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UP Electricity News: मौत के बाद भी नहीं मिली राहत, विजिलेंस ने बना डाला बिजली चोर, अदालत ने लगाई फटकार

UP Electricity News: बिजली चोरी की कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विद्युत विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विजिलेंस और बिजली विभाग की टीमें चेकिंग के नाम पर मृतकों को ही चोरी का दोषी ठहराने लगी हैं। अब तक ऐसे 179 मामले सामने आ चुके हैं।

यह खुलासा तब हुआ जब अदालत में इन मामलों की अंतिम रिपोर्ट (एफआर) की समीक्षा की गई। अदालत ने पाया कि इन मामलों में आरोपियों की मौत पहले ही हो चुकी थी, फिर भी उनके नाम पर मुकदमा दर्ज किया गया। अब सभी मुकदमे दोबारा जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।

UP electricity news vigilance team

जिन अधिकारियों और विजिलेंस दरोगाओं ने यह लापरवाही की, वे अब सवालों के घेरे में हैं। अदालत ने साफ तौर पर इसे विभाग की घोर अनदेखी बताया है। इन मुकदमों को एडीजे विशेष ईसी एक्ट संजय कुमार यादव की अदालत से फिर से विवेचना के लिए लौटा दिया गया है।

नंबर बढ़ाने की होड़ में हुई अनदेखी

बिजली विभाग की टीमें अपने गुडवर्क और आंकड़े बढ़ाने की होड़ में नियम-कायदों को ताक पर रख रही हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में अदालत में कुल 6463 मुकदमे पहुंचे, जिनमें 1710 में एफआर लगी। जबकि इस वर्ष अप्रैल तक 892 में से 838 मुकदमों में एफआर दाखिल हो चुकी है।

ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे बिना समुचित जांच के क्यों दर्ज हो रहे हैं? ये मामले तब खुलते हैं जब विवेचना के दौरान पता चलता है कि आरोपी की तो पहले ही मृत्यु हो चुकी है। फिर बिना देर किए एफआर दाखिल कर दी जाती है।

मुकदमे में वर्तमान उपभोक्ता की जांच नहीं

जब अदालत में ये मुकदमे पहुंचे, तो आपत्ति इस आधार पर लगी कि यदि मकान मालिक या संयोजनधारक की मृत्यु हो चुकी थी, तो वर्तमान में बिजली इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति पर मुकदमा क्यों नहीं किया गया? इसी आपत्ति के आधार पर अदालत ने एफआर नामंजूर करते हुए मुकदमे दोबारा जांच के लिए भेज दिए।

चीफ इंजीनियर ए.के. वर्मा ने माना कि यह बहुत बड़ी लापरवाही है। उन्होंने कहा कि चेकिंग से पहले यह सत्यापित करना अनिवार्य होना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति जीवित है या नहीं। इस संबंध में टीमों को नए निर्देश जारी किए जाएंगे।

एफआर लगाने के पीछे आशंका यह भी जताई जा रही है कि कहीं वर्तमान उपभोक्ताओं की विजिलेंस टीम से मिलीभगत तो नहीं है? कई बार विवेचना के नाम पर एफआर लगाकर मामले रफा-दफा कर दिए जाते हैं। इस शक की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

जब विजिलेंस टीम बिजली चोरी पकड़ती है तो मुकदमा दर्ज होता है। यदि विवेचना के दौरान आरोपी विभाग द्वारा तय शमन राशि जमा कर देता है तो एफआर लगाकर मामला अदालत भेज दिया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत हर साल विभाग 10 से 12 करोड़ रुपये की वसूली करता है।

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