अखिलेश के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर तय नहीं हुआ खाका, लखनऊ में महारैली के बहाने होगा RLD का शक्ति प्रदर्शन

लखनऊ, 30 अगस्त: पश्चिमी यूपी में जातीय ताने-बाने को सहेजने के बहाने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी के तहत अब राजधानी लखनऊ में सितम्बर के में एक बड़े आयोजन की तैयारी रालोद कर रहा है। रालोद सूत्रों के मुताबिक यह पहले या दूसरे सप्ताह में हो सकता है। हालांकि सूत्र यह भी बता रहे हैं कि रालोद के मुखिया जयंत और सपा के चीफ अखिलेश यादव के बीच अभी सीटों के बंटवारे को लेकर खाका तैयार नहीं हो पाया है। वहीं, सपा के सूत्रों के अनुसार रालोद आवश्यकता से ज्यादा सीटें मांग रहा है जिसको लेकर सपा खेमा मंथन में लगा हुआ है।

जयंत

रालोद के नेताओं की माने तो जयंत चौधरी की पार्टी पश्चिमी यूपी में 'भाईचारा जिंदाबाद' अभियान चला रही है। जिसके तहत अब तक करीब 50 छोटे-बड़े सम्मेलन पश्चिमी यूपी के गांवो और शहरों में हो चुके हैं। इस सम्मेलन में सभी जाति और धर्म के लोगों को बुलाया जाता है, जातीय समीकरण को दुरुस्त किया जा सके। इन सम्मेलनों को लेकर तैयारी बहुत पहले ही कर ली गई थी। हालांकि लखनऊ में यह रैली कब होगी इसका अभी कोई कार्यक्रम तय नहीं हो पाया है।

पश्चिमी यूपी में लगभग 50 सीटों की दावेदारी ठोंक रहा है रालोद
पश्चिमी यूपी में जाट-मुस्लिम गठजोड़ बनाने में जुटी रालोद ने सपा के सामने करीब 50 सीटों की दावेदारी पेश की है। सपा के सूत्रों के अनुसार सपा हालांकि रालोद को ज्यादा से ज्यादा 20 सीटें ही देने का मन बना रही है। लेकिन दोनों पार्टियों के नेताओं की कोशिश है कि चुनाव नजदीक आने पर ही गठबंधन का ऐलान किया जाए। लेकिन यदि सीटों के तालमेल को लेकर दोनों पार्टियों के बीच पेच फंसने की संभावना जताई जा रही है।

जयंत

रोलोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोकी त्यागी ने वन इंडिया को बताया कि,

''पार्टी लगातार भाईचारा सम्मेलन कर रही है और इसमें काफी लागों का समर्थन मिल रहा है। जल्द ही लखनऊ में भी एक बड़ा आयोजन किया जाएगा। अगले सप्ताह लखनऊ में एक बैठक बुलाई गई है जिसमें आगे के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। पश्चिमी यूपी में भाजपा का कोई नामेलवा अब नहीं बचेगा। जिस तरह से किसानों के साथ मोदी और योगी सरकार ने छल किया है उसे लेकर पांच सितम्बर को सिसौली में एक किसान महापंचायत हो रही है जिसको रालोद भी अपना समर्थन दे रहा है। रालोद के चीफ जयंत चौधरी जी ने सभी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वो पांच सितम्बर को बड़ी संख्या में वहां पहुंचें।''

जाट- मुस्लिम-दलित गठजोड़ बनाने की कवायद
रालोद के वरिष्ठ नेता कहते हैं, '' यूपी में जाटों की आबादी लगभग 7 फिसदी तक है और इनका प्रभाव पश्चिमी यूपी की लगभग 100 विधानसभा सीटों पर है। वहीं दूसरी तरफ यदि गौर करें तो मुस्लिम आबादी भी करीब 25 पिसदी है। जबकी दलितों की आबादी पश्चिमी यूपी में 20 फिसदी मानी जाती है। अगर पार्टी जाट, मुस्लिम, दलित और यादव को एक साथ जोड़ने में कामयाब हो गई तो, फिर पश्चिमी यूपी में बाकी विपक्षी दलों की सूपड़ा साफ हो जायेगा। पश्चिमी यूपी में जाट, मुस्लिम, दलित और यादव का कंबिनेशन करीब 50 से 55 फिसदी तक पहुंच जाएगा।''

अखिलेश यादव

मुजफ्फरनगर दंगों से बिगड़ा जतीय भाईचारा
मुजफ्फरनगर में दंगों के बाद से ही मुस्लिम और जाटों के बीच एक गहरी खाई बन गई थी। इस दंगे में करीब 62 लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोगों को बेघर होना पड़ा था। भाजपा ने इसको लेकर समाजवादी पार्टी के खिलाफ माहौल बनाया था और पिछले तीन चुनावों से बीजेपी को लाभ होता दिख रहा है। हालांकि पश्चिमी यूपी में भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर की सक्रियता ने रालोद को सोचने पर मजबूर कर दिया है। चंद्रशेखर ने चुनाव को लेकर अभी पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि भागीदारी मोर्चा के तहत उनकी पार्टी चुनाव लड़ सकती है।

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