UP में दलितों को साधने के लिए BJP ने उठाया ये बड़ा कदम, ये हैं इसकी वजहें
लखनऊ, 4 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने 2024 के आम चुनाव की तैयारियों को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। बीजेपी ने जिस तरह से विधानसभा चुनाव के दौरान दलित बस्तियों में जाकर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों का प्रचार प्रसार किया था उसी तरह अब बीजेपी दलितों तक पहुंचने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। दलित समुदाय को पार्टी की तरफ आकर्षित करने के लिए भाजपा ने एक अभियान शुरू किया है जिसका उद्देश्य पूरे उत्तर प्रदेश में लगभग 30,000 अनुसूचित जाति-बहुल बस्तियों में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन सुनिश्चित कराना है। हालांकि बीजेपी के सूत्रों की माने तो मंत्रियों के मंडल दौरों के बाद जो रिपोर्ट आई थी उसके बाद ही संगठन ने यह कदम उठाया है।

बीजेपी 26 नवंबर तक चलाएगी बस्ती संपर्क अभियान
उत्तर प्रदेश एससी मोर्चा के प्रमुख रामचंद्र कनौजिया ने कहा कि 'बस्ती संपर्क अभियान' के तहत भाजपा के एससी मोर्चा द्वारा 26 नवंबर तक यह अभियान चलाया जाएगा। यह कार्यक्रम 70 दिनों तक चलेगा। पहला चरण 7 अक्टूबर को पूरा होगा। भाजपा की योजना 98 संगठनात्मक जिलों के 1,000 गांवों को कवर करने की है। बीजेपी का यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब कांग्रेस ने यूपी में एक दलित बृजलाल खाबरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। बीजेपी को लगता है कि समय रहते इस फैक्टर को काउंटर करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है।

विपक्ष के प्रयासों को विफल करने की कवायद
कनौजिया कहते हैं कि, "कई दिनों तक चले लंबे अभ्यास के बाद बस्तियों और गांवों की पहचान की गई। हम अब एक अभियान मोड में चले गए हैं। "भाजपा सूत्रों ने कहा कि योजना, जिसे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तैयार किया गया है, मुख्य रूप से भगवा संगठन को "दलित विरोधी" के रूप में चित्रित करने के विपक्ष के प्रयासों को विफल करना है।कन्नौजिया ने कहा कि पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को दलित परिवारों के साथ बैठने, धैर्यपूर्वक उनकी समस्याओं को सुनने और उनका तुरंत समाधान करने को कहा है।

केंद्र और राज्य की योजनाओं को पहुंचाने की जिम्मेदारी
उन्होंने कहा, "केंद्र और राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।" केंद्र द्वारा मुफ्त राशन योजना को तीन महीने और बढ़ाने के बीच यह अभियान आया है। यूपी बीजेपी एससी मोर्चा के अध्यक्ष राम चंद्र कन्नौजिया ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह अभियान भगवा पार्टी के दलित संगठनात्मक ईकाई द्वारा चलाया जा रहा है जिसमें क्षेत्रीय अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, वर्तमान एवं पूर्व विधायक और एससी समुदाय के यूपी मंत्री शामिल हैं।

दलितों से कनेक्ट करना इस अभियान का मकसद
विशेषज्ञों के मुताबिक मुफ्त राशन योजना से दलितों और अन्य पिछड़ी जातियों को काफी फायदा हुआ है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से गरीब हैं। बसपा की राजनीतिक और चुनावी उपस्थिति में गिरावट के बीच दलितों के बीच अपनी पैठ बनाना भाजपा के इस अभियान का असली मकसद है। बीजेपी को इस बात का भी एहसास है कि जिस तरह से कांग्रेस ने दलित चेहरे पर दांव लगाया है उसके बाद दलित समुदाय से कनेक्ट करने की जरूर और बढ़ गई है।

मंत्रियों से मिले फीडबैक के बाद संगठन ने उठाया कदम
बीजेपी के सूत्रों की माने तो बीजेपी की दूसरी बार सरकार बनने के बाद संगठन के इशारे पर योगी ने मंत्रियों के बीच मंडलों को बंटवारा किया था। इन मंत्रियों को अलग अलग मंडलों में जनता का फीडबैक जुटाने के लिए भेजा गया था। बीजेपी के इस अभियान में आरएसएस के आनुसांगिक संगठनो ने भी हिस्सा लिया था जो दलित और मलीन बस्तियों में लंबे समय से काम कर रहे हैं। सरकार और संगठन की तरफ से काफी सोच समझकर मंत्रियों को आरएसएस पदाधिकारियों के साथ मिलकर काम करने की हिदायत दी गई थी। मंत्रियों ने हाल ही में अपनी फीडबैक सीएम योगी को सौंपी थी। जिसके बाद अब संगठन स्तर पर दलित बस्तियों में मोदी और योगी की नीतियों को पहुंचाने का जिम्मा संगठन ने उठाया है।












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