UP News: अम्बेडकर की अनुयायी लेकिन वंशवाद को बढ़ावा, कैसे भटकीं मायावती

BSP Chief Mayawati: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की मुखिया मायावती (Mayawati) ने अपने भतीजे आकाश आनंद को बसपा की बागडोर सौंपने का ऐलान कर दिया है। मायावती का यह फैसला हालांकि किसी को चौंकाने वाला नहीं लग रहा है क्योंकि लोग कुछ इसी तरह का अनुमान लगा रहे थे। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का यही कहना है कि मायावती के पास लीक से हटकर फैसला लेने का मौका था लेकिन उन्होंने पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव, चौधरी अजीत सिंह की तरह अपने परिवार के सदस्य को ही पार्टी की कमान सौंप दी।

मायावती

बसपा के अलावा अन्य पार्टियों में ऐसा ही

हालांकि ये मायावती का ये फैसला कोई नया नहीं है। भारत में हर पार्टी के लोग ऐसा ही करते आ रहे हैं। कांग्रेस इसका सबसे जीता जागता उदाहरण है लेकिन भाजपा में कई बड़े नेता ऐसे हैं जिनपर वंशवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगते रहे हैं। कुछ महीने पहले ही कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हुए थे जिसमें कांग्रेस ने बीजेपी को हरा दिया था। अब वहां बीजेपी के केंद्रीय आलाकमान ने कर्नाटक बीजेपी की जिम्मदारी पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र येदियुरप्पा को सौंपी है। वह वर्तमान में शिकारीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं।

मायावती के सामने थी बड़ी जिम्मेदारी

मायावती की जिम्मेदारी बड़ी है क्योंकि बाबा साहब की प्रतिबद्ध अनुयायी मानी जाती हैं। उन्होंने अंबेडकर की कसमें खा खाकर अंतिम पंक्ति में बैठे कमजेार दलित को न्याय दिलाने की बातें कही हैं लेकिन जब बात आयी बसपा जैसी बड़ी पार्टी की कमान किसी नेता के हाथ में देने की तो मायावती ने लोकतंत्र को ताक पर रख दिया। ऐसा नही है कि बसपा ने अनुभवी नेताओं की कमी है। लेकिन पिछले कुछ सालों से जिस तरह से अपने भतीजे आकाश आनंद की राजनीति को बढ़ा रही थीं उससे इस बात के संकेत मिल गए थे कि कुछ बड़ा होने वाल है।

मुलायम सिंह के नक्शे कदम पर चलीं मायावती

आज जब मायावती ने बसपा की कमान अपने भतीजे को सौंपने की हरी झंडी दे दी है, तब उन्होंने बाबा साहब के उसूलों को काफी पीछे छोड़ने का काम किया है। उनके पास इस वंशवादी राजनीति के टैग से बाहर निकलने का एक बड़ा मौका था लेकिन मायावती पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की राह पर चल पड़ी हैं। एक समय में मुलायम ने अपने बेटे अखिलेश को सपा की बागडोर सौंप दी थी लेकिन अब उन्होंने अपने भतीजे को बसपा की कमान देने का फैसला कर लिया है।

बीजेपी ने किया बसपा पर पलटवार

मायावती के उत्तराधिकारी घोषित होने पर भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि,

उत्तराधिकार परिवार में होता है, राजनीतिक दल में नहीं। मायावती जी ने पहले मान्यवर कांशीराम के मिशन को कमीशन में बदला और अब परिवारवाद के दलदल में धकेल दिया। मायावती की इसी सोच की वजह से एक एक कर कांशीराम के अनुयायिओं ने उनका साथ छोड़ दिया। इन सबको दरिकनार करते हुए उन्होंने अपने भतीजे को पार्टी की कमान सौंपी है। अब लगभग यह तय हो गया है कि उनके इस फैसले के बाद बसपा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

वंशवाद में उलझी है दलितों एवं पिछड़ों की सियासत

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो यूपी की राजनीति पिछड़े और दलितों की सियासत वंशवाद में उलझी है। पहले चाहे मुलायम सिंह यादव हों या चौधरी अजित सिंह हों। इन्होंने भी अपने बेटों को अपनी राजनीतिक विरासत सौंपने का काम किया था। आज सपा की कमान अखिलेश यादव और आरएलडी की कमान जयंत चौधरी के हाथों में है।

बसपा के अलावा इन दलों ने भी बढ़ाई वंशवादी परम्परा

केवल मुलायम, अजित के अलावा बीजेपी के सहयोगी दल भी वंशवादी राजनीति को ही बढ़ाते नजर आ रहे हैं। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद हों या ओम प्रकाश राजभर हों या फिर अपना दल की अनुप्रिया पटेल हैं। संजय निषाद यूपी की योगी सरकार में मंत्री हैं तो उनके बेटे प्रवीण निषाद बीजेपी से सांसद हैं। अब वह अपने घर की महिलाओं को राजनीति में उतारने की तैयारी में जुटे हैं। वहीं दूसरी ओर ओम प्रकाश राजभर भी अपने वंशवाद को ही बढ़ाते नजर आते हैं।

क्या कहते हैं हैं राजनीतिक एक्सपर्ट

राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि, '' वंशवादी राजनीति सभी दलों पर हावी है। इससे अछूती कोई पार्टी नहीं है। बीजेपी भले ही कार्यकताओं की पार्टी होने का दावा करती है लेकिन वहां भी कई ऐसे नेता हैं जो या अपने पिता की लीगेसी को आगे बढ़ा रहे हैं। अब मायावती ने जो फैसला लिया है उससे इस परम्परा को और बढ़ावा मिलेगा। मायावती ने कांशीराम के आदर्शों को काफी पीछे छोड़ दिया है। 2024 के चुनाव में वंशवाद एक बार फिर चुनावी मुद्दा बनेगा।''

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+