UP Health Policy: योगी सरकार का बड़ा कदम, अब छोटे शहरों में भी मिलेंगी कार्डियोलॉजी और न्यूरोसर्जरी सेवाएं

UP health policy: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। आने वाले वर्षों में मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि अब हर जिले में उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

सरकार एक नई स्वास्थ्य नीति लेकर आ रही है, जिसका मकसद है-हर नागरिक को गुणवत्ता से भरपूर, सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं देना। इस नीति के जरिए निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिले और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसका लाभ पहुंचे।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर इस नीति की रूपरेखा तय की है। उन्होंने कहा कि केवल इलाज देना ही नहीं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन देना सरकार की प्राथमिकता है।

शहरी से लेकर ग्रामीण तक फैलेगा हेल्थ नेटवर्क

इस नीति के तहत प्रदेश में सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स का जाल बिछाया जाएगा। कार्डियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, ऑन्कोलॉजी जैसी उन्नत सुविधाएं अब हर जिले में उपलब्ध होंगी। यही नहीं, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन समेत अन्य सरकारी योजनाओं से इन अस्पतालों को जोड़ा जाएगा।

सरकार की मंशा है कि मेडिकल सेवाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें। छोटे शहरों और दूरदराज के गांवों में भी आम आदमी को वही सेवा मिले जो मेट्रो सिटीज़ में उपलब्ध होती है।

तीन स्तरों पर लागू होगी नई नीति

नई स्वास्थ्य नीति को तीन अलग-अलग मॉडल में लागू किया जाएगा-मॉडल A, मॉडल B और मॉडल C। मॉडल A में 17 नगर निगम क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिसमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे विकसित क्षेत्र भी शामिल हैं। यहां कम से कम 200 बेड वाले तीन सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाए जाएंगे।

इन अस्पतालों में कार्डियोलॉजी, यूरोलॉजी, रेडिएशन, स्त्री रोग, प्रसूति और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन शहरों में निजी निवेश को विशेष बढ़ावा दिया जाएगा।

जिला मुख्यालय और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े बदलाव

मॉडल B में प्रदेश के 57 जिला मुख्यालयों को कवर किया गया है। यहां भी 200 बेड के अस्पतालों की स्थापना की जाएगी, जिसमें मॉडल A जैसी सभी सुविधाएं मौजूद होंगी। इसका लक्ष्य है कि जिला स्तर पर ही जटिल बीमारियों का इलाज संभव हो।

वहीं मॉडल C के अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जिलों के पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों में 100 बेड के अस्पताल स्थापित होंगे। यहां पर सामान्य चिकित्सा, सामान्य शल्य चिकित्सा और प्रसूति सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

योगी सरकार की इस नीति में निजी निवेशकों के लिए विशेष रियायतें भी शामिल की गई हैं। भूमि खरीद पर 100% स्टांप ड्यूटी छूट, बिजली कनेक्शन में प्राथमिकता और तेज़ी से मंजूरी (NOC) की सुविधा दी जाएगी।

इसके अलावा, सरकारी एजेंसियों के जरिए रियायती दरों पर जमीन भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य है कि निवेशकों को किसी तरह की अड़चन न हो और तेजी से अस्पतालों की स्थापना हो सके।

रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे

नई हेल्थ पॉलिसी से जहां एक ओर इलाज सुविधाएं बेहतर होंगी, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए रोजगार के द्वार भी खुलेंगे। नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों से निकले छात्रों को सीधे इन नई स्वास्थ्य संस्थाओं से जोड़ा जाएगा। इससे न सिर्फ राज्य में हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की संख्या बढ़ेगी, बल्कि युवाओं को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार भी मिलेगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि इस नई हेल्थ पॉलिसी को जल्द से जल्द अंतिम रूप देकर कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाए। मंजूरी मिलते ही पहले तीन महीने में कम से कम 20 जिलों में अस्पतालों के लिए जमीन का आवंटन शुरू कर दिया जाएगा।

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