यूपी के चुनावी दंगल में पंडितों की शरण में प्रत्याशी, जाने क्या होगा रामा रे!
अब टिकट पाने वाले प्रत्याशियों को पंडितों और मंदिरों की चौखट दिखाई देने लगी है। हर प्रत्याशी अपने पुरोहितों के यहां दरबार लगा रहा है और जानकारी ले रहा है की किस शुभ मुहूर्त में नामांकन किया जाए।
वाराणसी। विधानसभा चुनाव के इस महासंग्राम में अब टिकट पाने वाले प्रत्याशियों को पंडितों और मंदिरों की चौखट दिखाई देने लगी है। हर प्रत्याशी अपने पुरोहितों के यहां दरबार लगा रहा है और इस बात की जानकारी ले रहा है की किस शुभ मुहूर्त में नामांकन किया जाए। जिससे विरोधी को पछाड़कर जीत हासिल हो सके। साथ ही प्रत्याशी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र के वोटरों को अपने पक्ष में वोट करने के लिए टोना टोटका भी कर रहे हैं। दरअसल वाराणसी बड़े-बड़े विद्वानों का गढ़ है, ऐसे में ना सिर्फ वाराणसी बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के सभी दलों के प्रत्याशी अपने-अपने पुरोहितों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।

प्रत्याशी कुंडली के आधार पर ले रहे हैं जानकारी
ये उम्मीदवार अपने कुंडली के आधार पर ब्राह्मणों से संपर्क साधे हुए हैं। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, सपा सहित कई निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में ताल ठोकने को तैयार हैं। लेकिन नामांकन किस दिन किया जाए ये अभी कोई भी प्रत्याशी साफ नहीं कर रहा है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर बटुक भैरव मंदिर तक दर्शन करने के बाद ही कोई नामांकन स्थल पर पहुंचता है। लेकिन दर्शन और पूजन का काम वाराणसी में सिर्फ काशी क्षेत्र के प्रत्याशी नहीं बल्कि पूर्वांचल के सभी उम्मीदवार करते आ रहे हैं।
क्या कहते हैं बटुक भैरव के महंत?
वाराणसी में बटुक भैरव मंदिर के महंत श्री विजय मोहन पुरी (विजय गुरु ) ने oneindia को बताया की इस बार नामांकन के लिए शुभ लग्न की तिथि ज्यादा नहीं है। जो हैं भी वो योग्य नहीं हैं। ऐसे में 16 फरवरी की तारीख ही सबसे उत्तम रहेगी। इस दिन कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को गुरुवार है और गुरु का प्रधान होना 'विजय श्री' दिलाता है। वैसे और भी तिथियों पर नामांकन के लिए कुंडली के आधार पर निर्णय किया जा सकता है। उन्होंने बताया की कई उम्मीदवार इनसे लगातार संपर्क में हैं और उनके लिए अनुष्ठान भी किया जा रहा है।
मन्नत से लेकर अखंड पाठ तक
इस विधानसभा चुनावों में हर कोई अपने जीत का सेहरा बांधना चाहता है। जिसके लिए प्रत्याशी और उनके समर्थक वाराणसी के अलग-अलग मंदिर में विशेष अनुष्ठान से लेकर पाठ तक करा रहे हैं। कई प्रत्याशियों ने तो मन्नत तक मान रखी है। बस किसी भी हाल में जीत मिल सके, ऐसे में किसे सफलता मिलेगी ये तो विधानसभा परिणाम के बाद ही सामने आएगा। लेकिन ये जरूर साफ है कि चुनावों के बहाने ही सही, नेताओं को मंदिरों और अपने पुरोहितों की याद जरूर आ गई है।












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