UP Farmer News: आग से जली फसल, जानिए सरकार से कैसे मिलेगी एक लाख की मदद, कहां करनी होगी शिकायत?
UP Farmer News: उत्तर प्रदेश में गर्मी की शुरुआत के साथ खेतों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। तेज गर्म हवाओं और टूटते हाई टेंशन तारों की वजह से कई इलाकों में गेहूं की तैयार फसल जलकर राख हो चुकी है। इन हादसों से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने एक अहम योजना चलाई है, जिससे प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है। लेकिन बहुत से किसानों को अब भी यह नहीं पता कि इस योजना का लाभ कैसे लिया जाए और किन प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी है।

अगर आपके खेत में फसल जल गई है, तो आप सरकार से मुआवजा पाने के पात्र हो सकते हैं। जानिए इस योजना का फायदा कैसे उठाया जाए और किन दस्तावेजों की जरूरत होगी।
मुख्यमंत्री खेत-खलिहान दुर्घटना सहायता योजना का लाभ कैसे लें?
राज्य सरकार की ओर से चल रही मुख्यमंत्री खेत खलिहान दुर्घटना सहायता योजना का उद्देश्य ऐसे किसानों को आर्थिक राहत देना है जिनकी फसल आग से नष्ट हो गई हो। योजना के तहत नुकसान का मूल्यांकन कर किसानों को मुआवजा दिया जाता है।
इस योजना का लाभ पाने के लिए आग की घटना की जानकारी 15 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों को देनी होती है। जितना जल्दी आप रिपोर्ट करेंगे, उतनी जल्दी प्रक्रिया शुरू होगी और मुआवजा मिलने की संभावना बढ़ेगी।
आवेदन कहां और कैसे करना है?
फसल जलने की घटना के बाद किसान को सबसे पहले ग्राम प्रधान, लेखपाल और सचिव को सूचित करना होता है। इसके बाद, किसान को अपने ब्लॉक के कृषि कार्यालय या मंडी समिति में एक प्रार्थना पत्र देना होता है, जिसे आवेदन माना जाता है।
इस पत्र में फसल की जानकारी, नुकसान का अनुमान, खेत की लोकेशन और किसान की व्यक्तिगत जानकारी शामिल होनी चाहिए। जांच के बाद अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट तैयार की जाती है और उसके आधार पर मुआवजा तय होता है।
कितनी राशि तक मिल सकता है मुआवजा?
सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा राशि किसान की भूमि की मात्रा और नुकसान के आधार पर दी जाती है।
- 2.5 एकड़ से कम भूमि पर फसल जलने पर 15,000 रुपये तक
- 2.5 से 5 एकड़ तक भूमि वाले किसानों को 20,000 रुपये तक
- 5 एकड़ से अधिक भूमि वालों को 30,000 रुपये तक की सहायता दी जाती है।
यदि नुकसान बड़ा हो तो यह राशि एक लाख रुपये तक भी पहुंच सकती है। यह फैसला जांच रिपोर्ट और नुकसान की गंभीरता पर निर्भर करता है।
कौन-कौन सी फसलें योजना में शामिल हैं?
योजना में गेहूं, धान, मक्का, बाजरा, मूंग, मसूर, राई जैसी खाद्यान्न फसलें शामिल की गई हैं। यदि इनमें से कोई भी फसल आग से नष्ट होती है तो किसान योजना के तहत मुआवजे के हकदार होते हैं।
इसके अलावा अगर किसान ने फसल बीमा कराया है, तो बीमा कंपनी से भी क्षतिपूर्ति का दावा किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए आग की घटना की पुष्टि समय पर जरूरी है।
किन बातों का रखें ध्यान?
मुआवजे की प्रक्रिया में सबसे अहम है समयबद्धता। यदि किसान आग लगने के 15 दिन के भीतर जानकारी नहीं देता तो उसका दावा खारिज हो सकता है। इसके अलावा दस्तावेज पूरे और सही होने चाहिए।
कृषि विभाग की टीम द्वारा मौके पर जाकर जांच की जाती है, इसलिए खेत में आग लगने के बाद फसल की स्थिति से छेड़छाड़ न करें। जितना अधिक साक्ष्य उपलब्ध होंगे, मुआवजे की प्रक्रिया उतनी ही आसान होगी।












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