाने के लिए लगातार जान से मारने की धमकियां दे रहे थे।

सरकार को निजी खर्च पर चार गनर रखने की मिली थी सुविधा

इससे पहले, त्यागी को सार्वजनिक खर्च पर चार गनर की सुरक्षा प्रदान की गई थी लेकिन बाद में अगस्त 2022 में इसे वापस ले लिया गया। दूसरी ओर प्रतिवादियों के वकील ने रिट याचिका का विरोध करते हुए कहा कि त्यागी के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और इसलिए रिट याचिका खारिज किये जाने योग्य है।

आपराधिक गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति को नहीं मिलेगी सुरक्षा

याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की उच्च न्यायालय की पीठ ने 25 अप्रैल, 2001 के सरकारी आदेश (जीओ) का हवाला दिया। उक्त आदेश में यह उल्लेख किया गया था कि आपराधिक गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति को कोई सुरक्षा प्रदान नहीं की जानी चाहिए क्योंकि वह उनका दुरुपयोग कर सकता है।

अदालत ने कहा,

व्यक्तिगत सुरक्षा प्रदान करने से ऐसे व्यक्तियों की गतिविधियों को बड़े पैमाने पर समाज को नुकसान होगा। एक व्यक्ति जिसने हिंसा को चुना है और जिसके लिए मानव जीवन का कोई मूल्य नहीं है, उसे यह दलील देने का कोई अधिकार नहीं है कि राज्य को उसके प्रतिद्वंद्वियों से उसके जीवन की रक्षा के लिए विशेष उपाय करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को यदि कोई ख़तरा महसूस होता है तो वह उसका स्वयं का बनाया हुआ मामला होता है। इसके लिए राज्य उसे सुरक्षा प्रदान करने के लिए आगे नहीं आ सकता है।

गौरतलब है कि त्यागी तब सुर्खियों में आए थे जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था जिसमें उन्हें नोएडा के एक अपार्टमेंट परिसर में एक महिला के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट करते हुए दिखाया गया था।

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