वाया मुस्लिम वोट बैंक सपा-बसपा, बीजेपी के लिए 2019 में इस तरह खड़ी करेंगे मुश्किल
वाया मुस्लिम वोट बैंक सपा-बसपा, बीजेपी के लिए 2019 में इस तरह खड़ी करेंगे मुश्किल
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के लोकसभा उपचुनाव में सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सीट फूलपुर में बीजेपी की किरकिरी हो गई है। नॉर्थ-ईस्ट में जीत का भगवा फहराने के बाद यूपी में पार्टी को झटका लगना बीजेपी के लिए 2019 के लिहाज से अच्छा संकेत नहीं है। दूसरी ओर यूपी में बुआ-बबुआ के नारे लग रहे हैं। मोदी की सुनामी में अपने-अपने आशियाने गंवाने के बाद आखिलेश यादव और मायावती ने यूपी उपचुनाव के लिए जो फार्मूला बनाया था वो हिट साबित हुआ। यूपी उपचुनाव के बाद अब 'बुआ-बबुआ' फार्मूला मतलब सपा-बसपा का गठजोड़ 2019 में बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। जाहिर है सपा और बसपा के साथ दलित-यादव वोटर तो आएगा ही लेकिन 2019 में सबसे निर्णायक साबित होंगे मुस्लिम, जो भगवा लहर में बिखर गए थे।

भगवा आंधी में सबकुछ लुटा चुके बुआ-बबुआ को अब आई अक्ल
मुलायम सिंह यादव को एक जमाने में मुल्ला मुलायम कहा जाता था। यादव-मुस्लिम वोटर के गठजोड़ का मुलायम फार्मूला बरसों तक समाजवादी पार्टी को सत्ता के शिखर तक ले जाता रहा। इसी यादव-मुस्लिम फार्मूले के चलते यूपी में पूरे डेढ़ दशक तक भगवा परचम नहीं लहरा सका। लेकिन उसी उत्तर प्रदेश को अमित शाह ने पहले 2014 लोकसभा चुनाव और उसके बाद यूपी विधानसभा चुनाव में भगवा रंग ऐसा रंग दिया कि मुलायम और बसपा बेरंग हो गए। अमित शाह ने यूपी में मुस्लिम वोटर को इस तरह से बिखेरा सपा-बसपा दोनों लुट गए। लेकिन गोरखपुर और फूलपुर में बुआ-बबुआ के साथ आने से दोनों दलों को उम्मीद जगी है। 2019 में अगर सपा-बसपा साथ आए तो दलित और यादव वोट संगठित होगा, लेकिन सबसे अहम बात यह होगी कि मुस्लिम वोटर बिखरेगा नहीं।

मुस्लिम वोट ऐसा बिखरा कि बिगड़ गया सपा-बसपा दोनों का खेल
2014 लोकसभा चुनाव में पहली बार ऐसा जब यूपी से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं चुना गया। 2017 यूपी विधानसभा चुनाव में केवल 24 मुस्लिम विधायक जीते, जबकि 2012 में जब सपा को बंपर जीत मिली थी, तब 63 मुस्लिम विधायक जीतकर सदन में पहुंचे थे। दोनों चुनावों की तुलना करें तो मुस्लिम विधायकों 17.1% से 5.9% पर आ गए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि 2017 विधानसभा चुनाव में मायावती ने ज्यादा मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतार दिए। इसका फायदा बीजेपी को मिला। वो चाहते थे कि मुस्लिम वोट बंट जाए और ऐसा ही हुआ। लेकिन अब बुआ-बबुआ के साथ आने का रास्ता साफ हो गया है। अगर 2019 में ये साथ आकरर चुनाव लड़ते हैं तो बीजेपी के लिए किला बचाना बहुत मुश्किल होगा।

यूपी में मुस्लिम आबादी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में 19.3% मुस्लिम हैं। यहां 73 सीटों पर मुस्लिम आबादी 30% से ज्यादा है। 2012 विधानसभा चुनाव में इनमें से 35 सीटें सपा ने जीती थीं, जबकि बसपा को 13 सीटों पर जीत मिली थी।












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