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औरंगजेब पर राजनीति कितनी जायज? इतिहासकार ने चुनाव आयोग से कर दी यह मांग

Mughal Emperor Aurangzeb Latest News Hindi Uttar Pradesh: मुगल शासक औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद के बाद पूरे देश में औरंगजेब की अचानक से चर्चा शुरू हो गई। समाज में कई वर्ग हैं और हर वर्ग के लोगों का अपना मत है। औरंगजेब को लेकर राजनीति भी शुरू हो चुकी है। वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मनोज कुमार तिवारी से औरंगजेब से संबंधित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। एक इतिहासकार के रूप में प्रोफेसर मनोज कुमार तिवारी ने अपने तर्क दिए जो काफी महत्व रखते है। आइए जानते हैं प्रोफेसर तिवारी ने औरंगजेब को लेकर क्या बातें कहीं?

प्रोफेसर तिवारी ने कहा कि औरंगजेब को लेकर विवाद एक राजनीतिक विमर्श के रूप में चल रहा है जो नहीं होना चाहिए। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनैतिक नहीं बल्कि अकादमिक विमर्श होना चाहिए। जब यह राजनीतिक मुद्दा बनता है तो इसका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ वोट की राजनीति होती है।

Mughal emperor Aurangzeb

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बंद होनी चाहिए ऐसी राजनीति
प्रोफेसर तिवारी ने कहा कि ऐसी राजनीतिक विमर्श को बंद किया जाना चाहिए। चुनाव आयोग को कठोर आचार संहिता बनानी चाहिए जिससे ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर इस तरह की राजनीति न हो।

अकबर ज्यादा लोकप्रिय रहा
प्रोफेसर तिवारी ने कहा कि अगर औरंगजेब की बात करें तो उससे ज्यादा लोकप्रियता अकबर की रही। औरंगजेब की अपेक्षा प्रजा ने उसके भाई दारा शिकोह को ज्यादा पसंद किया।

आदर्श नहीं मान सकते
प्रोफेसर तिवारी ने कहा कि औरंगजेब पूरे देश में आदर का पात्र नहीं है। तर्क के आधार पर बात करें तो कोई शासक महान है या क्रूर है, अच्छा है या बुरा है इसके भी कुछ पैमाने हैं।प्रजा कितनी सुखी है, कितनी समृद्ध है? जनता के साथ राजा का व्यवहार कैसा रहा? ऐसे बहुत से पैमाने हैं।

औरंगजेब के समय हुए बहुत विद्रोह
प्रोफेसर मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि औरंगजेब निःसंदेह एक बड़े राज्य का शासक था लेकिन उसके समय में बहुत विद्रोह हुए। उसने बहुत से मंदिरों को ध्वस्त कर दिया। ये एक महान शासक की निशानी तो नहीं ही सकती ना ही उसे महान शासक माना जा सकता है।

भारतीय इतिहास का हिस्सा
प्रोफेसर तिवारी ने कहा कि वह भले ही एक महान शासक नहीं था लेकिन वह इतिहास का हिस्सा हैं।

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