UP News: "आओ गले मिले'' कार्यक्रम में शामिल हुए अखिलेश यादव, जानिए क्या है PDA राजनीति का मकसद

UP News: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। वो बीते बुधवार(9 अप्रैल) को ''आओ गले मिले'' कार्यक्रम के तहत 'होली-ईद मिलन सद्भाव समारोह'कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ''हमारा देश गंगा-जमुनी संस्कृति का देश है। हम सब मिलजुलकर सभी त्योहार मनाते हैं। देश में एक अलग तरह की अशांति है।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मैनपुरी की सांसद डिम्पल यादव रहें। इस समारोह में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों के प्रमुख धर्मगुरु एवं समाज के गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। सभी ने एक-दूसरे को होली की बधाई और ईद की मुबारकबाद दी। समारोह में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त म्यूजिशियन ब्रायन सिलास ने चार चांद लगा दिया। उन्होंने पियानो पर लता मंगेशकर, अनुराधा पौडवाल और अन्य बॉलीवुड संगीतकारों के लोकप्रिय गीतों की मधुर धुनें प्रस्तुत कीं।

Akhilesh Yadav

समाजवाद पार्टी ने नया नारा दिया 'आओ गले मिले'

बीजेपी ने नारा दिया है एक हैं तो सेफ हैं तो वहीं समाजवाद पार्टी ने नया नारा दिया है 'आओ गले मिले' इस मौके पर अखिलेश यादव ने कहा हमारे देश की पहचान है कि जिस धर्म के बारे में दुनिया में कहा गया कि ये वो देश है जिसने आया उसे इस देश ने अपना लिया। भाईचारा और सद्भाव हमारे समाज की ताकत है। उन्होंने कहा इस कार्यक्रम का उद्देश्य उसी सद्भाव एकता और भाईचारे का संगम है। यही हमारे देश और समाज की सच्चाई है।'' इस कार्यक्रम के जरिये सपा ने सभी धर्मों को एक साथ लाकर प्रदेश की जनता को संदेश देने का प्रयास किया है।

'पीडीए' ही चलेगा: अखिलेश यादव

अखिलेश यादव 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठजोड़ पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसे उन्होंने आगामी चुनावों में सफलता का आधार माना है। उन्होंने कहा है कि 2027 में 'पीडीए' ही चलेगा। ये अवधारणा उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ज्यादा ज़ोर से पेश की, लेकिन अब वे इसे 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए मुख्य रणनीति बना रहे हैं।

PDA राजनीति का उद्देश्य

सपा नेता अखिलेश यादव PDA राजनीति के सहारे BJP के "सामाजिक समीकरण" को तोड़ना - विशेषकर जो सवर्ण और कुछ OBC जातियों पर आधारित है। इसके साथ ही वो जातीय जनगणना की मांग को तेज करना चाहते है ताकि इसका लाभ उन्हें आने वाले चुनाव में मिल सके। PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग मिलकर लगभग 80 प्रतिशत से ज्यादा हैं। यही कारण है कि अखिलेश यादव इस समीकरण को सशक्त राजनीतिक हथियार मानते हैं - अगर यह वर्ग एकजुट हो जाए, तो उन्हें चुनावी लाभ मिल सकता है।

इस सद्भाव समारोह में सभी धर्म के लोग शामिल हुए थे। प्रमुख धर्मगुरुओं और विशेष जनों में पंडित रवीन्द्र दीक्षित, मौलाना याकूब अब्बास, मौलाना फजले मन्नान, ज्ञानी गुरमेहर सिंह, विशप जेराल्ड जॉन मथायस, प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. वंदना, ताहिरा हसन सहित अनेक धर्म, शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र की हस्तियां मौजूद रहीं।

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