UP Assembly: समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायकों को असंबद्ध घोषित किया गया, भाजपा से नज़दीकियां बढ़ीं
UP Assembly News: उत्तर प्रदेश विधानसभा में सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव हुआ है। समाजवादी पार्टी से निष्कासित किए गए तीन विधायकों को अब सदन में असंबद्ध सदस्य घोषित कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
असंबद्ध घोषित किए गए विधायकों में रायबरेली की ऊंचाहार सीट से मनोज पांडेय, अमेठी की गौरीगंज सीट से राकेश प्रताप सिंह और अयोध्या की गोसाईगंज सीट से अभय सिंह शामिल हैं। अब तीनों को सदन में नई सीटें आवंटित की जाएंगी।

विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, तीनों विधायक अब किसी भी पार्टी के विधायी दल का हिस्सा नहीं रहेंगे। विधानसभा नियमों के तहत उन्हें स्वतंत्र सदस्य की श्रेणी में रखा गया है।
पार्टी से निष्कासन के बाद अगला कदम
2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में तीनों विधायकों ने भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। इस कार्रवाई को पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए सपा ने 23 जून को तीनों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि ये विधायक भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं। पार्टी ने त्वरित निर्णय लेते हुए निष्कासन के बाद विधानसभा में इनकी स्थिति को लेकर भी प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
भाजपा में शामिल होने की बन रहीं संभावना
मनोज पांडेय पहले ही सपा से दूरी बना चुके थे। राज्यसभा चुनाव के बाद उन्होंने खुलकर भाजपा का समर्थन किया और रायबरेली से टिकट न मिलने पर अपनी नाराजगी भी जताई थी। उसी दौरान अमित शाह उनसे मुलाकात के लिए पहुंचे थे।
इसी तरह अभय सिंह और राकेश सिंह के भी भाजपा से संपर्क में होने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तेज थीं। अब विधानसभा में असंबद्ध घोषित किए जाने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें और मजबूत हो गई हैं।
अखिलेश यादव का भाजपा पर व्यंग्य
अखिलेश यादव ने विधायकों के निष्कासन के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि भाजपा ने अगर इन तीनों को मंत्री बनाने का आश्वासन दिया है, तो अब उन्हें अपने वादे पर अमल करना चाहिए।
सपा अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा था कि अगर भाजपा को और विधायक चाहिए तो हम अगली खेप में और लोग दे सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब इन नेताओं को मंत्री बनने से कोई तकनीकी रुकावट नहीं होगी।
तीनों विधायकों को सदन में अब निर्दलीय सदस्यों की तरह नई जगह दी जाएगी। इसके साथ ही विधानसभा में सपा की संख्या घट गई है, जिससे विपक्ष की ताकत पर असर पड़ सकता है। भाजपा को इस घटनाक्रम से परोक्ष रूप से लाभ मिल सकता है।
विधानसभा के भीतर अब इन विधायकों की भूमिका भाजपा के करीब मानी जा रही है, हालांकि तकनीकी रूप से वे अभी भाजपा सदस्य नहीं हैं। लेकिन सियासी समीकरण यही इशारा कर रहे हैं कि आने वाले समय में उनका औपचारिक प्रवेश संभव है।












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