UP: 6 सालों में विधान परिषद में ताकतवर बनकर उभरी BJP, शून्य पर पहुंची कांग्रेस, सपा-बसपा का हुआ ये हाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले 6 साल में बीजेपी विधानसभा के साथ ही विधान परिषद में भी ताकतवर बनकर उभरी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीजेपी के पास यहां तीन चौथाई बहुमत हो गया है।

UP legislative council: उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में दूसरी बार शानदार सफलता अर्जित की थी वहीं दूसरी ओर विधान परिषद में भी वह रिकॉर्ड बना रही है। परिषद में भाजपा की ताकत एक साल में दोगुनी से अधिक हो गई है।
34 से बढ़कर 80 तक पहुंची बीजेपी
विधान परिषद में भाजपा की संख्या 34 से बढ़कर 80 हो गई है। उच्च सदन में छह सदस्यों को नामांकित करने के बाद पार्टी के पास अब 3/4 बहुमत हो गया है। बनवारी लाल दोहरे के निधन और लक्ष्मण आचार्य के राज्यपाल बनने के बाद इन सीटों पर जल्द ही चुनाव होना है। दोहरे का कार्यकाल जुलाई 2028 जबकि आचार्य का कार्यकाल जनवरी 2027 तक था।
सपा की ताकत घटकर 9 तक पहुंची
परिषद में सपा की ताकत 17 से घटकर नौ हो गई है। विपक्ष के नेता पद के लिए भी उसके पास बहुमत नहीं बचा है। इस साल फरवरी में हुए स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों में सपा को विपक्ष के नेता की कुर्सी मिलने की उम्मीदें खत्म हो गईं थीं। फरवरी में जिन पांच सीटों पर चुनाव हुए थे उनमें से चार पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी। पांचवीं सीट कानपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र निर्दलीय उम्मीदवार राज बहादुर चंदेल ने जीती थी।
बसपा एक पर पहुंची तो काग्रेस शून्य तक
बीजेपी और सपा के अलावा बसपा, जो 2022 के विधानसभा चुनावों में सिर्फ एक सीट पर सिमट गई थी। अब विधान परिषद में इसकी संख्या चार से घटकर एक हो गई। इसके एकमात्र एमएलसी भीम राव अंबेडकर हैं। इसी तरह कभी यूपी विधानसभा के दोनों सदनों में दबदबा रखने वाली कांग्रेस का पिछले साल जुलाई में एकमात्र एमएलसी दीपक सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद पूरी तरह से सफाया हो गया।
पिछले साल अप्रैल में बीजेपी ने जीती 33 सीटें
बीजेपी ने पिछले साल अप्रैल में 36 स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्रों में से 33 सीटें जीतीं थीं। इनमें से उसने नौ सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल की। इससे पहले इनमें से 31 सीटें 2016 से सपा के पास थीं। बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह वाराणसी से निर्दलीय के रूप में जीतीं। निर्दलीय उम्मीदवार विक्रांत सिंह ने आजमगढ़ से जीत हासिल की थी। जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के उम्मीदवार अक्षय प्रताप सिंह ने प्रतापगढ़ से जीत हासिल की।
मई में खाली होंगी एमएलसी की 13 सीटें
हालांकि परिषद का राजनीतिक समीकरण मई तक और बदलने की संभावना है जब सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल और बसपा एमएलसी अंबेडकर सहित 13 एमएलसी सेवानिवृत्त होंगे। यूपी विधानसभा में भाजपा और उसके सहयोगियों की ताकत को देखते हुए भगवा संगठन सभी 11 सीटों को बरकरार रखने की कोशिश करेगा। हालांकि सभी की निगाहें सपा और उसकी सहयोगी रालोद पर होंगी जो अन्य दो सीटें जीतने की कोशिश करेगी।












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