UP Final Voter List 2026: BJP के अभेद्य किलों में कितने घटे वोटर? मुस्लिम बहुल जिलों में हैरान कर रहे आंकड़े
UP Final Voter List 2026: उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, खासकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए ये आंकड़े चिंता का विषय बन सकते हैं। आइए जानते हैं SIR के बाद यूपी के इन आंकड़ों में क्या छिपा है?
आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी के प्रभाव वाले शहरी क्षेत्रों में वोटरों के नाम बड़े पैमाने पर कटे हैं। लखनऊ, गाजियाबाद, प्रयागराज और कानपुर जैसे जिलों में 18 से 23 फीसदी तक वोट कम हुए हैं। अकेले लखनऊ में लगभग 23% और गाजियाबाद में 20% से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

SIR के बाद मुस्लिम बहुल क्षेत्रों की स्थिति
हैरानी की बात यह है कि बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जैसे मुस्लिम आबादी वाले जिलों में कटौती का औसत काफी कम रहा है। यहां प्रदेश के औसत (13.24%) के मुकाबले केवल 10 से 12 फीसदी नाम ही कटे हैं।
कुल आंकड़ों का गणित
- कुल कटौती: यूपी की वोटर लिस्ट से 2.04 करोड़ नाम हटाए गए हैं।
- वर्तमान स्थिति: अब यूपी में कुल वोटरों की संख्या 13.39 करोड़ (लगभग 13.40 करोड़) रह गई है।
- प्रतिशत: यूपी में कुल 13.24% वोटर कम हुए हैं, जो गुजरात (13.4%) के बाद देश में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।
- लिंग अनुपात: फाइनल लिस्ट में 54.54% पुरुष और 45.46% महिला मतदाता हैं।
नए वोटरों की एंट्री
जहां नाम कटे हैं, वहीं नए नाम जुड़े भी हैं। प्रयागराज में सबसे ज्यादा 3.29 लाख नए वोटर जुड़े हैं, इसके बाद लखनऊ और बरेली का नंबर है। विधानसभा स्तर पर साहिबाबाद में सबसे अधिक 82,898 नए नाम जोड़े गए हैं।
उत्तर प्रदेश में एसआईआर (SIR) के बाद जारी हुई फाइनल वोटर लिस्ट पर राज्य के सियासी गलियारों में घमासान शुरू हो गया है। विपक्ष ने इस प्रक्रिया और आंकड़ों में आए बदलावों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग की मंशा पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। आइए जानते हैं विभिन्न पार्टियों ने इस पर कैसी प्रतिक्रिया दी है।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आंकड़ों में भारी अंतर को लेकर चुनाव प्रणाली पर संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ड्राफ्ट लिस्ट और विधानसभा की लिस्ट, दोनों ही यूपी के कर्मचारियों द्वारा तैयार की गई हैं, तो इनके बीच इतना बड़ा फासला कैसे आ गया? संजय सिंह ने तर्क दिया कि यदि स्थानीय निकाय और ग्राम पंचायत की सूची में लगभग 17 करोड़ वोटर शामिल हैं, तो विधानसभा की फाइनल लिस्ट में यह संख्या घटकर 13.39 करोड़ कैसे रह गई। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि विपक्ष के वोटर्स को टारगेट करके बूथ स्तर पर नाम काटे गए हैं और पार्टी इसकी गहराई से पड़ताल करेगी।
समाजवादी पार्टी (SP) का क्या है रुख?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद इसे सत्ताधारी भाजपा की सोची-समझी रणनीति करार दिया है। उन्होंने भाजपा पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी भाजपा मुद्दों के मोर्चे पर पिछड़ने लगती है, तो वह संस्थाओं की आड़ लेकर चुनाव लड़ने का रास्ता चुनती है। अखिलेश ने एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का दावा करते हुए कहा कि मौजूदा आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है।












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