UP में सरकार किसी की रही, हमेशा रहा IAS Navneet Sehgal का दबदबा, आज होंगे रिटायर
IAS Navneet Sehgal आज रिटायर हो जाएंगे। हालांकि ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि रिटायरमेंट के बाद भी सरकार उनकी क्षमता को देखते हुए कोई अहम टास्क पकड़ा सकती है।
IAS Navneet Sehgal: उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में आईएएस नवनीत सहगल एक बड़ा नाम है। यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं। यूं तो यूपी में बहुत सारे आईएएस काम करते हैं लेकिन इनमें से कुछ ही ऐसे होते हैं जो अपने काम और हुनर से हर सरकार में जगह बनाने में कामयाब हो जाते हैं। इसी तरह की शख्सियत का नाम नवनीत सहगल है। सहगल ने पूर्व सीएम मायावती और अखिलेश यादव के साथ काम किया और अपने काम से एक नया ट्रेंड सेट किया।

कई सरकारों का अहम हिस्सा रहे नवनीत सहगल
सहगल के करीबी बताते हैं कि 1988 में लगातार तीन सरकारों में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी नवनीत सहगल आज सेवानिवृत्त होंगे। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकारों में महत्वपूर्ण पद संभाले।
वर्तमान में एसीएस खेल एवं युवा कल्याण हैं सहगल
वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव खेल एवं युवा कल्याण का कार्यभार संभाल रहे हैं और उन्हें विभाग में व्यापक बदलाव लाने का श्रेय दिया जाता है जैसा पहले कभी नहीं हुआ। पंजाब के रहने वाले सहगल बसपा सरकार में मुख्यमंत्री मायावती के सचिव थे। तब उन्हें पाँचवीं मंजिल के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में से एक माना जाता था।
सपा-बसपा सरकारों में भी मुख्यधारा में रहे
हालांकि, वर्ष 2012 में सपा सरकार बनने के बाद उन्हें किनारे कर दिया गया और प्रतीक्षा में डाल दिया गया। लेकिन, दो साल बाद वह 2014 में प्रमुखता और मुख्यधारा की नौकरशाही में वापस आ गए और उन्हें प्रमुख सचिव सूचना बनाया गया। वह तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव के सबसे भरोसेमंद अफसरों में से एक थे।
यूपीडा की जिम्मेदारी मिली तो बनवाया लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे
उनके पास डीआईपीआर के अलावा यूपीडा की भी जिम्मेदारी थी। यूपीडा के सीईओ के रूप में, वह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निर्माण के पीछे के व्यक्ति थे, जिसे एसपी ने अपने प्रमुख विकास प्रदर्शन के रूप में पेश किया था।
योगी की पहली सरकार में मिला सूचना विभाग जैसा अहम विभाग
योगी-1 सरकार में भी उन्हें सूचना जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन योगी सरकार-2 के गठन के कुछ समय बाद ही उन्हें अगस्त 2022 में हटा दिया गया और खेल विभाग में भेज दिया गया। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व योगी आदित्यनाथ के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध रखने और मीडिया जगत तथा राजनीतिक बिरादरी में उनकी काफी पैठ मानपी जाती है।












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