MAU: अंधविश्वास! सर्पदंश से एक हफ्ते में दो मौत, पैटर्न एक: वही घरेलू नुस्खे, वही स्वास्थ्य केंद्र, वही मंदिर
उत्तर प्रदेश के जनपद मऊ में पिछले एक हफ्ते में दो सर्पदंश से मौत के मामले सामने आए हैं। हैरानी की बात ये है कि दोनों में ही अंधविश्वास के चलते मौत हुई है। दोनों ही मृतकों को घर के अंदर कमरे में सांप ने काटा था। सांप ने दोनों मृतकों के दाहिने हाथ की उंगली में ही काटा। यही नहीं, बल्कि दोनों पीड़ितों की मौत गाजीपुर जनपद के अमवा की सती मां मंदिर लेकर जाते समय रास्ते में हुई। दोनों ही मामलों में अस्पताल न ले जाकर परिजन घरेलू नुस्खे और झाड़फूंक में ही उलझे रहे।
सांप ने काटा तो करते रहे घरेलू इलाज, हालत बिगड़ी
पहला मामला मऊ के चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के हाफिजपुर गांव का है, जहां संजू (25) पुत्री जगरुप राम मंगलवार की देर रात एक कमरे में रखे बक्से में से कुछ कपड़े निकाल रही थी। इस बात से अंजान कि बक्से में पहले से एक जहरीला सांप है, उनका हाथ सांप के ऊपर पड़ गया। सांप ने फौरन ही उनके दाहिने हाथ की ऊँगली में काट लिया। परिजनों को जब पता चला तो वह पीड़ित को अस्पताल न ले जाकर घर पर ही करीब 2 घंटे तक घरेलू नुस्खों से उसका इलाज करते रहे।

सरकारी अस्पताल की बजाए लेकर पहुंचे मंदिर, मौत
लेकिन जब पीड़ित युवती की हालत बिगड़ी तो किसी के कहने पर वो उसे आजमगढ़ जनपद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़हलगंज ले गये। जहां पर चिकित्सक ने युवती की नाजुक स्तिथि देख कहीं और जाने की बात बताकर रेफर कर दिया। इसके बाद वो पीड़ित युवती को लेकर खरीहानी बाजार भी गए, जहां डॉक्टर नहीं मिला। इसके बाद भी सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाए वो उसे गाजीपुर जनपद के अमवा की सती मां मंदिर लेकर पहुंच गए। लेकिन इस बीच इलाज के अभाव में युवती ने दम तोड़ दिया।
एक हफ्ते पहले भी हुई थी एक बालक की मौत
वहीं दूसरा मामला भी मऊ के चिरैयाकोट थाना क्षेत्र का ही है। यहां के कमालचक वार्ड के बानोचक मुहल्ला निवासी प्रमोद राम का 13 वर्षीय पुत्र रविशंकर राम बीते चार जुलाई की शाम करीब चार बजे मोहल्ले के कुछ बच्चों के साथ अपने घर के एक कमरे में बैठकर खेल रहा था। इसी दौरान अचानक एक जहरीले सांप ने उसके दाहिना हाथ के तर्जनी उंगली में काट लिया। परिजन के लोग छिपकली का काटना समझकर घरेलू नुस्खे करने लगे।
वही स्वास्थ्य केंद्र, वही मंदिर, वही घरेलू नुस्खे
इस मामले में भी अस्पताल न ले जाने की बजाए घरेलू नुस्खों में काफी समय बर्बाद हो गया। जिसके बाद स्थित बिगड़ती देख परिजन पीड़ित बालक को पहले आजमगढ़ जनपद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़हलगंज ले गए। यहां भी चिकित्सक ने स्तिथि नाजुक देख हायर सेन्टर रेफर कर दिया। लेकिन परिजन अस्पताल के बजाय पीड़ित बालक को गाजीपुर जनपद के अमवा की सती मां ले जाने लगे, जहां रास्ते में ही बालक ने दम तोड़ दिया।
क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र में नहीं है एंटी स्नेक वेनम
दरअसल, हर रविवार को आयोजित होने वाले जनआरोग्य मेले में सर्वाधिक मरीजों का इलाज करने वाले चिरैयाकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध नहीं है। और तो और यहां एक ही चिकित्सक का पद है, जो कि सुबह से दोपहर तक अस्पताल पर मौजूद रहते है, लेकिन शाम को यहां इलाज राम भरोसे हो जाता है। ऐसे में हालत गंभीर होने पर रानीपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीज को जाना पड़ता है।












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