DDU University के अर्थशास्त्रियों ने बताई पूर्व प्रधानमंत्री की वो नीतियां जिन्होंने बदली थी देश की तस्वीर
Manamohan Singh Latest News In Hindi Uttar Pradesh: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर देश के कोने - कोने से शोक संवेदना व्यक्त की जा रही है। इसके साथ ही लोग पूर्व प्रधानमंत्री को लेकर लोग अपने विचार भी व्यक्त कर रहे हैं। इसी क्रम में वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के अर्थशास्त्र विभाग के शिक्षकों का पूर्व पीएम को लेकर विचार जाना। इन अर्थशास्त्रियों ने कई महत्वपूर्ण बातें बताई।
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अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संदीप कुमार ने कहा कि सभी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की समझ रखने वाले मनमोहन सिंह ने देश विदेश में देखा था कि जो वैश्वीक दौर है उनमें अर्थव्यवस्थाएं कट कर नहीं रह सकती । अपनी अर्थव्यवस्था को अगर हम वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ते हैं तो जो संकट की स्थितियां है उनसे निकलकर कई अवसर मिल सकते हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर उन्होंने नई आर्थिक नीति की शुरुआत की। नई आर्थिक नीति के साथ ही उन्होंने नई औद्योगिक नीति की भी शुरुआत की।

अर्थशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर सत्यपाल सिंह ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री का निधन दुःखदाई है। वह भारत के साथ हुए क्रूर विभाजन का प्रत्यक्ष गवाह रहे। विषम परिस्थितियों से निकलते हुए उन्होंने देश विदेश में अर्थशास्त्र की बेहतर शिक्षा ग्रहण की। भारतीय अर्थव्यवथा में रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में इनकी भूमिका देखी जाए, चाहे यूजीसी में या वित्त मंत्री के रूप में इनकी भूमिका देखी जाए , चाहे प्रधानमंत्री के रूप में इनकी भूमिका देखी जाए कहीं यह कमतर नहीं थे। उस दौर की बात करें जिस समय भारतीय अर्थव्यवस्था में राजनैतिक अस्थिरता थी। वह समय था 1990 का। इस अस्थिरता के बाद जब 1991 में मनमोहन सिंह वित्त मंत्री बनते है तो इन्होंने सर्वप्रथम LPG यानी लिबराइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाजेशन पर कार्य करते हुए देश को नई आर्थिक नीति दी। इसके बाद से देश में बड़ा बदलाव देखने को मिला। जो आबादी प्राथमिक क्षेत्र में फंसी थी वह द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र में शिफ्ट होना शुरू हुई।
अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर राजू गुप्ता बताते हैं कि जब बात मनमोहन सिंह की आती है तो सहसा हमारे मन में मनमोहन सिंह का नाम आ जाता है। वो ऐसा समय था जब भारतीय अर्थव्यवस्था एक बुरे दौर से गुजर रही थी। देश के वित्त मंत्री के रूप में मनमोहन सिंह जी ने जो नीतियां लाई वो आज भी याद की जाती हैं। उनकी ही नीतियों की देन है कि हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी हुई है। उदारीकरण , वैश्वीकरण का दौर उन्होंने ही शुरू किया। रुपए के विनियम का फैसला सराहनीय रहा। बैलेंस ऑफ पेमेंट की इनकी पॉलिसी ने 2008 में आई आर्थिक मंदी में भी भारत को मजबूती दी। मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नमन करता हूं।












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