UP ATS Action: PAK के गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़, बुलंदशहर से 2 अरेस्ट कौन?
Uttar Pradesh ATS Action News: उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने एक बार फिर पाकिस्तान से संचालित आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क को करारा झटका दिया है। गुरुवार (18 जून 2026) को ATS ने बुलंदशहर जिले के अकबरपुर गांव से मोहम्मद उमर और फैजान नाम के दो युवकों को गिरफ्तार किया। दोनों पाकिस्तान में रह रहे गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी आबिद जट्ट के नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं।
यह गिरफ्तारी महज दो युवकों की नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, सामाजिक सद्भाव और सुरक्षा को निशाना बनाने वाले बड़े क्रॉस-बॉर्डर नेटवर्क का हिस्सा है। जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया (WhatsApp और Instagram) के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे और पैसे के लालच में देश-विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे। आइए विस्तार से समझते हैं....

Uttar Pradesh News: क्या है पूरा मामला?
ATS अधिकारियों के अनुसार, खुफिया जानकारी के आधार पर 17 जून को दोनों को बुलंदशहर से पकड़ा गया। पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि शहजाद भट्टी, आबिद जट्ट, हम्माद बरकती और राणा हुनैन जैसे पाकिस्तानी हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रहे थे।
आरोपियों को सौंपे गए काम:
- बुलंदशहर के विभिन्न इलाकों में आबिद जट्ट के पोस्टर चिपकाना और इसका वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजना।
- संवेदनशील जगहों की रेकी (सर्विलांस) करना - खासकर लखनऊ छावनी और प्रयागराज के बमरौली एयर फोर्स स्टेशन की।
- देश में सामाजिक तनाव पैदा करने, दहशत फैलाने और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली प्रोपेगैंडा सामग्री फैलाना।
पोस्टर चिपकाने के लिए 12,000 रुपये और रेकी के लिए 10,000 रुपये का लालच दिया गया था। ATS ने उनके पास से 55 पोस्टर, वीडियो क्लिप्स और अन्य डिजिटल सबूत बरामद किए हैं। लखनऊ ATS थाने में UAPA समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर आगे की जांच चल रही है।
Who Is Shahzad Bhatti: शहजाद भट्टी कौन है? ISI प्रॉक्सी गैंगस्टर का खतरा
शहजाद भट्टी पाकिस्तान में सक्रिय एक गैंगस्टर है, जिसे भारतीय सुरक्षा एजेंसियां ISI का प्रॉक्सी मानती हैं। वह भारत में युवाओं को रेडिकलाइज करने, स्लीपर सेल बनाने, टारगेट किलिंग, हथियार सप्लाई और प्रोपेगैंडा फैलाने का काम करता है।
पिछले कुछ महीनों में यूपी ATS, STF और अन्य राज्यों की एजेंसियों ने इस नेटवर्क के खिलाफ कई कार्रवाई की हैं:
- मई 2026 में सहारनपुर, मेरठ, आजमगढ़ आदि जगहों से कई गिरफ्तारियां।
- अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 5 मामले दर्ज और 15 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार।
- दिल्ली, पंजाब और यूपी में टारगेटेड अटैक्स की प्लानिंग का खुलासा।
यह नेटवर्क सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल करता है। युवाओं को धार्मिक भावनाएं भड़काकर या पैसे का लालच देकर भर्ती किया जाता है। भर्ती के बाद उन्हें छोटे-छोटे काम (पोस्टर, वीडियो, रेकी) सौंपे जाते हैं, जो धीरे-धीरे बड़े आतंकी मॉड्यूल में बदल सकते हैं।
Who Are Mohammad Umar-Faizan: कौन हैं मोहम्मद उमर और फैजान?
दोनों बुलंदशहर जिले के अकबरपुर गांव के रहने वाले हैं। जांच के अनुसार, वे सामान्य युवा थे लेकिन ऑनलाइन संपर्क के जरिए नेटवर्क में फंस गए। ATS का कहना है कि ऐसे कई युवा अभी भी नेटवर्क के संपर्क में हो सकते हैं। एजेंसियां पूरे नेटवर्क को मैप कर रही हैं।
ऐसे काम करता है पाकिस्तान का हाइब्रिड वॉरफेयर
यह मामला हाइब्रिड वॉरफेयर का क्लासिक उदाहरण है। पाकिस्तान प्रत्यक्ष युद्ध की बजाय सस्ते और गुप्त तरीकों से भारत को अस्थिर करने की कोशिश करता है:-
- सोशल मीडिया रेडिकलाइजेशन - युवाओं को ऑनलाइन संपर्क।
- लो-कॉस्ट टेरर - पोस्टर, अफवाह, छोटी घटनाएं।
- रेकी और इंटेल - संवेदनशील जगहों की जानकारी।
- स्लीपर सेल - लंबे समय तक निष्क्रिय रखकर जरूरत पड़ने पर सक्रिय करना।
- गैंगस्टर-टेरर लिंक - अपराध और आतंक को मिलाकर फंडिंग और लॉजिस्टिक्स।
ISI इन गैंगस्टर्स को शेल्टर, फंडिंग और निर्देश देती है। भारत में कई राज्यों (यूपी, पंजाब, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर) में ऐसे मॉड्यूल सक्रिय पाए गए हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौतियां?
- युवा भर्ती: बेरोजगारी और सोशल मीडिया के दौर में युवा आसानी से प्रभावित हो रहे हैं।
- सीमापार से नियंत्रण: हैंडलर्स पाकिस्तान में सुरक्षित बैठे निर्देश देते हैं।
- डिजिटल सबूत: एन्क्रिप्टेड ऐप्स (WhatsApp, Signal, Instagram) का इस्तेमाल, ट्रेस करना मुश्किल।
- समाजिक सद्भाव: धार्मिक/जातीय तनाव पैदा करने की कोशिश।
यूपी ATS की यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यूपी बड़े राज्य होने के साथ-साथ संवेदनशील जगहों (एयर फोर्स स्टेशन, छावनी) का केंद्र भी है।
ATS-STF की भूमिका और सफलता
उत्तर प्रदेश में ATS और STF की संयुक्त कार्रवाइयां पिछले सालों में काफी बढ़ी हैं। CM योगी आदित्यनाथ की सरकार ने आतंकवाद और संगठित अपराध पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। खुफिया जानकारी पर तुरंत एक्शन, तकनीकी निगरानी और इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन से कई प्लॉट नाकाम हुए हैं।
इस मामले में भी ATS ने:
- खुफिया इनपुट पर तुरंत छापा।
- डिजिटल फॉरेंसिक और फोन डेटा से लिंक्स खोले।
- रिकवरी और कबूलनामे दर्ज किए।
क्या सबक मिलते हैं?
- सोशल मीडिया सतर्कता: युवाओं और अभिभावकों को ऑनलाइन अजनबियों से संपर्क की चेतावनी।
- समुदाय स्तर की निगरानी: गांव-शहर स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्टिंग।
- तकनीकी क्षमता: एजेंसियों को AI, डीपफेक और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन ट्रैकिंग में और निवेश।
- डि-रेडिकलाइजेशन प्रोग्राम: गिरफ्तार युवाओं को मुख्यधारा में लाने की जरूरत।
आगे क्या?
ATS की जांच जारी है। हो सकता है कि इस नेटवर्क के और सदस्यों की गिरफ्तारी हो। पूरे मामले में UAPA के तहत सख्त कार्रवाई होगी। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय से ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि भारत की सुरक्षा चुनौतियां केवल सीमा पर नहीं, बल्कि आंतरिक मोर्चे पर भी हैं। ATS की सफलता देश की सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है, लेकिन सतर्कता कभी कम नहीं होनी चाहिए।
मोहम्मद उमर और फैज़ान की गिरफ्तारी एक छोटी कड़ी है, लेकिन शहजाद भट्टी जैसे ISI-लिंक्ड गैंगस्टर्स के बड़े नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम। यूपी ATS ने साबित किया कि खुफिया जानकारी और तेज एक्शन से किसी भी साजिश को नाकाम किया जा सकता है।













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