योगी सरकार के पास योग्य वकीलों की कमी, हाई कोर्ट ने लगाई फटकार
इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालती कार्रवाई में सहयोग के लिए योग्य वकीलों के अकाल पर योगी सरकार को आड़े हाथों लिया है। हाईकोर्ट ने राज्य विधि अधिकारी के पदों पर सक्षम और योग्य वकीलों की नियुक्ति न होने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। हाईकोर्ट ने सरकार पर सख्त टिप्पणी करते हुए सरकार से पूछा कि ऐसे हालात में क्या कोर्ट मुकदमों का एकतरफा निस्तारण करें ? कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए यह भी कहा कि न्यायालय में सरकार का पक्ष नहीं रखा जा रहा है। इससे बेवजह अदालत का समय बर्बाद हो रहा है, क्यों न इसके लिए सरकार पर भारी हर्जाना लगाया जाए?

क्या है मामला
दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट में शनिवार को एक मामले की सुनवाई चल रही थी। केस में सरकारी वकील द्वारा मुकदमे में जवाब दाखिल करना था लेकिन जवाब दाखिल नहीं हुआ। इससे पहले भी इसी मामले में दो बार सुनवाई सिर्फ इसी वजह से टल गई क्योंकि सरकारी वकील ने कहा कि जवाब तैयार हो रहा है। इस बार भी जब सुनवाई जवाब के अभाव में टली तो कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए सरकार की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। इस मामले में न्यायालय ने प्रमुख सचिव विधि उमेश कुमार को तलब कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि वह बताएं कि अदालतों में सहयोग के लिए समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ आज जब मनसाद व अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी तब सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में अभी जवाब तैयार हो रहा है। जबकि इस मामले में 8 व 19 सितंबर को भी सिर्फ इसी वजह से सुनवाई टली थी। क्योंकि सरकारी वकील जवाब तैयार करने की बात कह रहे थे। लापरवाही से नाराज कोर्ट ने याची के पक्ष में पारित अंतरिम आदेश को अग्रिम आदेश तक के लिए बढ़ाते हुये प्रमुख सचिव को 24 अक्टूबर को तलब किया है। न्यायालय ने साफ तौर पर कह दिया है कि अब अदालत इस तरह सरकार के पक्ष की प्रतीक्षा नहीं करेगी, बल्कि केसों का एकतरफा निस्तारण कर सरकार पर जुर्माना ठोकेगी।












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