Siddaramaiah क्या Karnataka CM पद से इस्तीफा देने को राजी? हाई कमान ने क्या फैसला लिया?
Siddaramaiah Resign CM Karnataka: कर्नाटक की राजनीति इन दिनों उच्च तापमान पर है। कांग्रेस हाई कमांड ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाई कमांड ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पद छोड़ने के लिए कहा है और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका और राज्यसभा सीट की पेशकश की है। बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया इस प्रस्ताव से नाखुश हैं।
आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी के आंतरिक गठजोड़, सत्ता साझेदारी के वादे और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव एक बार फिर उबाल पर है। 26 मई 2026 को दिल्ली में कांग्रेस हाई कमांड के साथ हुई अहम बैठक के बाद यह सवाल जोरों पर है कि क्या 78 वर्षीय सिद्धारमैया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राष्ट्रीय भूमिका (राज्यसभा) में जाएंगे और डीके शिवकुमार को CM पद सौंपा जाएगा? यह संकट सिर्फ दो नेताओं की लड़ाई नहीं, बल्कि कांग्रेस की रणनीति, 2028 विधानसभा चुनाव और राज्य प्रशासन की स्थिरता से जुड़ा है।

2023 का 50-50 फॉर्मूला और टूटता गठबंधन
2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भारी जीत के बाद पार्टी हाई कमांड ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया। सूत्रों के अनुसार, अनौपचारिक समझौता था कि सिद्धारमैया ढाई साल (2.5 वर्ष) CM रहेंगे, उसके बाद शिवकुमार पद संभालेंगे।
सिद्धारमैया शिवकुमार के इस 'ढाई साल के वादे' से इनकार करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाई कमांड ने उन्हें पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करने का आश्वासन दिया था। जनवरी 2026 में सिद्धारमैया कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं (डी. देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़कर)।
अब 2026 के मध्य में यह मुद्दा फिर उछला है।
दिल्ली बैठक: क्या हुआ 26 मई को?
कांग्रेस हाई कमांड (मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला) ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों को दिल्ली बुलाया। आधिकारिक रूप से बैठक का एजेंडा राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों की रणनीति बताया गया। हालांकि सूत्रों के अनुसार असली चर्चा नेतृत्व परिवर्तन, कैबिनेट रिशफल और सत्ता साझेदारी पर हुई।
- सिद्धारमैया को राज्यसभा सीट और राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका (संभवतः AICC में कोई पद) की पेशकश की गई।
- उनके बेटे यथेंद्र सिद्धारमैया को कैबिनेट में जगह देने का प्रस्ताव।
- सिद्धारमैया शुरू में नाराज बताए जा रहे हैं और पूरे कार्यकाल की मांग कर रहे हैं। कुछ सहयोगी उन्हें 'हाई कमांड का फैसला स्वीकार करने' की सलाह दे रहे हैं, लेकिन तुरंत इस्तीफा देने से मना कर रहे हैं। डीके शिवकुमार शिवकुमार कैंप का दबाव है कि 'खुला राज' वाला समझौता पूरा किया जाए।
सिद्धारमैया इस्तीफा देंगे या नहीं?
अभी तक कोई आधिकारिक इस्तीफा नहीं हुआ है। सिद्धारमैया ने कहा है कि वे हाई कमांड के फैसले का सम्मान करेंगे, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से 'क्यों इस्तीफा दूं?' जैसी भावना भी जताई है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से कहा कि अगर हाई कमांड स्पष्ट रूप से कहे तो इस्तीफा दूंगा, लेकिन बिना वजह नहीं। उनके करीबी सलाह दे रहे हैं कि एक दिन का समय मांगें और विकल्प तलाशें।
डीके शिवकुमार CM बनेंगे?
- डीके शिवकुमार मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वे पार्टी संगठन में मजबूत हैं, वित्त मंत्री रह चुके हैं और वोक्कालिगा समुदाय का बड़ा चेहरा हैं। लेकिन चुनौतियां भी हैं...
- सिद्धारमैया के अन्ना-हजारे स्टाइल के AHINDA (अल्पसंख्यक, हिंदू, दलित) वोट बैंक का विकल्प ढूंढना पड़ेगा।
- कुछ विधायकों का समर्थन सिद्धारमैया के साथ है।
- हाई कमांड शायद तुरंत पूर्ण परिवर्तन की बजाय मध्य मार्ग (कैबिनेट रिशफल + सिद्धारमैया को सम्मानजनक निकास) अपनाए।
कुछ चर्चाओं में होम मंत्री जी. परमेश्वर (दलित चेहरा) को अंतरिम CM बनाने का विकल्प भी सामने आया है।
संकट का राज्य प्रशासन पर असर
विपक्षी भाजपा (आर. अशोक) इस संकट को 'कोमा में पड़ी सरकार' बता रही है।
- फैसले लेने में देरी।
- मंत्रियों के बीच गुटबाजी।
- MUDA घोटाला, अन्य भ्रष्टाचार के आरोप।
- विकास कार्यों पर ब्रेक।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने कांग्रेस को 'परजीवी पार्टी' करार देते हुए आंतरिक कलह का फायदा उठाया है।
कांग्रेस हाई कमांड की रणनीति
कांग्रेस के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है:
- सिद्धारमैया को हटाने से AHINDA वोट बैंक प्रभावित हो सकता है।
- शिवकुमार को CM बनाने से Vokkaliga समुदाय मजबूत होगा, लेकिन अन्य संतुलन बिगड़ सकता है।
- 2028 चुनाव से पहले स्थिरता बनाए रखना जरूरी।
हाई कमांड पिछले कुछ दिनों में कई दौर की बैठकें कर चुका है। स्पष्टता 2-3 दिनों में आने की उम्मीद है।
सिद्धारमैया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने 2013-2018 में भी CM पद संभाला था। वे कर्नाटक में सामाजिक न्याय और AHINDA राजनीति के प्रतीक माने जाते हैं। डीके शिवकुमार पार्टी के संगठनात्मक चेहरे हैं और 2023 जीत में उनका योगदान अहम था। दोनों के बीच पूरकता और प्रतिस्पर्धा दोनों है।
कांग्रेस की कशमकश
यह संकट कांग्रेस के लिए बड़ी परीक्षा है। अगर हाई कमांड समय पर और निष्पक्ष फैसला लेती है तो पार्टी को फायदा होगा। देरी से अंदरूनी कलह बढ़ेगी और भाजपा को मुद्दा मिलेगा।
कर्नाटक की जनता विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव चाहती है। नेतृत्व परिवर्तन चाहे जो भी हो, अंतिम लक्ष्य राज्य का विकास और कांग्रेस की 2028 में दोबारा जीत होना चाहिए। अभी स्थिति तरल है। हर घंटे नई खबर आ सकती है। सिद्धारमैया इस्तीफा देते हैं या नहीं - यह फैसला दिल्ली में होगा, लेकिन असर पूरे कर्नाटक पर पड़ेगा।













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