उन्नाव रेप पीड़िता ने निजी सुरक्षा अधिकारियों पर लगाया उत्पीड़न का आरोप, पहुंची कोर्ट
उन्नाव, अगस्त 01; उन्नाव रेप मामले में पीड़िता ने दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर कर उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर उसकी सुरक्षा में तैनात निजी सुरक्षा कर्मियों (पीएसओ) द्वारा कथित तौर पर उत्पीड़न किये जाने की शिकायत दर्ज करायी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह इस संबंध में स्थानीय पुलिस की मदद से एक प्रभाव आकलन रिपोर्ट दें।

न्यायाधीश ने 31 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये कहा कि शिकायतकर्ता की तरफ से याचिका दायर की गई है कि उसका और उसके परिवार के सदस्यों का न्यायालय के निर्देश पर तैनात किए गए पीएसओ द्वारा उत्पीड़न किया जा रहा है, यह इस संदर्भ में है कि वे उसे उसकी स्वतंत्रता का आनंद नहीं लेने दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की तरफ से एक सीलबंद लिफाफा भी प्राप्त हुआ है जिसमें शिकायतकर्ता और उसके परिवार के लोगों के बारे में कुछ आरोप लगाए गए हैं।
सत्र न्यायाधीश ने कहा, "यह निर्देश दिया जाता है कि इस आवेदन पर विचार किया जाए। महिला के साथ भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा 2017 में अपहरण कर दुष्कर्म किया गया था जब वह नाबालिग थी। इस मामले की जांच को उन्नाव से दिल्ली स्थानांतरित कर सीबीआई को सौंप दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने एक अगस्त 2019 को निर्देश दिया था की पीड़िता, उसकी मां और परिवार के अन्य सदस्यों को सीआरपीएफ की तरफ से सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे।
बता दें कि लड़की की सुरक्षा में पहले यूपी पुलिस के जवान तैनात थे लेकिन बाद में उन पर लापरवाही के आरोपों के चलते हटा दिया गया था। इस मामले के मुख्य आरोपी कुलदीप सेंगर को कोर्ट ने 20 दिसंबर 2019 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। सेंगर, उसके भाई और पांच अन्य को चार मार्च 2020 को न्यायिक हिरासत के दौरान पीड़िता के पिता की मौत के लिए दोषी ठहराते हुए 10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी।












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