UP News: खालिस्तान कमांडो फोर्स का आतंकी मंगत सिंह गिरफ्तार, 30 साल से था फरार
UP News: उत्तर प्रदेश एटीएस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। बुधवार(23 अप्रैल) को देर रात, एटीएस ने लंबे समय से फरार चल रहे आतंकी मंगत सिंह उर्फ मंगा को गिरफ्तार कर लिया। मंगा खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ था और बीते 30 वर्षों से पुलिस की पकड़ से दूर था। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
नोएडा एटीएस यूनिट और गाजियाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। उसे कथित तौर पर पंजाब के अमृतसर के एक गाँव से गिरफ्तार किया गया है। मंगत सिंह की गिरफ्तारी से खालिस्तानी नेटवर्क की कई राज खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है और सुरक्षा एजेंसियां उसके संपर्कों और गतिविधियों की गहराई से जांच कर रही हैं।

आतंकी मंगत सिंह उर्फ मंगा गिरफ्तार
न्यूज एजेंसी के मुताबिक एटीएस ने बताया उत्तर प्रदेश एटीएस ने बुधवार देर रात प्रतिबंधित आतंकी संगठन खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीए) के आतंकी मंगत सिंह उर्फ मंगा को गिरफ्तार किया है। उस पर 25,000 रुपये का इनाम था। नोएडा यूनिट और गाजियाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार किया है।
मंगा पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं
गिरफ्तार किए गए खालिस्तानी आतंकी मंगत सिंह उर्फ मंगा पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, आतंकवाद और विध्वंसकारी गतिविधियों को लेकर दर्ज मामलों में कार्रवाई हो रही है। उस पर आतंकवादी और विध्वंसकारी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (TADA) और शस्त्र अधिनियम की कई धाराओं के तहत केस दर्ज है।
मंगत सिंह के खिलाफ मामला साल 1993 में दर्ज हुआ था
मंगत सिंह के खिलाफ यह मामला साल 1993 में दर्ज हुआ था, जब वह एक बड़ी आतंकी साजिश में शामिल पाया गया था। तभी से वह फरार चल रहा था और अब तीन दशकों के बाद कानून के शिकंजे में आया है। एटीएस को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से खालिस्तानी नेटवर्क से जुड़ी पुरानी और नई गतिविधियों पर बड़ा खुलासा हो सकता है।
आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मंगत सिंह को 1993 में हिरासत में लिया गया था और 1995 में उसे जमानत मिल गई थी। पुलिस ने कहा कि वह तब से फरार है। वह डकैती और जबरन वसूली के एक अलग मामले में भी वांछित था। मंगत सिंह का भाई संगत सिंह प्रतिबंधित खालिस्तान कमांडो फोर्स का प्रमुख था। वह 1999 में पंजाब पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।












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