सबरीमाला आंदोलन के सभी मामले वापस लेने की मांग, भाजपा विधायकों ने सोने की चोरी की सीबीआई जांच की डिमांड

Sabarimala Protests: केरल में सबरीमाला आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन विधायकों ने राज्य सरकार से मांग की है कि सबरीमाला विरोध प्रदर्शनों में शामिल श्रद्धालुओं के खिलाफ दर्ज सभी मामले बिना किसी भेदभाव के वापस लिए जाएं।

इसके साथ ही उन्होंने सबरीमाला मंदिर में कथित सोने की चोरी और अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की भी मांग उठाई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि श्रद्धालुओं को वर्षों से बेवजह कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है, जबकि मंदिर की संपत्तियों से जुड़े गंभीर आरोपों पर अब तक निष्पक्ष जांच नहीं हुई है।

BJP MLAs Demand

मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

भाजपा विधायकों राजीव चंद्रशेखर, वी. मुरलीधरन और बी. बी. गोपाकुमार ने मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन को पत्र लिखकर कहा कि सबरीमाला आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामले अनुचित और पक्षपातपूर्ण थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली वामपंथी सरकार ने श्रद्धालुओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की, जबकि वे केवल परंपराओं की रक्षा के लिए आंदोलन कर रहे थे।

29 हजार से अधिक लोग बने आरोपी

विधायकों ने बताया कि सबरीमाला विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुल 2,624 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 29,119 लोगों को आरोपी बनाया गया। सरकार फिलहाल 1,047 छोटे मामलों को वापस लेने पर विचार कर रही है, लेकिन भाजपा नेताओं का कहना है कि गंभीर और गैर-गंभीर मामलों का वर्गीकरण गलत है और इससे हजारों श्रद्धालुओं के साथ अन्याय हो रहा है।

"श्रद्धालुओं को अपराधी की तरह देखा गया"

भाजपा नेताओं ने कहा कि आंदोलन में शामिल अधिकांश लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, फिर भी उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि श्रद्धालुओं को अपराधियों की तरह पेश किया गया, जबकि उनका उद्देश्य केवल धार्मिक परंपराओं को बनाए रखना था।

2018 के फैसले के बाद शुरू हुआ विवाद

सबरीमाला विवाद 2018 में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें मासिक धर्म की आयु की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। इस फैसले का कई श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों ने विरोध किया था। उनका कहना था कि यह भगवान अयप्पा से जुड़ी सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।

सोने की चोरी मामले में सीबीआई जांच की मांग

भाजपा विधायकों ने सबरीमाला मंदिर में कथित सोने की चोरी और चढ़ावे में अनियमितताओं के मामले की सीबीआई जांच की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि केवल केंद्रीय एजेंसी ही निष्पक्ष और व्यापक जांच कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने और अन्य कीमती वस्तुओं के प्रबंधन में भारी अनियमितताएं हुई हैं।

पूर्व अधिकारियों और नेताओं की जांच की मांग

विधायकों ने मांग की कि त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के पूर्व अधिकारियों, पूर्व मंत्रियों और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो। उन्होंने मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी से जुड़े आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित राजनीतिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी गहराई से जांच की जानी चाहिए।

सरकार पर बढ़ा दबाव

भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार से दोनों मुद्दों पर तत्काल फैसला लेने की अपील की है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना और सोने की चोरी मामले में निष्पक्ष जांच कराना न्याय सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

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